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गुरुग्राम को जलभराव से मिलेगी राहत, IIT की मदद से मॉनसून से पहले बनेगा डिजिटल रोडमैप

Haryana News: गुरुग्राम में जलभराव की पुरानी समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने IIT गांधीनगर के साथ मिलकर एक आधुनिक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है. इसे ‘रेन-टू-रेजिलिएंस’ नाम दिया गया है.

गुरुग्राम में जलभराव की पुरानी समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने एक ऐसा डिजिटल रोडमैप तैयार किया है, जिससे बारिश शुरू होने से पहले ही खतरे की तस्वीर साफ हो जाएगी. मॉनसून के मौसम में झील का रूप ले लेने वाले गुरुग्राम को राहत दिलाने के लिए नगर निगम गुरुग्राम ने IIT गांधीनगर के साथ मिलकर एक आधुनिक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है.

इसे ‘रेन-टू-रेजिलिएंस’ नाम दिया गया है, जिसका मकसद बारिश की आपदा से पहले चेतावनी जारी करना है. वैज्ञानिक मॉडलिंग और स्मार्ट सेंसरों के जरिए यह पता किया जा सकेगा कि बारिश के बाद शहर के किस कोने में कितना पानी जमा होने वाला है.

हाई-टेक प्रयोग, सेंसर और डेटा से जलभराव पर लगाम लगाने की तैयारी

इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के उन इलाकों की पहचान की जाएगी, जहां हर साल सबसे ज्यादा जलभराव होता है. इन संवेदनशील क्षेत्रों में मेड-इन-इंडिया फ्लड सेंसर लगाए जाएंगे. ये सेंसर सिर्फ पानी की ऊंचाई ही नहीं बताएंगे, बल्कि नालियों और ड्रेनेज पाइपों में जमी गंदगी और सिल्ट की जानकारी भी सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे.

डेटा आधारित प्लेटफॉर्म ‘एक्वा ट्विन’ और ‘रेन-टू-फ्लड’ की मदद से यह अनुमान पहले ही लग जाएगा कि किस इलाके में कितनी बारिश के बाद हालात बिगड़ सकते हैं. इससे नगर निगम की टीमें जलभराव से पहले ही मौके पर पहुंचकर जरूरी कदम उठा सकेंगी. खास बात यह है कि इस पूरे सिस्टम से जुड़ा डेटा देश के भीतर सुरक्षित सर्वरों पर रखा जाएगा, जो डिजिटल डेटा सुरक्षा कानूनों के अनुरूप होगा.

2 महीनों तक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल रहेगा मुफ्त

आर्थिक लिहाज से भी यह प्रयोग नगर निगम के लिए राहत भरा है. पहले 12 महीनों तक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मुफ्त रहेगा. निगम को केवल सेंसर लगाने पर करीब 20 लाख रुपये खर्च करने होंगे. एक सेंसर की कीमत लगभग एक लाख रुपये बताई जा रही है. अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो इसे SaaS मॉडल के जरिए पूरे गुरुग्राम में लागू किया जाएगा.

नगर निगम को उम्मीद है कि इस पहल के बाद गुरुग्राम देश का पहला ऐसा शहर बन सकता है, जहां बाढ़ और जलभराव से निपटने के फैसले अनुमान नहीं बल्कि डेटा के आधार पर लिए जाएंगे.

बारिश की वजह से गुरुग्राम की रफ्तार में लगा था ब्रेक

गौरतलब है कि, बीते सालों में मॉनसून में बारिश की वजह से गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. हल्की बारिश में भी सड़कों पर पानी भर जाता था. बारिश के बाद जगह-जगह हुए जल भराव के कारण जहां आम जन-जीवन प्रभावित हुआ था तो वहीं, बारिश ने गुरुग्राम की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया था.

बारिश के दिनों में जाम की समस्या आम हो गयी थी, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को घंटों फंसे रहना पड़ता था. आलम ये था कि बारिश की वजह से कई आईटी कंपनियों को मजबूरी में वर्क फ्रॉम होम के निर्देश जारी करने पड़े थे. अब नगर निगम का दावा है कि नई तकनीक के सहारे न सिर्फ बारिश की मार कम होगी, बल्कि शहर की रोजमर्रा की जिंदगी भी मॉनसून में पटरी पर बनी रह सकेगी.

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