Ambala News: अंबाला में टांगरी नदी का पानी घरों में घुसा, लोगों में सामान बचाने की जद्दोजहद
Ambala News In Hindi: पहाड़ी इलाकों में बारिश के बाद अंबाला की टांगरी नदी उफान पर है. लोगों के घरों में पानी और कीचड़ भर गया है. प्रशासन की बेरुखी से लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं.

पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश ने हरियाणा के अंबाला में एक बार फिर आफत बनकर कहर बरपाया है. बारिश का पानी टांगरी नदी के उफान के रूप में अंबाला के रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है. घरों में पानी घुसने के बाद लोग अपना सामान और जान बचाने के लिए जद्दोजहद करते नजर आए. हालात इतने खौफनाक थे कि कई परिवारों को अपना घर छोड़कर पूरी रात जीटी रोड (सड़क) और बांध पर गुजारनी पड़ी.
रात के समय टांगरी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और पानी लोगों के घरों में दाखिल हो गया. सुबह होते-होते पानी का स्तर कम होकर करीब 4 फीट रह गया और घरों से पानी निकलना शुरू हुआ. हालांकि, पानी तो कम हो गया, लेकिन पीछे घरों में भारी मात्रा में कीचड़ और सिल्ट छोड़ गया. सुबह से ही लोग अपने घरों में पहुंचकर साफ-सफाई करने में जुटे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का खौफ सता रहा है कि पीछे से पानी दोबारा न आ जाए.
लगातार चौथे साल बाढ़ जैसे हालात, प्रशासन नदारद
अंबाला के इस इलाके के लिए जलभराव कोई नई बात नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जुलाई 2023, 2024, 2025 और अब 2026 में भी उन्हें इसी बाढ़ जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है. प्रभावित परिवारों का कहना है कि प्रशासन ने सिर्फ सूचना जारी कर दी, लेकिन धरातल पर कोई मदद नहीं पहुंची. नगर निगम या प्रशासन का कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं आया है.
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'दिल करता है इसी पानी में कूदकर जान दे दें'
टांगरी इलाके में पिछले 30 सालों से रह रहीं स्थानीय निवासी नीलम ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि हर साल बरसाती पानी उनके घरों में घुस जाता है, लेकिन कोई उनकी सुध लेने नहीं आता.
नीलम ने रुंधे गले से कहा, "हम बहुत ज्यादा परेशान हो चुके हैं. कभी-कभी तो दिल करता है कि इसी पानी में कूदकर अपनी जान दे दें. पीने तक का पानी नहीं है और कोई सुविधा नहीं मिल रही है."
सड़क पर बैठने को मजबूर परिवार
इलाके की अन्य महिलाओं ने बताया कि पानी आने से उनके घरों का कीमती सामान पूरी तरह खराब हो गया है. हालात इतने बदतर हैं कि उन्हें सड़क पर बैठने को मजबूर होना पड़ा है. प्रभावितों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द उनके इलाके की सुध ली जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि हर साल होने वाली इस बर्बादी से बचा जा सके.
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