दिल्ली के 46 फीसदी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मानकों पर 'फेल', DPCC की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Delhi Sewage Treatment Plant: दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के मार्च महीने की आंतरिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 37 में से 17 एसटीपी पैमानों पर फेल हैं.

देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी ना सिर्फ बड़ा राजनैतिक मुद्दा है बल्कि भारतीय जानता पार्टी की सरकार बनने के बाद राजधानी दिल्ली में यमुना की साफ़ सफ़ाई पर कदम उठाने के दावे भी किए जा रहे है. दावा है कि 3 सालों में यमुना की स्थिति दिल्ली में ना सिर्फ़ बेहतर हो जाएगी बल्कि यमुना पूरी तरह साफ़ भी हो. इस बीच दिल्ली सरकार की दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (DPCC) की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है. इसके मुताबिक, दिल्ली के 46 फ़ीसदी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) मानको पर खरे नहीं उतर रहे हैं और तय सीमा से ज़्यादा प्रदूषक छोड़ रहे हैं.
DPCC की मार्च महीने की आंतरिक रिपोर्ट
एबीपी न्यूज़ के पास मौजूद DPCC की मार्च महीने की एक्सक्लूसिव आंतरिक रिपोर्ट है. इसके मुताबिक दिल्ली में कुल 37 एसटीपी हैं जिसमे से 17 एसटीपी ठीक तरीके से नाले के पानी की सफाई करने में फेल हैं और कथित ट्रीटमेंट के बाद भी फीकल कॉलिफ़ॉर्म से लेकर BOD, COD जैसे प्रदूषक तत्व तय सीमा से ज़्यादा यमुना में नहर या नालों के रास्ते प्रवेश कर रहे हैं.
11 एसटीपी चारों पैमानों पर फेल
DPCC के आंकड़ों को और विस्तार से देखें तो मानकों पर फेल इन 17 एसटीपी में से 11 एसटीपी फीकल कॉलिफ़ॉर्म, BOD , COD और TSS चारो पैमानों पर फेल हैं. 4 STP फीकल कॉलिफ़ॉर्म के तय आउटलेट के मानक पर फेल हैं और 2 एसटीपी BOD , COD और TSS के तीन मानको पर फेल हैं.
उदाहरण के लिए दिल्ली गेट स्थित पुराना एसटीपी जो सेन नरसिंग होम नाले के पानी को ट्रीट करके ITO स्थित यमुना में छोड़ता है उसके 100 ml ट्रीटेड पानी में फीकल कॉलिफ़ॉर्म की संख्या 1200 है. जबकि एसटीपी से जो ट्रीटेड पानी यमुना में छोड़ा जाता है उसके फीकल कॉलिफ़ॉर्म की मात्रा 230 से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए यानी तय सीमा से 5 गुना ज़्यादा.
केशवपुर का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
इसी तरह केशवपुर का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जो केशवपुर नाले के प्रदूषित पानी को साफ़ करके नजफ़गढ़ नाले में छोड़ता है जिसके बाद नज़फ़गढ़ का नाला यमुना में गिरता है. यह एसटीपी तय सीमा से ज़्यादा फीकल कॉलिफ़ॉर्म, BOD , COD और TSS ट्रीटमेंट के बाद छोड़ रहा है. जहां फीकल कॉलिफ़ॉर्म की अधिकतम सीमा 230 होनी चाहिए तो यह STP ट्रीटमेंट के बाद 8 गुना ज़्यादा फीकल कॉलिफ़ॉर्म छोड़ रहा है. ऐसा ही कुछ हाल BOD,COD और TSS का है. इस STP का संचालन साल 2015 में शुरू हुआ था.
पप्पन कला की पुरानी एसटीपी
केशवपुर के नए एसटीपी की तरह ही पप्पन कला की पुरानी एसटीपी भी फीकल कॉलिफ़ॉर्म, BOD , COD और TSS के मानको पर फेल हैं. ये अधिकतम सीमा से कई गुना ज़्यादा इन प्रदूषकों पर नज़फ़गढ़ के नाले में छोड़ रहा है, जो वज़ीराबाद के आगे यमुना में मिल रहा है.
वसंत कुंज और यमुमा विहार के एसटीपी प्लांट
वसंत कुंज के 2 एसटीपी प्लांट हो या फिर यमुना विहार का फेज 1 एसटीपी प्लांट दोनों जगहों पर तय सीमा से ज़्यादा प्रदूषक ट्रीटमेंट के बाद बाहर जा रहे हैं और नालों में मिल कर यमुना में प्रवेश कर रहे हैं. जहां वसंत कुंज एसटीपी का मानको पर फेल पानी नज़फ़ागढ़ नाले से यमुना में जा रहा है तो यमुना विहार का शाहदरा नाले से और दोनों जगहों पर फीकल कॉलिफ़ॉर्म मानक से कई गुना ज़्यादा है.
मोलरबंद और केशवपुर में भा हालत खराब
मोलरबंद की एसटीपी हो या फिर केशवपुर की पुरानी 2 एसटीपी तीनो की हालत ख़राब है और मानको पर बुरी तरह फेल हैं और जहां मोलरबंद एसटीपी 230 की जगह पांच गुना ज़्यादा 1100 फीकल कॉलिफ़ॉर्म आगरा कैनाल में छोड़ रही है. केशवपुर की पुरानी दोनों एसटीपी 1300 और 1600 की मात्रा में फीकल कॉलिफ़ॉर्म नजफ़गढ़ नाले में छोड़ रही है जो इन नहर और नाले के सहारे यमुना में जा रहा है.
DPCC की रिपोर्ट में सामने आया है कि फीकल कॉलिफ़ॉर्म के मानक पर सबसे ज़्यादा फेल इस समय घिटोरनी स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है. यहां 230 के मानक की जगह ट्रीटमेंट के बाद भी 100 ml पानी में 2200 फीकल कॉलिफ़ॉर्म बाहर निकल रहा है और यमुना में जाने वाले नाले में मिल रहा है.
दिल्ली के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की हालत पिछले दो सालों से कुछ इसी तरह है. DPCC की यमुना की सफाई पर बनायी गई एक और आंतरिक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2023 से नवंबर 2024 तक दिल्ली के आधे से ज़्यादा एसटीपी मानको पर फेल थे तो दिसंबर में यह संख्या 48 फ़ीसदी थी और जनवरी 2025 में मानकों पर फेल होने वाले एसटीपी की संख्या कुल एसटीपी के मुक़ाबले 42 फ़ीसदी थी.
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Source: IOCL






















