'घर-गृहस्थी में व्यस्त थी लेकिन BJP ने मुझे ढूंढकर...', महिला दिवस पर भावुक हुईं CM रेखा गुप्ता
International Women's Day: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बीजेपी ने जेएलएन स्टेडियम में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें रेखा गुप्ता ने अपने राजनीतिक संघर्ष को बयां किया.

Rekha Gupta on International Women's Day: बीजेपी महिला मोर्चा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें सीएम रेखा गुप्ता भी पहुंचीं. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का यहां जिक्र किया और बताया कि कैसे वह शादी के बाद राजनीति से दूर हो गई थीं लेकिन बीजेपी ने अपनी DUSU की पूर्व अध्यक्ष को ढूंढा और उसे दोबारा राजनीति में लेकर आई.
रेखा गुप्ता ने कहा, ''मैं 1993 से संगठन के साथ जुड़कर काम कर रही हूं. पहली बार चुनाव लड़ी तो मां बड़ी नाराज हुई. बोली कि ये बेटियों का काम नहीं है. लेकिन पिताजी ने साथ दिया. मौका मिल रहा है तो चुनाव लड़ने दो. चुनाव शब्द ही बड़ा है. उसके लिए बड़ी सोच और संगठन काम कर रहा था कि साधारण परिवार की बेटी को मौका मिलना चाहिए. यह केवल हमारा विचार परिवार ही कर सकता है. ''
बताया कैसे शादी के बाद शुरू किया राजनीतिक सफर
उन्होंने कहा, ''मुझे ध्यान है जब बीजेपी से जुड़ी तो अपने यूनिवर्सिटी के कार्यकाल के बाद पहली बार युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री बनी. इसके बाद मेरी शादी हो गई. संगठन ने मुझे खोजा कि हमारी डूसू की अध्यक्ष जो लड़की रही है वो कहां है. शादी हो गई, बेटी है परिवार में व्यस्त हैं. और खोजकर बुलाया गया कि ऐसे खाली नहीं बैठना है. संगठन के साथ जुड़ो और लोगों के लिए काम करो. मैंने कहा कि मेरे परिवार में ऐसा माहौल नहीं है. मेरी बेटी छोटी है लेकिन ये बीजेपी ही है जो उस लड़की घर से निकालकर लाई और समाज के काम में जोड़ा और दायित्व दिया.''
रेखा गुप्ता ने कहा कि 30 वर्ष में कई दायित्व दिए गए. इससे बेहतर एक महिला को मंच और संगठन नहीं मिल सकता. बहुत कुछ मिला वो सम्मान मिला जिसके हम सपने देखते थे, अधिकार मिला जो पहुंच से दूर था और मंच मिला जिसपर खड़े होकर मन की बात कह सकते थे. चुनाव लड़ते लड़ते यहां तक पहुंचे, वह सोच और समझ मिली कि देश हित में काम कर सकें.
महिला नेताओं की स्थिति भी किया बयां
उन्होंने आगे कहा, ''आज बहुत भावुक हूं. ये वो महिला कार्यकर्ता हैं जो घर से निकलती हैं. वो सोचती हैं कि घर का काम कर लूं. दौड़कर दफ्तर जाती हैं. फिर घर आती है तो सास, पति और बच्चा कहता है आपको बस यही काम है. वह घर पर भी सुनती हैं और जब संगठन में आती हैं तो वहां भी सुनती हैं कि आपको ज्यादा काम करना था. इतना ही किया. फिर जब चुनाव का समय आता है तो टिकट किसी और को मिल जाता है. मैंने बड़ा नजदीक से अपनी बहनों को काम करते देखा है.''
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