सस्ती-सुरक्षित होने के बावजूद PNG अपनाने में झिझक रही जनता, ये हैं 5 बड़ी वजह
PNG Connection: एलपीजी की कमी के बीच सरकार पीएनजी को बढ़ावा दे रही है, जो सस्ती और सुरक्षित है. जानकारी की कमी, एनओसी की समस्या, पड़ोसियों का विरोध और अचानक भारी बिल जैसी बाधाएं हैं.

देश में एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच सरकार पाइप नेचुरल गैस (PNG) को तेजी से बढ़ावा दे रही है. दावा किया जा रहा है कि यह न सिर्फ 10 से 30 प्रतिशत तक सस्ती है, बल्कि ज्यादा सुरक्षित और 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली सुविधा भी देती है. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कई ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिनकी वजह से लोग PNG कनेक्शन लेने से बच रहे हैं.
PNG कनेक्शन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके उपलब्ध हैं, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोगों को इसकी प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं है. IGL जैसी कंपनियों की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है. इसके अलावा कॉल सेंटर और डोर-टू-डोर कैंप के जरिए भी आवेदन संभव है. जानकारी की कमी के कारण कई लोग इस सुविधा से दूर रह जाते हैं.
मकान मालिक और किरायेदार के लिए अलग नियम
अगर मकान मालिक खुद आवेदन करता है, तो उसे पहचान पत्र, बिजली-पानी के बिल और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज देने होते हैं. वहीं किरायेदारों को मकान मालिक की अनुमति और NOC जरूरी होती है. कई मामलों में यही NoC सबसे बड़ी बाधा बन जाती है, जिससे कनेक्शन प्रक्रिया अटक जाती है.
सरकार दे रही है छूट और ऑफर
PNG को बढ़ावा देने के लिए कंपनियां और सरकार मिलकर कई तरह के ऑफर दे रही हैं. नए कनेक्शन पर बिल में छूट, मुफ्त गैस उपयोग की अवधि और सिक्योरिटी डिपॉजिट को किस्तों में जमा करने जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं. इसके बावजूद इन योजनाओं की जानकारी सीमित लोगों तक ही पहुंच पा रही है.
सस्ती और सुरक्षित होने के बावजूद झिझक क्यों
विशेषज्ञों के मुताबिक PNG, LPG के मुकाबले हल्की होती है और रिसाव की स्थिति में तेजी से हवा में घुल जाती है, जिससे हादसे का खतरा कम होता है. यह मीटर आधारित सेवा है, इसलिए जितनी गैस इस्तेमाल होगी उतना ही बिल आता है. इसके बावजूद लोग नई तकनीक अपनाने में हिचकिचा रहे हैं.
पड़ोसियों के विरोध से रुक रहे कनेक्शन
कई इलाकों में पाइपलाइन बिछाने के दौरान पड़ोसियों के विरोध की वजह से कनेक्शन रुक जाते हैं. कुछ लोग संभावित हादसों के डर से NOC देने से इनकार कर देते हैं. इससे पूरी बिल्डिंग या इलाके में काम ठप हो जाता है.
सरकारी संस्थान भी पीछे, सवाल उठे
हैरानी की बात यह है कि जहां सरकार PNG को बढ़ावा दे रही है, वहीं कुछ सरकारी संस्थानों ने खुद अपने परिसरों में अभी तक यह कनेक्शन नहीं लिया है. इससे आम लोगों के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति बनती है.
भारी-भरकम बिल से उपभोक्ता परेशान
कुछ उपभोक्ताओं ने अचानक ज्यादा बिल आने की शिकायत भी की है. समय पर बिल न मिलने और बाद में एकमुश्त बड़ी राशि आने से लोग परेशान हो जाते हैं. कई मामलों में उपभोक्ताओं ने कनेक्शन तक कटवा दिए हैं.
LPG पर निर्भरता घटाने की कोशिश
सरकार का लक्ष्य LPG पर निर्भरता कम करना और PNG को व्यापक बनाना है. हालांकि, इसके लिए सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है. जमीनी स्तर पर जागरूकता, पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाना भी जरूरी होगा.























