'पैसे के दम पर देश को तबाह करना चाहते थे...', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले गिरिराज सिंह
Dharmendra Pradhan Resignation: पटना में गिरिराज सिंह ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा- विपक्ष की सोच जीत-हार तक सीमित है. उन्होंने अमेरिका से पैसे भेजे जाने की साजिश का आरोप भी लगाया है.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा. पटना में दिए बयान में उन्होंने कहा, "अगर विपक्ष की सोच सिर्फ जीत-हार तक ही सीमित है, तो भगवान ही हमें बचाए." गिरिराज सिंह ने जोर दिया कि उनकी चिंता देश और युवाओं को लेकर है, न कि राजनीतिक जीत-हार को लेकर.
गिरिराज सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में अमेरिका में बैठा कोई व्यक्ति शामिल था. उन्होंने आगे कहा, "अब कई राज सामने आने वाले हैं- कि पैसे कौन दे रहा था, उसे कहां भेजा जा रहा था और जंतर-मंतर पर क्या हो रहा था." उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग पैसे की ताकत का इस्तेमाल करके अफरा-तफरी फैलाना और देश को बर्बाद करना चाहते थे.
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प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता की तारीफ
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी समझदारी और दूरदर्शिता से हालात संभले. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री युवाओं के भविष्य की चिंता करते हुए एक महीने के अंदर 22 लाख छात्रों की परीक्षाएं आयोजित करवाईं, नतीजे घोषित किए और एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी. गिरिराज सिंह ने विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जब कुछ लोग विदेश यात्राओं पर थे, तब प्रधानमंत्री छात्रों की चिंता कर रहे थे.
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में NEET और अन्य परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बीच इस्तीफा दे दिया. छात्रों के लंबे समय से चल रहे आंदोलन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के बाद यह फैसला लिया गया. गिरिराज सिंह का बयान इस इस्तीफे के बाद आया, जिसमें उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया है.
प्रधानमंत्री की वजह से छात्रों का समय बर्बाद नहीं हुआ
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की वजह से छात्रों का समय बर्बाद नहीं हुआ. परीक्षाएं समय पर हुईं, रिजल्ट आए और एडमिशन प्रक्रिया भी आगे बढ़ी. गिरिराज सिंह ने विपक्ष को राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं के मुद्दे को भुनाने का आरोप लगाया.
NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार को लेकर पिछले महीनों में देशभर में आंदोलन चले थे, जिसके चलते शिक्षा मंत्रालय पर दबाव बढ़ा था. प्रधान के इस्तीफे को कुछ लोग छात्र आंदोलन की जीत मान रहे हैं, तो BJP इसे बड़े हित में लिया गया निर्णय बता रही है.
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