JNU के शिक्षक संघ ने कैंपस में हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्या कहा?
JNUSU Protest News: जेएनयू छात्रसंघ के कई सदस्यों को तब हिरासत में लिया गया जब वो शिक्षा मंत्रालय की ओर एक विरोध मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNSU) के कई सदस्यों को शिक्षा मंत्रालय की ओर एक विरोध मार्च निकालने की कोशिश करने के बाद हिरासत में ले लिया गया. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JNUTA) ने जेएनयू परिसर में हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. संघ ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग किया और कई छात्रों को हिरासत में लिया, जिनमें दो छात्र संघ (JNUSU) के पदाधिकारी शामिल हैं.
महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई- JNUTA
शिक्षक संघ के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान कई छात्र, जिनमें छात्राएं भी शामिल हैं, घायल हुए. बयान में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई. कुछ छात्राओं को कैंपस से दूर अज्ञात जगहों पर ले जाने और हिरासत में मारपीट की खबरें भी सामने आई हैं. ये बयान JNUTA के अध्यक्ष सुरजीत मजूमदार और सचिव मीनाक्षी सुंद्रियाल की ओर से जारी किया गया है.
बल प्रयोग करना पुलिस की 'मानक कार्यशैली' बन गई- JNUTA
JNUTA ने आरोप लगाया कि पुलिस का उद्देश्य छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार-शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने से रोकना था. संघ का कहना है कि शांतिपूर्ण मार्च पर रोक लगाना और उसके बाद बल प्रयोग करना, पुलिस की मानक कार्यशैली बन गई है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने जैसा है. संघ ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रों के हितों की रक्षा करने में असफल रहा है.
बयान में कुलपति पर लगाए गए विवादित बयानों और फैसलों का भी जिक्र किया गया और सवाल उठाया गया कि क्या इन कदमों को शिक्षा मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है? JNUTA ने सभी हिरासत में लिए गए छात्रों की तुरंत रिहाई की मांग की है. कानून का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कैंपस गेट पर मौजूद पुलिस बल को हटाने की मांग की गई है. शिक्षक संघ ने शिक्षकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और लोकतंत्र के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के विरोध में आवाज उठाएं.
JNU प्रशासन का बयान
JNU प्रशासन ने आरोप लगाया कि एक महिला ओबीसी कुलपति पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं ताकि हिंसा और तोड़फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके. जेएनयू में चल रहे विवाद को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है. प्रशासन का कहना है कि जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) के प्रदर्शनकारी यूजीसी (UGC) के नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है. ऐसे में कुलपति या रजिस्ट्रार के पास इन नियमों को लागू करने का कोई अधिकार नहीं है.
प्रशासन के अनुसार, जेएनयू छात्रसंघ अब तक अपने निष्कासन (रस्टिकेशन) के मूल कारण पर बात करने से बच रहा है. प्रशासन का दावा है कि कुछ छात्रों पर परिसर के अंदर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा करने के आरोप लगे थे. इस मामले में प्रॉक्टोरियल जांच की गई, जिसके बाद संबंधित छात्रों को जिम्मेदार ठहराते हुए निष्कासित किया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन का यह भी कहना है कि जेएनयू एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, इसलिए वह सरकार, संसद और देश के करदाताओं के प्रति जवाबदेह है.
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Source: IOCL























