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Delhi DBC Strike: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर DBS कर्मचारी, मच्छरजनित बीमारियों का बढ़ा खतरा

Delhi: निगम के मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ अभियान में DBC कर्मचारियों की काफी अहम भूमिका है. जहां ये हर दिन 37 हजार घरों में दवाओं का छिड़काव करते हैं,

Delhi News: सितंबर महीने में राजधानी दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में G-20 शिखर सम्मलेन आयोजित होने जा रहा है. जिसके लिए एक तरफ जहां चल रही तैयारियों को तेज कर दिया गया है. इस दौरान राजधानी दिल्ली मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप ना रहे इसके लिए मच्छचरजनित डेंगू-मलेरिया आदि जैसी बीमारियों के खिलाफ एक विशेष अभियान गया था. लेकिन DBC कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल की वजह से निगम का यह अभियान अब प्रभावित होता नजर आ रहा है.

DBC कर्मचारियों ने की अनिश्चितकालीन हड़ताल
बता दें कि आज से DBC के कर्मचारी सिविक सेंटर के गेट नंबर 5 पर पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अनिश्चितकालीन हड़ताल और क्रामिक भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. सुबह 9 बजे से हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि इनकी मांगो को नहीं माने जाने की वजह से इन्हें हड़ताल पर बैठना पड़ा है और अब जब तक इनकी मांगों को नहीं माना जाता है. तब तक इनकी हड़ताल जारी रहेगी. DBC कर्मचारियों के चेयरमैन जयवीर डागर ने बताया कि इससे पहले निगम स्वास्थ अधिकारियों के साथ हुई कर्मचारियों की बैठक बेनतीजा रही, जिसके बाद आज से कर्मचारी सिविक सेंटर के बाहर हड़ताल पर बैठ गए हैं.

‘ना मेडिकल की सुविधा है और ना मिलती छुट्टी’
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि 28 साल से वे शोषित होते आ रहे हैं. शुरुआत में उन्हें कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर फील्ड वर्कर के रूप में निगम के कार्यों को लगाया गया था. इसके अनुसार, 10 वर्ष कार्यरत रहने के बाद उन्हें स्थायी कर दिया जाता. लेकिन 2010 में इन्हें फील वर्कर से प्रमोट कर DBC कर्मचारी बना दिया गया लेकिन उन्हें स्थायी नहीं किया गया. उन्हें न मेडिकल की सुविधा मिलती है और न छुट्टियां मिलती हैं, जबकि वे लगातार विभिन्न प्रकार के कार्य करते है. जिनमें उनका मुख्य कार्य डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर का है.

MCD चुनाव से पहले सरकार ने दिया था स्थायी करने का भरोसा
कर्मचारियों का कहना है कि 2019 में उन्होंने एमसीडी के संविधान में उनके DBC पद के नाम का ना होने का हवाला देते हुए मल्टी टास्क स्टाफ का पद सृजित कर उन्हें स्थायी करने की मांग की थी. जिसका प्रस्ताव साउथ एमसीडी की तरफ से दिल्ली सरकार को भेजा गया था. लेकिन उस वक़्त भी उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला. तब से लेकर वो लगातार उपायुक्त और निगम से स्थायी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को नहीं सुना जा रहा है. इस बार एमसीडी के चुनाव से पहले भी सरकार ने उन्हें स्थायी किए जाने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई पहल नहीं की गई. 

मांगे पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
DBC कर्मचारियों का कहना है कि इससे पहले जब एमसीडी में बीजेपी का शासन था, तब भी उनकी मांगों को नहीं सुना गया और इए प्रकार वे वर्षों से शोषित होते आ रहे हैं. लेकिन इस बार उन लोगों ने मन बना लिया है और जब तक उनकी पक्का नहीं किया जाता है, तब तक वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे.

निगम के मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ अभियान में पड़ सकता है प्रभाव
बता दें कि निगम के मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ अभियान में DBC कर्मचारियों की काफी अहम भूमिका है. जहां ये हर दिन 37 हजार घरों में दवाओं का छिड़काव करते हैं, वहीं दूसरी तरफ लगभग 1 लाख घरों की हर दिन जांच भी इनके द्वारा ही की जाती है. ऐसे में इनके हड़ताल पर चले जाने से निगम के इस अभियान पर प्रभाव पड़ सकता है वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ सकता है. हालांकि, इससे पहले मेयर डॉ. शैली ओबरॉय ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से DBC कर्मचारियों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की थी. वहीं अब यह देखना भी दिलचस्प होगा कि आज निगम सदन में हो रही बैठक में हड़ताल को लेकर सदन का क्या रुख रहता है.

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