रातभर सड़क पर डटीं छात्राएं, आंदोलन के दबाव में झुका DU प्रशासन; UHW हॉस्टल में 30 जून तक रहने की मिली मंजूरी
DU Hostel Row: दिल्ली यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी हॉस्टल फॉर विमेन में छात्राओं के लगातार विरोध और रातभर चले धरने के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा. इसे छात्रों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

- AISA ने इसे छात्र एकता की जीत बताया, विवि में बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता जताई.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी हॉस्टल फॉर विमेन (UHW) में छात्राओं के लगातार विरोध और रातभर चले धरने के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा. छात्राओं की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए प्रशासन ने आधिकारिक लिखित आदेश जारी कर 30 जून 2026 तक हॉस्टल में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रहने की अनुमति दे दी है. साथ ही पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगों को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया है.
हॉस्टल प्रशासन की ओर से छात्राओं पर कथित तौर पर 450 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही थी. इसे लेकर छात्राओं में भारी नाराजगी थी. आरोप था कि यह फैसला छात्रों से जबरन वसूली जैसा है और पहले से जमा हॉस्टल फीस के बावजूद उन पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है.
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देर रात तक सड़क पर डटी रहीं छात्राएं
बताया गया कि गुरुवार (21 मई) रात करीब साढ़े 9 बजे से छात्राएं सड़क पर धरने पर बैठ गई थीं और देर रात तक अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करती रहीं. छात्राओं का कहना था कि सेमेस्टर और NET परीक्षा की तैयारी के बीच प्रशासन ने हॉस्टल के दो ब्लॉकों में पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी और रीडिंग रूम से कुर्सियां तक हटा दी गई थीं, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी.
छात्राओं का आरोप है कि 16 मई को हुए बड़े प्रदर्शन के बाद हॉस्टल प्रशासन ने सुविधाएं बहाल करने और रहने की अवधि बढ़ाने का मौखिक आश्वासन दिया था. हालांकि, बाद में प्रशासन अपने वादे से पीछे हट गया और अतिरिक्त शुल्क का आदेश जारी कर दिया. इसी के विरोध में छात्राओं ने सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज किया.
AISA ने आंदोलन को बताया छात्र एकता की जीत
छात्र संगठन AISA ने इस पूरे आंदोलन को छात्र एकता की बड़ी जीत करार दिया है. संगठन ने कहा कि छात्राओं के लगातार दबाव और रातभर चले धरने ने प्रशासन को फैसला बदलने पर मजबूर किया. AISA ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई हॉस्टलों में इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं, जहां प्रशासनिक उदासीनता और छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है. उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षा और छात्रावासों का व्यावसायीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
पानी, कूलर और रीडिंग रूम की सुविधाएं बहाल करने का आश्वासन
छात्रों के आंदोलन के बाद प्रशासन ने हॉस्टल में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, रीडिंग रूम में कुर्सियां उपलब्ध कराने और मेस में कूलर लगाने सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को जल्द बहाल करने का लिखित आश्वासन भी दिया है. छात्राओं ने इसे अपनी सामूहिक लड़ाई की महत्वपूर्ण जीत बताया है.
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