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यमुना की सफाई का नया ब्लूप्रिंट, 850 क्यूसेक पानी से बदलेगी सूरत, दिल्ली सरकार ने तलाशे 3 रास्ते

Delhi News: एनआईएच की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली में यमुना को साफ रखने के लिए कम से कम 850 क्यूसेक पानी का लगातार प्रवाह जरूरी है. फिलहाल नदी में केवल 350 क्यूसेक पानी बह रहा है.

दिल्ली की जीवन रेखा कही जाने वाली यमुना नदी को साफ और निर्मल बनाने के लिए एक बार फिर नई पहल की तैयारी शुरू हो गई है. उत्तराखंड के रुड़की स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) की एक अहम रिपोर्ट ने यमुना की सफाई को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में यमुना को स्वच्छ बनाए रखने के लिए नदी में कम से कम 850 क्यूसेक पानी का लगातार बहाव जरूरी है, जबकि फिलहाल इससे आधे से भी कम पानी बह रहा है.

एनआईएच की रिपोर्ट बताती है कि इस समय दिल्ली के हिस्से में यमुना में केवल करीब 350 क्यूसेक पानी ही बह रहा है. इतना कम प्रवाह होने की वजह से नदी खुद को साफ नहीं कर पा रही है.

गंदगी, सीवर और औद्योगिक कचरे का असर साफ दिखाई देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक नदी में पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह नहीं होगा, तब तक यमुना की हालत सुधरना बेहद मुश्किल है.

दिल्ली सरकार ने तलाशे 3 संभावित समाधान

रिपोर्ट सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने यमुना में जल प्रवाह बढ़ाने के लिए 3 संभावित विकल्पों पर काम शुरू किया है. इन विकल्पों के जरिए नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ा जा सकता है, ताकि उसका प्राकृतिक प्रवाह बढ़ सके.

इस पूरी योजना को लेकर दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार को भी जानकारी दी है और सहयोग की मांग की है, क्योंकि यमुना से जुड़े फैसले कई राज्यों के बीच तालमेल से ही हो सकते हैं.

नाले और सीवर बने सबसे बड़ी परेशानी

बीते कई सालों से यमुना दिल्ली में गंभीर प्रदूषण का शिकार रही है. नदी में करीब 20 से ज्यादा बड़े नाले गिरते हैं, जो सीधे या आंशिक रूप से साफ किया गया सीवर का पानी यमुना में छोड़ते हैं.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली जल बोर्ड की रिपोर्टों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि दिल्ली में यमुना का बड़ा हिस्सा नहाने और पीने लायक नहीं है.

यमुना को साफ करने के लिए पहले भी यमुना एक्शन प्लान, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), नालों की टैपिंग जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट चलाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखा. विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सीवर रोकना काफी नहीं है, जब तक नदी में साफ पानी का बहाव नहीं बढ़ेगा, तब तक हालात नहीं बदलेंगे.

850 क्यूसेक प्रवाह से दिख सकता है बड़ा बदलाव

दिल्ली सरकार का मानना है कि अगर यमुना में 850 क्यूसेक पानी का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित हो जाता है, तो नदी की सफाई में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है. इससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी. बदबू, झाग और प्रदूषण की समस्या भी काफी हद तक कम होगी.

पूरे उत्तर भारत की साझा जिम्मेदारी

फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार और यमुना से जुड़े राज्यों के फैसलों पर टिकी हैं. क्योंकि यमुना सिर्फ दिल्ली की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की नदी है. उसकी सफाई भी एक राज्य नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी मानी जा रही है. अगर सही फैसले समय पर हुए, तो उम्मीद है कि आने वाले समय में यमुना फिर से साफ और जीवित नजर आ सकेगी.

मैं बलराम पांडेय ABP नेटवर्क में वरिष्ठ संवाददाता हूं. मीडिया उद्योग में 19 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ, मैं रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अपने अनुभव का लाभ उठाकर दर्शकों को आकर्षित और जागरूक करने वाली उच्च-प्रभाव वाली कहानियाँ पेश करता हूं. वर्तमान में, मैं दिल्ली सरकार और राजनीतिक घटनाओं, प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI को कवर करने, के साथ बड़े इंटरव्यू और समसामयिक मामलों पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं 
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