DU असिस्टेंट प्रोफेसर की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा, 6 महीने पहले रची गई थी साजिश
Delhi News In Hindi: दिल्ली यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पाल की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. हत्या की साजिश 6 महीने पहले रची गई थी.

दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर देबोस्मिता पाल की हत्या के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि यह हत्या किसी आवेश में लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि इसके लिए कई महीनों तक तैयारी की गई थी. मुख्य आरोपी रामप्रसाद दास ने पहले प्रोफेसर के घर और सोसायटी की रेकी की, फिर पत्नी और नाबालिग बेटे के साथ दिल्ली पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया.
जनवरी से शुरू हुई थी हत्या की तैयारी
पूर्वी जिला DCP डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस राजीव कुमार ने बताया टीम द्वारा जांच में पाया गया कि पश्चिम बंगाल के बर्धमान निवासी रामप्रसाद दास लंबे समय से इस अपराध की योजना बना रहा था. सैनिटरी सामान के कारोबार से जुड़ा रामप्रसाद अक्सर दिल्ली के करोल बाग आता-जाता था. इसी दौरान उसने प्रोफेसर के आवास और उनकी दिनचर्या पर नजर रखना शुरू कर दिया था.
जांच में सामने आया है कि वह पहली बार जनवरी 2026 में वसुंधरा एनक्लेव पहुंचा था, जहां उसने सोसायटी के बाहरी हिस्से का निरीक्षण किया. इसके बाद मार्च में वह दोबारा दिल्ली आया और इस बार सोसायटी के अंदर जाकर प्रोफेसर के फ्लैट तक पहुंचने वाले रास्तों, सुरक्षा इंतजामों और संभावित भागने के मार्गों की जानकारी जुटाई.
पैतृक संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह
डीसीपी के मुताबिक हत्या की जड़ पश्चिम बंगाल के बर्धमान स्थित एक पैतृक संपत्ति से जुड़ी हुई है. वर्ष 2023 में रामप्रसाद देबोस्मिता पाल की पैतृक संपत्ति में किरायेदार के रूप में रहने लगा था. शुरुआत में उसने पहली मंजिल किराये पर ली थी, लेकिन बाद में अपने सैनिटरी कारोबार के लिए ग्राउंड फ्लोर भी इस्तेमाल करने लगा.
बताया जा रहा है कि वह लगातार प्रोफेसर पर संपत्ति बेचने का दबाव बना रहा था. हालांकि देबोस्मिता ने मकान बेचने से साफ इनकार कर दिया था. इसी विवाद ने आगे चलकर खौफनाक रूप ले लिया.
वाट्सएप से संपर्क कर साजिश को दिया अंजाम
पुलिस के अनुसार 1 जून को रामप्रसाद ने व्हाट्सएप के जरिए प्रोफेसर से संपर्क किया था. इसके दो दिन बाद 3 जून को वह पत्नी और बेटे के साथ दिल्ली पहुंच गया. सुबह करीब साढ़े 11 बजे एक होटल में कमरा लेने के बाद उसने कपड़े बदले और दोपहर करीब 3 बजे वहां से निकल गया. जहां से वह सीधे प्रोफेसर के घर पहुंचा.
पुलिस का दावा है कि बातचीत के दौरान जब देबोस्मिता ने मकान बेचने से इनकार किया और उसे घर खाली करने की चेतावनी दी, तब आरोपी ने ओखली से उनके सिर पर हमला कर दिया. आरोप है कि इसके बाद उसकी पत्नी बनाश्री ने उस्तरे से प्रोफेसर की कलाई काट दी.
पहचान छिपाने के लिए बार-बार बदले कपड़े
हत्या के बाद आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए कई स्तर पर सावधानी बरती. पुलिस के अनुसार दोनों ने वारदात के बाद कपड़े बदले और वहां से निकल गए. इसके बाद कैब के जरिए आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचे और कुछ समय वहां बिताने के बाद ऑटो से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन चले गए.
रास्ते में उन्होंने एक बार फिर कपड़े बदले. इतना ही नहीं, रिजर्व कोच में यात्रा करने के बजाय जनरल डिब्बे का इस्तेमाल किया ताकि पहचान छिपी रहे और पुलिस की नजर से बच सकें.
1400 किलोमीटर दूर से परिवार सहित पहुंचा आरोपी
जांच एजेंसियों का कहना है कि करीब 1400 किलोमीटर की दूरी तय कर आरोपी अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली पहुंचा था. पुलिस के मुताबिक रामप्रसाद केवल हत्या का आरोपी ही नहीं बल्कि एक शातिर ठग भी है, जो लंबे समय से लोगों को अलग-अलग तरीकों से धोखा देकर बड़ी रकम हड़पता रहा है.
AI तकनीक ने उजागर की सच्चाई
मामले की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक ने अहम भूमिका निभाई. सोसायटी के सीसीटीवी फुटेज में आरोपी मास्क लगाए हुए दिखाई दिए थे. जब ये फुटेज प्रोफेसर के भाई और बहन को दिखाए गए तो वे आरोपियों की पहचान नहीं कर सके.
इसके बाद पुलिस ने एआई आधारित कैमरा विश्लेषण तकनीक का सहारा लिया. जांच टीम ने फुटेज में दिखाई देने वाली आंखों, हाथों और बालों की तस्वीरों को एआई टूल में अपलोड किया. तकनीक की मदद से आरोपियों का संभावित वास्तविक चेहरा तैयार किया गया, जिसके बाद परिजनों ने उनकी पहचान कर ली.
CCTV और मोबाइल लोकेशन से गिरफ्तारी
डीसीपी राजीव कुमार के अनुसार जांच टीम ने एआई तकनीक और विभिन्न कैमरों की फुटेज को जोड़कर आरोपियों की पूरी मूवमेंट ट्रैक की. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक आरोपी मास्क लगाए रहे, लेकिन कुछ कैमरों में उनके चेहरे आंशिक रूप से कैद हो गए थे.
पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन समेत अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया.
बर्धमान कोर्ट से मिला ट्रांजिट रिमांड
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को रामप्रसाद दास और उसकी पत्नी बनाश्री को बर्धमान कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल किया. दोनों आरोपियों को दिल्ली लाया जा रहा है, जहां उनसे आगे पूछताछ की जाएगी. वहीं नाबालिग बेटे को बर्धमान स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया गया है.
50 लोगों से दो करोड़ रुपये ठगने का आरोप
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दसवीं तक पढ़ा रामप्रसाद लोगों से बड़ी रकम उधार लेकर वापस नहीं करता था. पुलिस का दावा है कि वह करीब 50 लोगों से लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है.
देबोस्मिता पाल की करीब 1300 गज में फैली संपत्ति की कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रोफेसर को संदेह था कि रामप्रसाद संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है. इसी कारण उन्होंने उसे एक सप्ताह के भीतर मकान खाली करने की चेतावनी दी थी.
किरायेदार से पूरे मकान तक पहुंचा आरोपी
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2023 में रामप्रसाद ने पांच हजार रुपये मासिक किराये पर दो कमरे लिए थे. करीब डेढ़ साल बाद उसने 11 हजार रुपये प्रति माह के किराये पर पूरा मकान अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस का कहना है कि वह हर दो महीने में सैनिटरी सामान खरीदने के लिए करोल बाग आता था और इसी दौरान उसकी गतिविधियां बढ़ती गईं.
रेलवे टीसी बनकर भी करता था ठगी
आरोपी के घर की तलाशी के दौरान पुलिस को रेलवे टिकट चेकर (टीसी) की वर्दी और नेमप्लेट भी मिली है. जांच एजेंसियों को आशंका है कि वह इस वर्दी का इस्तेमाल कर रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों से अवैध वसूली और धोखाधड़ी करता था.
घर से ऐसी नकदी की गड्डियां भी बरामद हुई हैं जिनमें ऊपर और नीचे असली नोट थे, जबकि बीच में कागज लगाए गए थे. पुलिस को शक है कि वह लोगों को झांसा देकर इन्हीं गड्डियों के जरिए ठगी करता था.
कार की तस्वीरें और महंगी घड़ियां भी मिलीं
तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से पीड़िता की कार की तस्वीरें भी मिली हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह लंबे समय से प्रोफेसर की गतिविधियों पर नजर रख रहा था.
इसके अलावा उसके घर से 25 महंगी घड़ियां भी बरामद हुई हैं. पुलिस को संदेह है कि इनमें से कुछ घड़ियां चोरी की हो सकती हैं, जिसकी अलग से जांच की जा रही है.
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