दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉर्थ कैंपस बना रणभूमि, UGC के समानता नियमों को लेकर छात्रों में टकराव
Delhi University News: दिल्ली यूनिवर्सिटी में UGC के समानता नियमों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन झड़प में बदल गया. महिला पत्रकार पर कथित हमले से तनाव और बढ़ गया.

दिल्ली में एक बार फिर छात्र राजनीति गरमा गई है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के समानता से जुड़े नियमों को लागू करने की मांग को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब टकराव में बदल गया है. इसका असर दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में साफ देखने को मिला, जहां छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए और मामला मौरिस नगर पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया.
छात्रों का एक समूह यूजीसी के उन नियमों को लागू करने की मांग कर रहा है, जिनका मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सभी छात्रों के साथ बराबरी और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना बताया जा रहा है. प्रदर्शन में शामिल वामपंथी छात्र संगठनों का कहना है कि ये दिशानिर्देश भेदभाव और संस्थागत पूर्वाग्रह को रोकने के लिए जरूरी हैं.
दिन में बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में इकट्ठा हुए. शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, माहौल तनावपूर्ण होता गया. नारेबाजी तेज हुई और दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई.
प्रदर्शन के दौरान शुरू हुई झड़प
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस धीरे-धीरे धक्का-मुक्की में बदल गई. इसी दौरान कुछ छात्रों के बीच तीखी कहासुनी हुई और हालात बिगड़ गए. आरोप है कि विरोध कर रहे छात्रों और दूसरे छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच उकसावे की स्थिति बनी.
मामला तब और गंभीर हो गया जब यह टकराव बढ़ते-बढ़ते मौरिस नगर पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गया. वहां दोनों गुटों के छात्र जमा हो गए और एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे.
पत्रकार पर कथित हमला
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यूट्यूब चैनल से जुड़ी महिला पत्रकार प्रदर्शन को कवर करने पहुंची थीं. आरोप है कि कवरेज के दौरान छात्रों के एक समूह ने उनके साथ बदसलूकी की और हमला किया.
इस घटना के बाद माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. कई लोगों ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए. छात्र संगठनों के कुछ नेताओं ने इस कथित हमले की निंदा की और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
हालांकि, इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि शिकायत दर्ज हुई है या किसी की गिरफ्तारी की गई है.
ABVP और वामपंथी संगठनों के आरोप-प्रत्यारोप
वामपंथी छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने पुलिस स्टेशन को घेर लिया और वहां मौजूद लोगों पर हमला करने की कोशिश की. उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को जानबूझकर भटकाने की कोशिश की गई.
दूसरी ओर, एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.
दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर भी बयानबाजी तेज हो गई है. हर संगठन अपनी बात को सही और दूसरे को गलत साबित करने में लगा है.
भड़काऊ नारों से बढ़ा तनाव
पुलिस स्टेशन के बाहर 'गोली मारो' जैसे नारे भी लगाए गए, जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया. ऐसे नारों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय के लिए इलाके में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. कई दुकानदारों ने एहतियातन अपने शटर भी गिरा दिए.
पुलिस ने संभाली स्थिति
हालात बिगड़ते देख भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया. पुलिस अधिकारियों ने दोनों समूहों को अलग किया और स्थिति को काबू में लेने की कोशिश की. देर शाम तक पुलिस ने इलाके में शांति बनाए रखने का दावा किया.
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रखा गया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं.
कैंपस में जारी है बहस
पिछले कुछ दिनों से यूजीसी के समानता नियमों को लेकर कैंपस में बहस चल रही है. समर्थक छात्र समूहों का कहना है कि ये नियम छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी हैं और इससे भेदभाव के मामलों में कमी आएगी. वहीं कुछ छात्र संगठन इस पर अलग राय रखते हैं और इसे लागू करने के तरीके और प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक और गंभीर मुद्दे को सामने ला दिया है, कैंपस में विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा. जिस तरह से एक पत्रकार पर कथित हमला हुआ, उसने मीडिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. कई सामाजिक संगठनों और मीडिया से जुड़े लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
फिलहाल, मौरिस नगर थाना क्षेत्र में शांति तो है, लेकिन कैंपस का माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि छात्र संगठनों ने अपनी-अपनी रणनीति बनाने के संकेत दिए हैं.























