दिल्ली के साउथ एक्स में लटका सैकड़ों साल पुराना वट वृक्ष, लोग दहशत में, क्या है हादसे का इंतजार?
Delhi News: दिल्ली में सैकड़ों साल पुराना वट वृक्ष बारिश में झुका, बिजली तारों के पास खतरा. स्थानीय निवासियों का कहना है कि एजेंसियों और जनप्रतिनिधियों तभी कार्रवाई करेंगे जब कोई बड़ा हादसा पेश आ जाए.

दिल्ली के साउथ एक्स मस्जिद मोड़ इलाके में सैकड़ों साल पुराना वट वृक्ष अब लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है. 14 अगस्त की तेज बारिश में यह विशालकाय पेड़ जड़ों से उखड़कर पास की दुकानों और मकानों पर झुक गया, जिस कारण यहां रहने वाले और यहां से गुजरने वाले लोगों की जान सांसत (खतरे) में आ गई है.
राजधानी में 14 अगस्त के दिन बारिश ने जो कहर बरपाया था, उससे कई दीवारें ढह गईं और सड़कें स्विमिंग पूल बन गईं. उसी भयंकर बारिश की वजह से यह पेड़ भी अपनी जड़ से उखड़कर झुक गया.
विभागों की अनदेखी से बढ़ा खतरा
गनीमत यह रही कि यह विशालकाय पेड़ उस दौरान गिरा नहीं, लेकिन इसके खतरनाक स्थिति में झुके होने के बावजूद इसे हटाने की कोई ठोस पहल अब तक नहीं की गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद से सभी विभागों को जानकारी दी गई.
उनका आरोप है कि अधिकारी और कर्मचारी मौके पर जरूर पहुंचे, लेकिन केवल मुआयना करके चले गए. न पेड़ काटा गया, न कोई एहतियाती कदम उठाया गया. इलाके के लोग आशंका जता रहे हैं कि अगर यह पेड़ अचानक गिरा तो आसपास के मकानों और दुकानों को भारी नुकसान हो सकता है.
बिजली के तारों से बढ़ा खतरा
पेड़ की जटिल स्थिति के बीच सबसे खतरनाक पहलू है इसके नीचे से गुजरते बिजली के तार. इन तारों में लगातार सप्लाई जारी है. ऐसे में यदि पेड़ अचानक धराशायी हुआ तो न सिर्फ मकान-दुकान क्षतिग्रस्त होंगे, बल्कि करंट से भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है. लोगों का आरोप है कि विभागों की टालमटोल ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है.
स्थानीय लोगों ने कहा कि जब उन्होंने इस खतरनाक समस्या से निजात दिलाने की विभागों और अधिकारियों से मांग की, तो अधिकारियों ने 15 अगस्त और जन्माष्टमी की छुट्टियों का हवाला देकर तुरंत पेड़ को काटने या हटाने पर असमर्थता जताई.
पुलिस की कोशिशें नाकाम
यह विडंबना ही है कि जहां एक ओर लोग रोजाना खतरे के साए में जी रहे हैं, वहीं जिम्मेदार विभाग छुट्टियों की दुहाई देकर हाथ खड़े कर रहा है. हालांकि दिल्ली पुलिस ने खतरे को देखते हुए पेड़ के नीचे से गुजरने वाले रास्ते को बैरिकेड लगाकर बंद करने की कोशिश की.
लेकिन इलाके का मुख्य मार्ग होने के कारण लोग, फिर चाहे वे स्कूली बच्चे हों या महिलाएं, सभी यहां बैरिकेड के किनारे से निकलने को मजबूर हैं. नतीजा यह है कि हर गुजरने वाला खुद को खतरे में डालकर यहां से गुजरता है.
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस गंभीर और खतरनाक स्थिति के बावजूद एजेंसियों और जनप्रतिनिधियों का लापरवाह रवैया यह साफ दर्शाता है कि शायद वे तभी कार्रवाई करेंगे जब कोई बड़ा हादसा पेश आ जाए.
तब तक लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर यहां रहने को मजबूर होना पड़ेगा. ऐसे में सवाल यही उठता है कि क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
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Source: IOCL























