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Delhi News: जानिए- दिल्ली को सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने की क्यों जरूरत है?

दिल्ली को अपने क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लंबा रास्ता तय करना होगा. हालांकि दिल्ली सरकार की स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिश कई कारणों से पिछड़ रही है.

Delhi News:  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों (Polluted Cities) में से एक माना जाता है. ऐसे में दिल्ली  को अभी भी अपने क्लीन एनर्जी लक्ष्यों (Clean Energy Goals) को प्राप्त करने और उत्सर्जन को कम करने के लिए अक्षय स्रोतों पर अपनी निर्भरता बढ़ाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है.

वहीं डाटा से पता चलता है कि दिल्ली में पिछले साल इंस्टॉल कैपिसिटी में कुछ वृद्धि देखी गई, लेकिन यह दिल्ली सरकार की सोलर एनर्जी पॉलिसी (Solar Energy Policy द्वारा निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों का एक अंश भर है. दिसंबर 2021 तक, रूफटॉप सौर संयंत्रों के माध्यम से इंस्टॉल कैपिसिटी 2020 तक 1,000 मेगावाट और 2022 तक 2,762 मेगावाट के लक्ष्य के मुकाबले 221.5 मेगावाट थी. इधर एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है, “दिल्ली में सौर ऊर्जा की काफी संभावनाएं हैं. इसका लक्ष्य कोयले से चलने वाली बिजली पर निर्भरता को कम करना है और इस प्रकार, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी करना है, ”

दिल्ली सरकार की स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिश कई कारणों से पिछड़ रही है

वहीं क्लीन एनर्जी कंसल्टिंग फर्म मेरकॉम इंडिया (Mercom India) के अनुसार, 31 जुलाई, 2021 तक संचयी रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रतिष्ठान 184 मेगावाट था.  सितंबर 2021 तक इंस्टॉलेशन बढ़कर 201 मेगावाट हो गया. वहीं दिल्ली की डिस्कॉम पर 2021-22 के लिए 10.25% और 2022-23 के लिए 10.5% की अक्षय बिजली खरीद दायित्व है. जहां दिल्ली सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, वहीं कई कारणों से यह प्रयास पिछड़ता दिख रहा है.

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लोगों की सौर ऊर्जा में बहुत रुचि क्यों नहीं है

वहीं टीओआई में छपी रिपोर्ट के मुताबिक विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर, रीन्यूएबल बिनीत दास का कहना है कि, “आवासीय रूफटॉप सौर ऊर्जा गति नहीं पकड़ रही है, लेकिन लागत प्रभाव के कारण वाणिज्यिक और औद्योगिक खंड में फलफूल रही है. चूंकि दिल्ली में आवासीय उपयोगकर्ताओं को 200 यूनिट मुफ्त मिलती है, इसलिए लोगों की सौर ऊर्जा में बहुत रुचि नहीं है. यह एक बड़ी दिक्कत है. ”

हायर पावर परचेज एग्रीमेंट भी बने बाधा

वहीं दास ने कहा कि हायर पावर परचेज एग्रीमेंट भी एक बाधा थे क्योंकि शहर ने कहीं और से स्वच्छ ऊर्जा खरीदी, जिससे स्थानीय लक्ष्य प्रभावित हुए. उन्होंने कहा कि, “मौजूदा परचेज मॉडल दिल्ली में आवासीय उद्देश्यों के लिए उपयुक्त नहीं हैं. पूंजीगत व्यय के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होती है. वहीं एक अन्य मॉडल, अक्षय ऊर्जा सेवा कंपनी, छतों पर पूरे सेटअप को मुफ्त में इंस्टॉल करती है और प्रति यूनिट खपत के लिए शुल्क लेती है. लेकिन यह बड़े पैमाने (200 किलोवाट की सीमा) पर किया जाता है.”

ऊर्जा और नवीकरणीय क्षेत्र में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन पावर फॉर ऑल के अश्विनी अशोक ने कहा, “सौर ऊर्जा देश भर में अच्छा नहीं कर रही है, लेकिन इसमें बहुत बड़ी संभावनाएं हैं.

 बीएसईएस सौर ऊर्जा को अपनाने के अलावा रूफटॉप इंस्टॉलेशन में तेजी ला रहा है

हालाँकि, विशेषज्ञों ने कहा कि दिल्ली में सीमित भूमि संसाधनों जैसे मुद्दे थे, महामारी के दौरान कई समूह हाउसिंग सोसाइटी वेंडर्स को अपने क्षेत्रों में प्रवेश करने देने से हिचक रही थीं. डिस्कॉम के एक अधिकारी ने कहा कि, “बीएसईएस राजधानी और यमुना दक्षिण, पश्चिम, पूर्वी और मध्य दिल्ली में रूफटॉप सौर ऊर्जा को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रही हैं. उन्होंने 120 मेगावाट से अधिक के कनेक्टेड लोड के साथ रिकॉर्ड 4,000 से ज्यादा प्रतिष्ठानों को सक्रिय किया है. अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए, बीएसईएस सौर ऊर्जा को अपनाने के अलावा रूफटॉप इंस्टॉलेशन में तेजी ला रहा है. यह उपभोक्ताओं और डिस्कॉम दोनों के लिए फायदे का सौदा है. आउटरीच कार्यक्रम उपभोक्ताओं को सोलर एनर्जी के लाभों के बारे में भी शिक्षित कर रहा है. ”

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