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सीरियल किलर को पसंद नहीं थी ये आदतें, इसलिए उतारता था मौत के घाट, जानें चंद्रकांत झा की क्राइम कुंडली

Delhi News: 1998 से चंद्रकांत झा के सीरियल किलिंग का दौर शुरू हुआ था. 2013 तक दो मामलों में फांसी की सजा और एक मामले में उम्र कैद सुनाई गई थी. दोबारा गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है.

Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पुलिस ने बेरहम सीरियल किलर को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई है. सीरियल किलर को परिचितों का महिला के साथ दुर्व्यवहार करना, धोखा देना, झूठ बोलना, नॉन-वेज खाना और नशा करना पसंद नहीं था. सीरियल किलर परिचितों को आदत सुधार लेने को कहता. बात नहीं मानने पर परिचितों की हत्या कर शवों को टुकड़ों में काट कर फेंक देता था. बिहार के मधेपुरा का सीरियल किलर चंद्रकांत झा की क्राइम कुंडली सामने आई है. उसने 1997 से 2007 के बीच 9 सालों में एक के बाद एक हत्या की 7 वारदातों को अंजाम दिया.

शवों को काट कर तिहाड़ जेल के बाहर चंद्रकांत झा फेंक देता था. मौके पर मिली चिट्ठी में दिल्ली पुलिस के लिए पकड़ने की चेतवानी भी होती थी. सीरियल किलर पर 'इंडियन प्रेडिटर, द बुचर ऑफ दिल्ली' नाम से बनी डॉक्यूमेंट्री नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी. सीरियल किलर चंद्रकांत झा वर्ष 1990 के दौरान रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था. उसने आजादपुर मंडी में सब्जी बेचने और मजदूरी करने का काम किया. बाद में अपराध की दुनिया से होते हुए हत्या को अंजाम देने लगा. सीरियल किलर के खिलाफ हत्याओं की फेहरिस्त सात तक पहुंच गई.

पहली हत्या के बाद सीरियल किलर को गिरफ्तार किया गया. 2003 में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने जून 2023 में दूसरी हत्या की वारदात को अंजाम दिया. एडिशनल सीपी संजय कुमार सैन ने बताया कि चंद्रकांत झा के खिलाफ 7 हत्या समेत कुल 13 मामले दर्ज हैं. सभी मामलों में पुलिस गिरफ्तार भी कर चुकी है. वर्ष 2013 तक दो मामलों में फांसी की सजा, एक मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी. वर्ष 2016 में फांसी को उम्र कैद की सजा में तब्दील कर दिया गया. 2023 के अक्टूबर महीने में तीन महीने की पैरोल पर चंद्रकांत झा बाहर निकला. पैरोल की अवधि खत्म होने पर सरेंडर करने के बजाय फरार हो गया. पुलिस भगोड़े चंद्रकांत झा की तलाश में जुटी हुई थी.

बेरहम किलर ऐसे हुआ गिरफ्तार

चंद्रकांत झा का खुलेआम बाहर घूमना लोगों के लिए खतरा था. दिल्ली पुलिस ने चंद्रकांत झा की गिरफ्तारी पर 50 हजार के इनाम की भी घोषणा की थी. गिरफ्तारी के लिए एसीपी रमेश लांबा और इंस्पेक्टर सतेंद्र मोहन की स्पेशल टीम में इंस्पेक्टर महिपाल, एसआई अंकित और गौरव को शामिल किया गया. स्पेशल टीम छह महीनों तक तलाश करती रही. चंद्रकांत झा के परिजनों का फोन नंबर खंगाला गया. कई राज्यों में भी पुलिस की टीम को भेजा गया. आखिरकार हेड कॉन्स्टेबल नवीन एक मोबाइल नंबर की पहचान करने में कामयाब हुए. मोबाइल पर बातचीत संदिग्ध लग रही थी.

स्पेशल टीम ने मोबाइल नंबर ट्रेस कर आरोपी को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से दबोच लिया. आरोपी दिल्ली से बिहार भागने की फिराक में था. पुलिस के मुताबिक, चंद्रकांत झा की पहली पत्नी से कोई संतान नहीं है. दूसरी शादी से पांच बेटियां हैं. पुलिस ने बताया कि आरोपी चंद्रकांत सनकी किस्म का है. यूपी-बिहार से रोजगार की तलाश में आने वाले युवकों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था करता था. चंद्रकांत झा परिचितों को शराब से दूरी बनाने, नॉन-वेज नहीं खाने, झूठ नहीं बोलने और महिलाओं के साथ गलत व्यवहार नहीं करने की नसीहत देता. नसीहत का पालन नहीं करने वालों को मौत के घाट उतारकर शवों को टुकड़े-टुकड़े कर विभिन्न स्थानों पर फेंक देता था. 

चंद्रकांत की जानें क्राइम कुंडली

● पहली हत्या: वर्ष 1998 में चंद्रकांत ने आदर्श नगर में मंगल उर्फ औरंगजेब नाम के एक शख्स की हत्या की. हत्या के बाद शवों को टुकड़े-टुकड़े कर दिल्ली में कई जगहों पर फेंक दिए थे. वारदात के कुछ समय बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. पहली हत्या के बाद आरोपी 2002 तक जेल में रहा था.

● दूसरी हत्याः जून 2003 में उसने साथी शेखर की हत्या कर दी थी. शेखर शराब का सेवन करता और झूठ भी बोलता था. चंद्रकांत झा को साथी की आदत पसंद नहीं थी. उसने हैदरपुर में शेखर की हत्या कर शव को अलीपुर में फेंका था.

● तीसरी हत्याः नवंबर 2003 में चंद्रकांत ने बिहार के रहने वाले उमेश की हत्या की थी. उमेश चंद्रकांत के साथ रह रहा था. हत्या का कारण उमेश का झूठ बोलना और धोखा देना था. उमेश का शव तिहाड़ जेल के गेट नंबर एक से बरामद हुआ था. 20 नवंबर, 2003 को हरि नगर थाने में चंद्रकांत के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी. 

● चौथी हत्या: नवंबर 2005 में चंद्रकांत ने भागलपुर, बिहार के रहने वाले गुड्डू की हत्या की थी. चंद्रकांत झा को गुडडू के गांजा पीने और फिजूलखर्ची करने की आदतें पसंद नहीं थीं. गुड्डू का शव मंगोलपुरी में सुलभ शौचालय के पास से मिला था. दो नवंबर को मंगोलपुरी थाने में चंद्रकांत के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था.

● पांचवीं हत्या: अक्टूबर 2006 में चंद्रकांत ने आजादपुर के रहने वाले सहयोगी अमित की हत्या की थी. अमित, एक महिला के साथ यौन उत्पीड़न में शामिल था. चंद्रकांत को सहयोगी अमित की आदतें पसंद नहीं थीं. उसने हत्या कर शव को तिहाड़ जेल के सामने फेंका था. 20 अक्टूबर, 2006 को हरि नगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी. 

● छठी हत्या: अप्रैल 2007 में चंद्रकांत ने सहयोगी उपेंद्र की हत्या की थी. उपेंद्र चंद्रकांत के दोस्त की बेटी से प्रेम करता था. उसने उपेंद्र को दोस्त की बेटी से दूर रहने की चेतावनी भी दी थी. बात नहीं मानने पर उपेंद्र की हत्या कर चंद्रकांत ने शव को तिहाड़ जेल के गेट नंबर तीन के पास फेंक दिया था. 25 अप्रैल 2007 को हरि नगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी. 

● सातवीं हत्या: मई 2007 में चंद्रकांत ने एक और साथी दिलीप की हत्या कर दी थी. चंद्रकांत को दिलीप की नॉन-वेज खाने की आदत पसंद नहीं थी. दिलीप का शव तिहाड़ जेल के गेट नंबर एक के पास से बरामद हुआ था. 18 मई 2007 को हरि नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी. 

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