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दिल्ली में लापता मामलों के नंबर बड़े लेकिन कहानी अलग, पुलिस ने आंकड़ों की बताई पूरी सच्चाई

Delhi Missing People Cases: दिल्ली पुलिस के मुताबिक लापता मामलों के ऊंचे आंकड़े बेहतर डिजिटल रिपोर्टिंग का नतीजा हैं, न कि बढ़ती गुमशुदगी का. पुलिस का दावा है कि बरामदगी की रफ्तार तेज हुई है.

नई दिल्ली में लापता लोगों के आंकड़ों को लेकर इन दिनों चिंता और सियासत दोनों देखने को मिल रही है. लेकिन ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ बड़े नंबर देखकर किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजधानी में लापता मामलों की रिपोर्टिंग भले ही ज्यादा दिखती हो, लेकिन इसकी बड़ी वजह एक मजबूत और आसान डिजिटल-फर्स्ट सिस्टम है, न कि अचानक बढ़ती गुमशुदगियां.

डिजिटल सिस्टम ने रिपोर्टिंग आसान बनाई

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आज कोई भी नागरिक मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के जरिये कुछ ही मिनटों में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करा सकता है. इस आसान पहुंच का असर यह हुआ है कि छोटी-छोटी अनुपस्थितियां भी तुरंत रिकॉर्ड में आ जाती हैं.

मसलन, स्कूल से देर से लौटे बच्चे, मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत के कारण कुछ समय तक संपर्क में न आ पाने वाले किशोर, या फिर एहतियातन चिंतित माता-पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतें, ये सभी तुरंत आधिकारिक आंकड़ों का हिस्सा बन जाती हैं.

अक्सर ऐसा भी होता है कि व्यक्ति कुछ ही घंटों में घर लौट आता है, लेकिन परिवार औपचारिक रूप से इसकी सूचना नहीं देता. नतीजा यह कि केस रिकॉर्ड में बना रहता है, जिससे कुल संख्या ज्यादा नजर आती है.

आंकड़े क्या कहते हैं?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 2025 में लापता व्यक्तियों के कुल मामलों में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई. यही रुझान 2026 की शुरुआत में भी देखने को मिला है. जनवरी 2026 में 1,777 लापता मामलों की रिपोर्ट हुई, जो न सिर्फ 2025 के मासिक औसत 2,042 से कम है, बल्कि जनवरी 2025 (1,786) से भी थोड़ा कम है. पुलिस इसे ठंडा होता रुझान मान रही है.

बरामदगी की रफ्तार पहले से तेज

अगर पिछले वर्षों से तुलना करें तो बरामदगी की गति में साफ सुधार दिखता है. उदाहरण के तौर पर, साल 2016 में 23,409 लोग लापता बताए गए थे. इनमें से 20,029 का पता लगा, यानी करीब 85% की रिकवरी दर. हालांकि यह सफलता एक या दो साल में नहीं, बल्कि पूरे नौ वर्षों की लंबी अवधि में हासिल हुई.

वहीं 2025 के आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं. उस साल कुल 24,508 लापता मामलों में से 15,421 लोगों का पता उसी कैलेंडर वर्ष के भीतर लगा लिया गया. यानी सिर्फ एक साल में ही करीब 63% मामलों का समाधान. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पिछले दशकों की तुलना में कहीं ज्यादा तेज बरामदगी है.

समय के साथ बढ़ेगा डिटेक्शन प्रतिशत

पुलिस का कहना है कि लापता व्यक्तियों की तलाश एक सतत प्रक्रिया है. 2025 और 2026 में दर्ज मामलों की खोज आने वाले महीनों में भी जारी रहेगी. जैसे-जैसे समय बीतेगा, इन मामलों का पता चलता जाएगा और कुल डिटेक्शन प्रतिशत अपने आप बढ़ता जाएगा.

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “अभी दिख रहे ऊंचे आंकड़े असल में सिस्टम की संवेदनशीलता और पारदर्शिता को दिखाते हैं, न कि सुरक्षा में गिरावट को.”

अंतरराष्ट्रीय तुलना में दिल्ली कहां?

दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि प्रति व्यक्ति लापता मामलों की दर के मामले में राजधानी कई पश्चिमी महानगरों से बेहतर स्थिति में है. आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में प्रति 1,00,000 आबादी पर लापता मामलों की दर 122.5 है. तुलना करें तो अमेरिका में यह दर करीब 138 और यूनाइटेड किंगडम में लगभग 254 बताई जाती है.

पुलिस के अनुसार, राजनीतिक बहसों में अक्सर कच्चे कुल आंकड़े सामने रख दिए जाते हैं, लेकिन अगर आबादी के हिसाब से मानकीकृत तुलना की जाए, तो दिल्ली का सुरक्षा परिदृश्य कई वैश्विक राजधानियों से ज्यादा स्थिर दिखाई देता है.

पूरी तस्वीर समझना जरूरी

पुलिस का साफ कहना है कि लापता मामलों के ऊंचे आंकड़े हमेशा बढ़ती गुमशुदगियों का संकेत नहीं होते. कई बार यह एक ऐसे सिस्टम का नतीजा होते हैं, जहां लोग बिना डर और झिझक के तुरंत रिपोर्ट कर पाते हैं. यानी नंबर जरूर बड़े दिख सकते हैं, लेकिन उनके पीछे की कहानी समझे बिना किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा.

About the author पंकज यादव

पंकज यादव, ABP News में स्टेट कंसल्टेंट्स टीम में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 10 वर्षों का अनुभव हैं. अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने Live Today News Channel, Inshorts News App और Dainik Bhaskar Digital जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता, न्यूज राइटिंग और वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े अनुभव हासिल किए.

पंकज की प्रमुख पत्रकारिता रुचि राजनीति, सरकार और प्रशासन, उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक मुद्दों, खेल और फीचर लेखन में रही है. उन्हें राजनीतिक घटनाक्रमों और सामाजिक विषयों को समझने और उन्हें सरल और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में विशेष रुचि है. लखनऊ और उत्तर प्रदेश से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर भी उन्होंने काम किया है.

पंकज ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद उन्होंने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (BBAU) से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पंकज से पत्रकारिता और पेशेवर संपर्क के लिए उनके X प्रोफाइल @pankajyadav1520 के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है.

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