दिल्ली में EWS कोटे के बच्चों के एडमिशन की पहली लॉटरी संपन्न, शिक्षा मंत्री आशीष सूद रहे मौजूद
Delhi EWS Admission 2025: दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के दाखिले के लिए कंप्यूटराइज्ड लॉटरी ड्रॉ का आयोजन किया. यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही.

Lottery For School Admissions: दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के दाखिले के लिए पहले लॉटरी ड्रॉ का आयोजन किया. यह प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड और पारदर्शी रही, जिसमें बच्चों के दाखिले का चयन कंप्यूटर के माध्यम से लॉटरी सिस्टम द्वारा किया गया. इस आयोजन की शुरुआत लक्ष्मी नगर के छोटे भावेश ने बटन दबाकर की.
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शिक्षा विभाग मिशन मोड में काम कर रहा है. इसी कड़ी में शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए EWS वर्ग के बच्चों के दाखिले हेतु पुराना सचिवालय स्थित शिक्षा विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में यह ड्रॉ आयोजित किया गया.
पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
मंत्री सूद ने बताया कि इस ड्रॉ प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किया गया. अभिभावकों और मीडिया के सामने यह प्रक्रिया हुई ताकि कोई भी इसे अपनी आंखों से देख सके. इसके अलावा, ड्रॉ स्थल की सीमित जगह को देखते हुए सरकार ने टीवी स्क्रीन भी लगवाईं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लाइव देख सकें.
गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार
शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार हर गरीब और जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के योग्य बच्चों को दाखिला देने के लिए यह ड्रॉ आयोजित कर रही है. इससे समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को भी समान शिक्षा का अवसर मिलेगा.
EWS दाखिले का महत्व
दिल्ली में EWS कोटा के तहत 25% सीटें गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं. यह कोटा निजी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाता है. शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत इस कोटे की व्यवस्था की गई थी, जिससे हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.
सरकार का संकल्प
मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शी और त्वरित कार्यवाही कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम जल्द ही दिखेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी इसी पारदर्शिता के साथ दाखिले की प्रक्रिया जारी रहेगी ताकि गरीब बच्चों को उनका हक मिल सके.
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Source: IOCL






















