दिल्ली में फायर NOC पर संकट! 27 आवेदन आए लेकिन नहीं मिला ऑडिटर
दिल्ली में फायर एनओसी का संकट मंडरा रहा है. फायर सर्विस को करीब 27 आवेदन मिले लेकिन विभाग के पास एक भी ऑडिटर नहीं था. बता दें कि नई व्यवस्था शुरू नहीं हुई थी और पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई.

दिल्ली में फायर एनओसी को लेकर नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही बड़ा पेच फंस गया है. सरकार ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का काम दिल्ली फायर सर्विस से हटाकर थर्ड पार्टी के जरिए कराने का फैसला किया था, लेकिन तय समय तक एक भी योग्य निजी ऑडिटर नहीं मिल पाया. दूसरी तरफ 24 अगस्त को पुरानी व्यवस्था के तहत फायर सर्विस की फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने और रिन्यू करने की पावर खत्म हो गई.
नई व्यवस्था के लिए फायर सर्विस ने सार्वजनिक नोटिस जारी किए. विभाग ने संभावित आवेदकों की ट्रेनिंग के लिए एमसीडी से भी संपर्क किया, ताकि आर्किटेक्ट समेत दूसरे योग्य लोग इस प्रक्रिया में शामिल हो सकें. लेकिन उम्मीद के मुताबिक आवेदन नहीं आए. फायर सर्विस को करीब 25 से 27 आवेदन मिले.
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इन आवेदनों की 24 अगस्त की आखिरी तारीख से करीब एक हफ्ते पहले, 17 अगस्त को जांच की गई. जांच में सामने आया कि तय चेकलिस्ट के हिसाब से एक भी आवेदन 100 फीसदी योग्य नहीं था. यानी 24 अगस्त की डेडलाइन आने तक फायर सर्विस के पास ऐसा एक भी निजी ऑडिटर नहीं था, जिसे नई व्यवस्था के तहत एम्पैनल किया जा सके.
नतीजा यह है कि 24 अगस्त के बाद फायर सर्विस नई एनओसी की एप्लीकेशन नहीं ले रही है. वहीं, निजी ऑडिटर के आने का रास्ता भी अभी साफ नहीं है. फायर सर्विस ने सरकार से तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा है, लेकिन उस फाइल पर अभी फैसला नहीं हुआ है. इस बीच रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस और दूसरे कारोबारियों की परेशानी बढ़ रही है और कुछ लोगों ने एमसीडी की तरफ से सीलिंग और कारोबार बंद होने की शिकायत भी की है.
आखिर मामला कहां अटका?
दिल्ली के चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने एबीपी न्यूज को बताया कि देशभर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत डीरेगुलेशन की प्रक्रिया चल रही है. इसी के तहत दिल्ली में भी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की व्यवस्था बदलने का फैसला हुआ. 26 मई 2026 को दिल्ली फायर सर्विस के नियमों में संशोधन किया गया.
इसके तहत तय किया गया कि फायर सर्विस की तरफ से जारी होने वाले फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और उनके रिन्यूअल का काम थर्ड पार्टी ऑडिटर के जरिए कराया जाएगा. इसके लिए निजी ऑडिटर को दिल्ली फायर सर्विस के साथ एम्पैनल किया जाना था.
17 अगस्त को ही सरकार को भेजी गई फाइल
जब 17 अगस्त को ही साफ हो गया कि कोई भी थर्ड पार्टी ऑडिटर योग्य नहीं है, तो फायर सर्विस ने अगले दिन सरकार को फाइल भेज दी. इसमें मांग की गई कि नई व्यवस्था लागू करने की समय-सीमा तीन महीने आगे बढ़ाई जाए.
ताकि जब तक निजी ऑडिटर तैयार नहीं हो जाते, तब तक फायर सर्विस को ही फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने और रिन्यू करने की अनुमति दी जाए. लेकिन चीफ फायर ऑफिसर के मुताबिक फाइल अभी प्रक्रिया में है और इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है.
24 अगस्त के बाद नई एनओसी की एप्लीकेशन बंद
पुरानी व्यवस्था की समयसीमा 24 अगस्त को खत्म होने के बाद फायर सर्विस ने नई एप्लीकेशन लेना बंद कर दिया. वजह यह है कि विभाग के पास नई एप्लीकेशन को प्रोसेस करने के लिए अब नियम नहीं है. 24 अगस्त तक जो आवेदन फायर सर्विस को मिले थे, उनका काम किया जा रहा है.
मलिक के मुताबिक 24 अगस्त से पहले फायर सर्विस के पास रोजाना करीब 30 से 40 आवेदन आते थे. इनमें नई एनओसी और पुराने फायर सर्टिफिकेट के रिन्यूअल दोनों के आवेदन शामिल होते थे. अब नई एप्लीकेशन स्वीकार नहीं की जा रही है.
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कारोबारियों पर पड़ने लगा इसका असर
फायर एनओसी की यह अटकी हुई व्यवस्था अब कारोबारियों के लिए परेशानी बन रही है. एके मलिक के मुताबिक कुछ रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउस संचालकों ने फायर सर्विस से संपर्क कर बताया है कि फायर सर्टिफिकेट वैलिड नहीं होने की वजह से एमसीडी ने उनका कारोबार बंद कर दिया या बिल्डिंग सील कर दी.
पश्चिम विहार से भी लोगों के फोन और ईमेल फायर सर्विस को मिले हैं. लोगों ने विभाग से पूछा कि इस स्थिति में उनकी मदद कैसे हो सकती है. फायर सर्विस की तरफ से उन्हें बताया गया कि जब तक सरकार उसकी पावर बहाल नहीं करती, तब तक विभाग नई एनओसी जारी नहीं कर सकता. यानी लोगों की एक तरफ एनओसी की जरूरत है, दूसरी तरफ एनओसी जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है.
पूर्व डीजी अतुल गर्ग ने मामले पर क्या कहा?
इस मामले पर दिल्ली फायर सर्विस के पूर्व डीजी अतुल गर्ग ने एबीपी न्यूज से कहा कि थर्ड पार्टी के जरिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का सरकार का फैसला एक बड़ा और अच्छा कदम था. लेकिन उनके मुताबिक इस व्यवस्था को लागू करने के लिए शुरुआत में सिर्फ तीन महीने का समय मांगना सही आकलन नहीं था.
अतुल गर्ग ने कहा कि यह बिल्कुल नई व्यवस्था है. इसमें निजी ऑडिटर ढूंढना, उनके आवेदन की जांच करना, ट्रेनिंग देना और फिर परीक्षा के जरिए योग्य लोगों को तैयार करना है. इसलिए इसमें समय लगना तय है. उनके मुताबिक फायर विभाग को शुरुआत से ही ज्यादा समय मांगना चाहिए था.
आवेदकों को कमी बताकर मौका देना चाहिए था- अतुल गर्ग
अतुल गर्ग ने यह भी कहा कि क्योंकि यह व्यवस्था पहली बार शुरू हो रही थी, इसलिए आवेदन करने वालों के लिए भी प्रक्रिया नई थी. हो सकता है कि कई लोगों को यह पता ही न हो कि किस तरह के दस्तावेज चाहिए और किन शर्तों को पूरा करना है.
उनके मुताबिक जो 27 लोग आवेदन लेकर आए थे, उन्हें सीधे अयोग्य घोषित करने के बजाय बुलाकर यह बताया जा सकता था कि उनके आवेदन में क्या कमी है और उन्हें कुछ समय देकर उसे पूरा करने का मौका दिया जा सकता था. गर्ग का कहना है कि आवेदन करने वालों में कई ऐसे लोग हैं जो योग्यता पूरी कर सकते हैं.
'आज एक्सटेंशन मिले तो भी नई व्यवस्था में समय लगेगा'
अतुल गर्ग के मुताबिक अगर सरकार आज फायर सर्विस को एक्सटेंशन दे भी देती है, तब भी नई थर्ड पार्टी व्यवस्था तुरंत शुरू नहीं हो पाएगी. निजी ऑडिटर के आवेदन होंगे, उनकी ट्रेनिंग होगी, परीक्षा होगी और उसके बाद उन्हें एम्पैनल किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन महीने तक का समय लग सकता है. यानी सिर्फ एक्सटेंशन की फाइल मंजूर होने से अगले दिन से फायर एनओसी मिलना शुरू नहीं हो जाएगा.
कारोबारियों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन का सुझाव
इस दौरान कारोबारियों की परेशानी कम करने के लिए अतुल गर्ग ने सेल्फ सर्टिफिकेशन का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि जिन रेस्टोरेंट या दूसरे कारोबारियों की फायर एनओसी इस व्यवस्था की वजह से लंबित है, उन्हें अस्थायी तौर पर सेल्फ सर्टिफिकेशन देने का विकल्प दिया जा सकता है.
गर्ग के मुताबिक कारोबारी फायर सेफ्टी से जुड़े जरूरी मानकों को लेकर सेल्फ सर्टिफिकेशन दें और इसे फायर डिपार्टमेंट में जमा करें. इसके आधार पर सरकार उन्हें तीन महीने का अस्थायी समय दे सकती है. उनका कहना है कि इससे कारोबारियों की तत्काल परेशानी कम होगी और सरकार को थर्ड पार्टी ऑडिटर की नई व्यवस्था तैयार करने का समय भी मिल जाएगा.
हालांकि अतुल गर्ग ने यह भी साफ कहा कि अगर किसी को फायर एनओसी नहीं मिल रही है तो उसे गैरकानूनी तरीके से कारोबार नहीं चलाना चाहिए. उनके मुताबिक फायर सेफ्टी के साथ समझौता नहीं किया जा सकता.
अब सरकार के फैसले का इंतजार
फिलहाल फायर सर्विस ने तीन महीने की एक्सटेंशन के लिए सरकार को फाइल भेज रखी है और उस पर फैसला होना बाकी है. फायर सर्विस का कहना है कि पावर बहाल होते ही वह फिर से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी और रिन्यू करना शुरू कर सकती है.
वहीं, पूर्व डीजी अतुल गर्ग का कहना है कि नई व्यवस्था सही दिशा में कदम हो सकती है, लेकिन इसे लागू करने में समय लगेगा. इसलिए तब तक सरकार को कारोबारियों की परेशानी दूर करने के लिए कोई अंतरिम रास्ता निकालना होगा.
अब सवाल यही है कि जब पुरानी व्यवस्था खत्म हो चुकी है, निजी ऑडिटर अभी आया नहीं है और नई एनओसी की एप्लीकेशन भी नहीं ली जा रही, तब तक उन कारोबारियों का क्या होगा जिनका काम फायर सर्टिफिकेट के बिना रुक रहा है? दिल्ली में फायर सेफ्टी की इस व्यवस्था का समाधान कब और कैसे निकलेगा, इसका फैसला अब सरकार को जल्द करना होगा.
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