SC के फैसले पर CJP बोली- युवाओं को परेशान न करें, खत्म हो मामला
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोक दिया और कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को सुरक्षा नहीं मिलेगी.

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें 18 साल से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों (जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है) को रिहा करने और उनके खिलाफ ज़बरदस्ती कार्रवाई न करने को कहा गया है.
उन्होंने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. देश में छात्रों और युवाओं को बिना किसी वजह के परेशान नहीं किया जाना चाहिए. हमें उम्मीद है कि 25 जुलाई को सरकार के साथ जो समझौता हुआ था, उसका पालन किया जाएगा. उस समझौते के तहत, न केवल दिल्ली में बल्कि देश भर के सभी BJP शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों या छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
रांका ने कहा कि हमें यह भी उम्मीद है कि केंद्र सरकार आज की समय-सीमा तक लिखित समझौता भेज देगी और इस मामले को खत्म करने में मदद करेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बता दें सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 साल से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हाल में देश भर में हुए आंदोलन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत संभालकर रखें.प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की पहली नजर में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए.पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल थे.
पीठ ने उन सभी राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग और प्रदर्शन से जुड़े दूसरे डिजिटल सबूत संभालकर रखने का निर्देश दिया जहां प्रदर्शन हुए थे. उसने यह भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से संबंधित इकट्ठा किया गया कोई भी डिजिटल डेटा संभालकर रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए.






















