अरविंद केजरीवाल के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, यहां है- लव मैरेज से लेकर मुख्यमंंत्री तक का पूरा सफर
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी आगामी गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है.

अगले साल देश के सात राज्यों में विधानसभा चुनाव है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, पंजाब में नए साल के शुरूआत में चुनाव होगा वहीं गुजरात और हिमाचल प्रदेश में साल के अंत में चुनाव कराए जाने की उम्मीद है. विधानसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियो ने कमर कस ली है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है.
अरविंद केजरीवाल लगातार तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं पहली बार वे साल 2013 दूसरी बार साल 2015 और तीसरी बार साल 2020 में मुख्यमंत्री बने. साल 2020 में हुए चुनावों में उन्हें 70 में से 62 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. आज की स्टोरी में हम अरविंद केजरीवाल के बारे में बताने जा रहे हैं.
आईआईटी खड़गपुर से की है पढ़ाई
अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त साल 1868 को हरियाणा के भिवानी जिले के सिवानी में हुआ था. उनके पिता गोविंद राम केजरीवाल पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे वही माता गीता देवी गृहणी थीं. अरविंद केजरीवाल की प्रारंभिक पढ़ाई मिशनरीज स्कूल से हुई इसके बाद वे आईआईटी खड़गपुर से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की. पढ़ाई पूरी होने के बाद वे टाटा स्टील में नौकरी करने लगे लेकिन वे जल्द ही नौकरी छोड़ दी और सिविल सर्विस की तैयारियों में जुट गए. साल 1993 में अरविंद केजरीवाल का चयन भारतीय राजस्व सेवा में हो गया
आईआरएस अधिकारी से की शादी
साल 1993 में मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में प्रशिक्षम के दौरान अरविंद केजरीवाल की मुलाकात सुनीता से हुई. ट्रेनिंग खत्म होने के बाद दोनों की पोस्टिंग दिल्ली में हुई. इस दौरान दोनों में नजदीकियां बढ़ने लगी और साल 1995 में शादी कर ली. अरविंद केजरीवाल और सुनीता का एक बेटा (पुलकित) और एक बेटी (हर्षिता) भी है.
आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में बनाई पहचान
अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के लड़ने के लिए मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर साल 2000 में एक एनजीओ परिवर्तन की स्थापना की थी. सूचना के अधिकार लागू करने ने केजरीवाल की अहम भूमिका रही इसके अलावा इन्होंने अपनी पहचान सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में बनाई.
रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से किया गया था सम्मानित
साल 2006 में आरटीआई एक्ट के लिए अरविंद केजरीवाल को रमन मैग्सेस अवार्ड से सम्मानित किया गया था. साल 2010 में उन्होंने कॉमनवेल्थ खेलों में हुए भ्रष्टाचार के लिए प्रदर्शन किया उनका कहना था कि केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई ने जांच के दौरान पक्षपात किया है. इसके बाद वे अन्ना हजारे के संपर्क में आए और इंडिया अगेंसेट करप्शन से जुड़ गए साल 2011 में हुए जन लोकपाल बिल के आंदोलन में केजरीवाल ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.
लोकपाल बिल के बाद राजनीति में आए केजरीवाल
अन्ना हजारे इस आंदोलन को राजनीति से दूर रखने के पक्ष में थे लेकिन अरविंद केजरीवाल का मानना था कि बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के इस आंदोलन का संतोषजनक परिणाम नहीं हासिल हो पाएगा. साल 2012 में अरविंद केजरीवाल ने गांधी जंयती के मौके पर अपनी नई पार्टी की घोषणा की और संविधान दिवस के दिन आम आदमी पार्टी का गठन किया.
2013 में पहली बार लड़ा चुनाव
आम आदमी पार्टी ने अपने गठन के एक साल बाद ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. जब नतीजे आए तो ये चौकाने वाले थे. आम आदमी पार्टी को 28 सीटे, बीजेपी को 31 और कांग्रेस को 8 सीटे मिली थी. किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ था जिसके बाद कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया और पहली बार अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने. हालांकि 49 दिन बाद ही आम आदमी पार्टी की सरकार गिर गई.
साल 2015 में एक बार फिर आए सत्ता में केजरीवाल
9 महीने राष्ट्रपति शासन के बाद साल 2015 में एक बार फिर विधानसभा चुनाव हुए इस बार उनकी पार्टी को 70 में 67 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. वही बीजेपी को 3 सीटें मिली थी.
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