'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर लगी रोक तो अरशद मदनी की आई पहली प्रतिक्रिया, बोले- 'इंशाल्लाह अंतिम फैसला...'
Arshad Madani On Udaipur Files: मौलाना अरशद मदनी ने फिल्म की रिलीज को लेकर कहा कि यह फैसला सिर्फ फिल्म पर रोक नहीं है, बल्कि सांप्रदायिक तत्वों के इरादों और एजेंडे पर एक रोक है.

उदयपुर फाइल्स फिल्म की रिलीज पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. वहीं कोर्ट के इस आदेश पर फिल्म के खिलाफ याचिका दायर करने वाले जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की प्रतिक्रिया सामने आई है. मदनी ने गुरुवार (10 जुलाई) को अदालत की कार्यवाही का स्वागत किया और संतोष व्यक्त किया.
उन्होंने कहा, "हम अंतिम निर्णय का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन दिनभर की सुनवाई के बाद जो नतीजा सामने आया, वह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आपत्तिजनक दृश्य हटाए जाने के बावजूद फिल्म में अब भी ऐसा सीन मौजूद है जो हमारे समाज में नफरत का जहर फैला सकता है." मौलाना मदनी ने आगे कहा, "फिल्म की स्क्रीनिंग पर स्टे और अदालत के अन्य आदेशों ने संविधान की सर्वोच्चता को मजबूत किया है. यह एक स्पष्ट संदेश भी देता है कि कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कोई भी व्यक्ति संवैधानिक और नैतिक सीमाओं का उल्लंघन नहीं कर सकता."
'फिल्म की आड़ में पूरे समुदाय को कठघरे में खड़ा किया'
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कुछ और आपत्तिजनक फिल्में भी बनी हैं, लेकिन वे इतनी घिनौनी नहीं थीं. इस फिल्म में एक हत्या की घटना की आड़ में एक पूरे समुदाय को इस तरह कठघरे में खड़ा किया गया है, मानो वे अपराधी हों. इसीलिए हमने इस मामले को अदालत में ले जाने का फैसला किया. हमें खुशी है कि हमारी कोशिशें कामयाब रहीं, और हमें पूरा विश्वास है कि इंशाल्लाह अंतिम फैसला भी हमारे पक्ष में ही होगा. यह फैसला सिर्फ फिल्म पर रोक नहीं है, बल्कि सांप्रदायिक तत्वों के इरादों और एजेंडे पर एक रोक है."
अरशद मदनी ने ये भी कहा, "हमारे वकीलों, विशेषकर देश के सबसे प्रतिष्ठित वकीलों में से एक, कपिल सिब्बल ने अदालत को सफलतापूर्वक यह बताया की यह फिल्म देश के बहुलवादी समाज के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है."
'दूसरे निर्माताओं के लिए नजीर'
मौलाना मदनी ने आगे कहा, "इस फिल्म के बारे में लिया गया फैसला भविष्य के लिए भी एक नजीर माना जाएगा और अन्य फिल्म निर्माताओं को भी एक बड़ा सबक मिलेगा जो फिरकापरस्त ताकतों को खुश करने की नापाक मंशा से ऐसी फिल्में बनाकर देश की शांति, एकता और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं."
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Source: IOCL






















