संसद में ये बिल पास होता तो BJP में नहीं जा सकते थे राघव चड्ढा, 6 साल चुनाव नहीं लड़ पाते, खुद किया था पेश
Raghav Chadha News: बीजेपी नेता राघव चड्ढा ने 2022 में एक विधेयक पेश किया था, अगर वह पास हो जाता तो आज आम आदमी पार्टी में इतनी बड़ी टूट संभव नहीं थी.

आम आदमी पार्टी के नेता रहे राज्यसभा सांसद राघव, भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. उन्होंने संविधान और नियमों का हवाला देते हुए दो तिहाई सदस्यों के साथ अपना विलय बीजेपी में करा लिया. उनके इस विलय को राज्यसभा सचिवालय ने मान्यता भी दे दी.
सचिवालय ने डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, डॉ. संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता को बीजेपी सांसदों की सूची में शामिल कर दिया है.
हालांकि आज से चार साल पहले राघव चड्ढा ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जो अगर पास हो जाता तो राघव चड्ढा सात सांसदों के साथ भी अपना विलय बीजेपी में नहीं करा पाते.
वर्ष 2022 में संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में राघव चड्ढा ने संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया था .इस संविधान (संशोधन) विधेयक, 2022 मुख्य रूप से दल-बदल विरोधी कानून (दसवें सूची ) को और सख्त बनाने से जुड़ा था. विधेयक में प्रस्ताव थे कि दल-बदल के आधार पर अयोग्य ठहराए गए सांसद या विधायक को 6 साल तक चुनाव लड़ने से रोका जाए. पार्टी व्हिप के बावजूद 7 दिन तक पेश नहीं होने पर इसे स्वेच्छा से सदस्यता छोड़ना माना जाए. व्हिप को केवल विश्वास प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव तक सीमित किया जाए. पार्टी विलय के लिए जरूरी संख्या दो-तिहाई से बढ़ाकर तीन-चौथाई की जाए और स्पीकर/चेयरमैन को 30 दिन (अधिकतम 3 महीने) के भीतर फैसला करना होगा.
बता दें राघव चड्ढा मौजूदा कानून के आधार पर 2 तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए हैं.
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बिल में राघव चड्ढा ने क्या कहा था?
बिल में राघव चड्ढा ने कहा था कि कि देश में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स'और 'हॉर्स ट्रेडिंग'लोकतंत्र के लिए खतरा बन गए हैं. उन्होंने तर्क दिया था कि मौजूदा कानून में खामियों के कारण निर्वाचित प्रतिनिधि जनादेश के विपरीत जाकर राजनीतिक लाभ उठाते हैं.





















