Chhattisgarh Politics: आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर दो दिवसीय विशेष सत्र पर भड़की बीजेपी, कांग्रेस पर लगाया ये आरोप
छत्तीसगढ़ में आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है. कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने आ गए हैं. बीजेपी ने 10 दिवसीय शीतकालीन सत्र बुलाने की मांग की है.

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में आदिवासी आरक्षण के मामले में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. लेकिन इस सत्र में केवल 2 दिन की ही कार्यवाही होगी. बीजेपी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने 10 दिन का सत्र का बुलाए जाने की मांग की है. उन्होंने कांग्रेस सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने भी बीजेपी के आरोप पर सवाल खड़ा कर दिया है.
बीजेपी ने की 10 दिन के सत्र आयोजन की मांग
दरअसल आदिवासी आरक्षण कटौती पर गरमाई सियासत में कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने आ गए है. दोनों में आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र 10 दिनों का हो. जिसमें प्रदेश की जनता के हित में विस्तृत चर्चा हो सके. लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शीत सत्र की चर्चा से भागना क्यों चाहते हैं? चर्चा से मुंह क्यों मोड़ना चाहते हैं? नेता प्रतिपक्ष ने आग्रह किया कि 10 दिन का शीतसत्र बुलाया जाए. इसमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा कराई जाए. नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि सरकार आदिवासियों के लिए 32 फीसदी आरक्षण का अध्यादेश क्यों नहीं लाती? उन्होंने कहा सरकार तत्काल अध्यादेश लाए.
नेता प्रतिपक्ष के बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी
नेता प्रतिपक्ष के बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस ने कहा है कि केवल आदिवासी आरक्षण को लेकर विशेष सत्र बुलाया गया है. शीतकालीन सत्र की कोई चर्चा ही नहीं हुई है. कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि बीजेपी का बयान आरक्षण विरोधी होने का प्रमाण है.अभी केवल आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण देने के मसले पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. शीतकालीन सत्र के विषय पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं हुई है. बीजेपी शीतकालीन सत्र की आड़ में आदिवासी आरक्षण के लिए बुलाए जा रहे विधानसभा सत्र का विरोध कर आरएसएस के आदिवासी आरक्षण विरोधी मंसूबे को पूरा करना चाहती है.
दो दिवसीय होगा विधानसभा का विशेष सत्र
गौरतलब है कि 19 सितंबर को हाईकोर्ट ने राज्य के 58 प्रतिशत आरक्षण को निरस्त कर दिया था. इसके बाद राज्य में आदिवासियों का आरक्षण 32 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो गया है. इसलिए आदिवासी समाज नाराज है और 32 प्रतिशत आरक्षण बहाल करने की मांग कर रहा है. इसी के चलते भूपेश बघेल सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है. बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा अध्यक्ष को इसके लिए पत्र लिखा. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को राज्यपाल को भेजा. राज्यपाल ने एक और दो दिसंबर को विधानसभा का विषेश सत्र बुलाने की मंजूरी दी है.
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Source: IOCL





















