छत्तीसगढ़ में 8 महीने से छात्रों का अनशन जारी, सरकार पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में D.Ed और CAF के करीब 2700 अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर 8 महीने से आमरण अनशन पर हैं. कई की तबीयत बिगड़ी, फिर भी सरकार पर सुनवाई नहीं करने के आरोप हैं.

- कांग्रेस ने छात्रों के मुद्दों पर सरकार की अनदेखी पर सवाल उठाए.
देशभर में Gen-Z के आंदोलनों की चर्चा हो रही है. दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर झारखंड तक छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं. झारखंड में छात्र आंदोलन को बीजेपी का समर्थन भी मिल रहा है. बीजेपी ने झारखंड बंद का ऐलान किया और सरकार पर छात्रों की मांगें नहीं सुनने का आरोप लगाया. लेकिन इसी बीच छत्तीसगढ़ से छात्रों के आंदोलन की एक अलग तस्वीर सामने आ रही है. यहां करीब 8 महीने से छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं, लेकिन राज्य की बीजेपी सरकार पर उनकी सुध नहीं लेने के आरोप लग रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में करीब 2300 डी.एड अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षा का परिणाम कई साल पहले जारी हो चुका है, इसके बावजूद उन्हें अब तक नौकरी नहीं मिली है. अपनी मांग को लेकर ये युवा पिछले करीब 8 महीने से आमरण अनशन पर बैठे हैं.
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लंबे समय तक भूख हड़ताल के चलते कई छात्रों की तबीयत बिगड़ चुकी है और उन्हें अस्पताल तक ले जाना पड़ा. आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों को जेल भी भेजे जाने की बात सामने आई है.
इसके बावजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं ले रही है. अरविंद कुमार और विकास साहू, डी.एड अभ्यर्थियों का कहना है कि जब भर्ती परीक्षा का परिणाम पहले ही आ चुका है, तो नियुक्ति में देरी क्यों की जा रही है.
417 सीएएफ अभ्यर्थी भी नौकरी के इंतजार में
छत्तीसगढ़ में सिर्फ डी.एड अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि CAF यानी छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स के चयनित अभ्यर्थी भी लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं. करीब 417 युवा भर्ती प्रक्रिया में चयनित होने के बाद भी नौकरी मिलने की राह देख रहे हैं.
इन अभ्यर्थियों ने अपनी परेशानी केंद्र सरकार तक पहुंचाने की कोशिश भी की. बताया गया कि युवाओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपने खून से पत्र लिखकर अपनी मांग बताई. इसके बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति नहीं मिलने का आरोप है.
अतुल साव और मुकेश चन्द्रवंशी समेत CAF अभ्यर्थियों का कहना है कि वे नौकरी मिले बिना घर वापस नहीं जाएंगे. उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान उनकी जान चली जाए, लेकिन वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे.
जंतर-मंतर पर भी उठाई आवाज
छत्तीसगढ़ के ये युवा अपनी मांगों को लेकर CJP के आंदोलन में शामिल होने दिल्ली के जंतर-मंतर भी पहुंचे थे. उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रीय राजधानी में आवाज उठाने से उनकी मांग सरकार तक पहुंचेगी और इस मामले में कोई कार्रवाई होगी. हालांकि, उनका कहना है कि वहां भी उनकी मांगों की सुनवाई नहीं हो सकी.
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने भी बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अलग-अलग राज्यों में छात्रों के आंदोलनों को राजनीतिक नजरिए से देख रही है.
कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना
छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि दिल्ली में छात्रों के आंदोलन पर बीजेपी सरकार की कार्रवाई का विरोध किया जाता है, जबकि झारखंड में बीजेपी विपक्ष में होने के कारण छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रही है. उनका सवाल है कि जब छत्तीसगढ़ में बीजेपी की ही सरकार है, तो यहां पिछले कई महीनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है.
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कांग्रेस का आरोप है कि राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दों पर भी अपने राजनीतिक फायदे और नुकसान के हिसाब से रुख तय कर रहे हैं.
कुल मिलाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अपने भविष्य और रोजगार से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. कहीं इन आंदोलनों को राजनीतिक समर्थन मिल रहा है तो कहीं सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं.




















