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Nutrition Rehabilitation Center: संविदा कर्मचारियों के हड़ताल से बस्तर सुपोषण अभियान में पड़ रहा बुरा असर, केंद्रों में लगे ताले

सविंदा कर्मचारियों की हड़ताल से बस्तर जिले में चलाए जा रहे सुपोषणअभियान में काफी बुरा असर पड़ा हैजिले के कई पोषण पुनर्वास केंद्रों में ताला लग गया हैजिस वजह से कुपोषित बच्चों को इलाज नहीं मिल पा रहाहै

Bastar News: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मियों.  संविदा कर्मचारी और एनएचएम की हड़ताल से कुपोषण मुक्त बस्तर अभियान में इसका काफी बुरा असर पड़ा है. एक साथ सभी कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से जिले के एनआरसी सेंटर बंद पड़े हैं. और कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने की योजना फेल साबित हो रही है.

दरअसल शासन द्वारा 27% मानदेय बढ़ाए जाने के बाद भी नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदा कर्मचारी लगातार राजधानी रायपुर में  आंदोलन कर रहे हैं और इस आंदोलन में बस्तर जिले के भी सैकड़ों कर्मचारी जुटे हुए हैं. इस वजह से  जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र पूरी तरह से बंद पड़े है.और कुपोषित बच्चों को ईलाज नहीं मिल पा रहा है...

अस्पताल समेत सभी पुनर्वास केंद्रों में लगा ताला

जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में 5 एनएचएम के स्टाफ हैं. कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए यह एक यूनिट है. इस यूनिट के स्टाफ 3 जुलाई से ही पेन डाउन हड़ताल पर हैं. इस कारण से कुपोषित बच्चों को  उपचार नहीं मिल पा रहा है. कर्मचारियों के  हड़ताल पर जाने  के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों से कुपोषित बच्चे पुनर्वास केंद्रों में नहीं भेजे जा रहे हैं. इसी तरह जिले के ब्लॉकों में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्रों की भी यही स्थिति है. कर्मचारी नहीं होने की वजह से इन पुनर्वास केंद्रों में ताला लग गया है. जिससे हड़ताल के बाद से कुपोषण बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है.

महिला बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में कुल  कुपोषित बच्चों की संख्या 25 हजार है.इसमें गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 10 हजार हैं.पोषण पुनर्वास केंद्र  अति कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी मानी जाती है. ऐसे में अगर समय में इलाज नहीं मिलता तो इससे बच्चों को खतरा भी हो सकता है.जिला अस्पताल में मौजूद पुनर्वास केंद्र में ताला लटकने की वजह से अति कुपोषित बच्चों की ईलाज पर बुरा असर पड़ रहा है. जिसके चलते इन कुपोषित बच्चों के परिजन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं.

हालांकि महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी मनोज कुमार सिन्हा का कहना है कि शासन की ओर से हड़ताल पर बैठे संविदा कर्मचारियों को अल्टीमेटम भी दिया गया है. इसके बावजूद भी अगर वे वापस अपने काम में नहीं लौटते हैं तो इन पोषण पुनर्वास केंद्रों के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम किया जाएगा. फिलहाल जिले में कई जगह पुनर्वास केंद्रों में कर्मचारी नहीं होने की वजह से ताला लगा हुआ है...

नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन में डटे कर्मचारी

दरअसल पूरे प्रदेश भर में जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ कर्मियों. संविदा कर्मचारी और एनएचएम अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर बीते 3 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं. कर्मचारियों ने सरकार से उन्हें नियमितीकरण करने की मांग की है. हालांकि हाल ही में कैबिनेट की हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने संविदा कर्मचारियों के 27% मानदेय बढ़ाए जाने की घोषणा की है. बावजूद इसके सभी संविदा कर्मचारी अपनी मांग को लेकर आंदोलन में डटे हुए है...

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