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Explained: बिहार में बेरोजगारी से जुर्म और विकास तक! सम्राट चौधरी के इन फैसले पर टिकीं रहेंगी सबकी नजरें

Samrat Choudhary Bihar Next CM: नीतीश कुमार 20 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे, फिर भी कुछ मुद्दे इस्तीफे के बाद भी अनसुलझे हैं. अब प्रदेश की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में जाएगी, तो नतीजे क्या निकलेंगे?

14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. कल यानी 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन जाएंगे. नीतीश के कार्यकाल पर गौर करने पर कई अधूरे वादे दिखते हैं, जो सम्राट के सामने बड़ी चुनौती बन सकते हैं. फिर शराबबंदी हो, बेरोजगारी हो या कानून-व्यवस्था... सम्राट के लिए नीतीश के अधूरे वादे पूरे करना कितना मुमकिन होगा? जानते हैं एक्सप्लेनर में...

मुद्दा 1: युवा बेरोजगारी और बड़े पैमाने पर प्रवास

नीतीश सरकार ने 2025 चुनाव से पहले 1 करोड़ युवाओं को नौकरियां और रोजगार का वादा किया था, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि बिहार अभी भी देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला राज्य है. पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार की कुल बेरोजगारी दर 3.9% थी, जो राष्ट्रीय औसत 3.2% से भी ज्यादा थी. PLFS की अप्रैल-जून 2025 रिपोर्ट देखें, तो अप्रैल-जून 2025 में बेरोजगारी दर 5.2% और जुलाई-सितंबर 2025 में 3.9% थी. यानी काम करने वाले हर 100 लोगों में सिर्फ 46 काम कर रहे हैं, बाकी 54 बेरोजगार हैं या नौकरी ढूंढना छोड़ चुके हैं. लाखों युवा दिल्ली, मुंबई, गुजरात में मजदूरी करने जाते हैं. शिक्षा पूरी होने के बाद भी सरकारी नौकरियां कम हैं और प्राइवेट सेक्टर में निवेश नहीं आ रहा.

नीतीश क्यों नहीं कर पाए?

स्कूल-कॉलेज बने, लेकिन गुणवत्ता वाली नौकरी-उन्मुख शिक्षा नहीं आई.

सम्राट चौधरी क्या कर पाएंगे?

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि वे BJP के OBC चेहरा हैं और प्रशासनिक सुधारों पर फोकस रखते हैं. केंद्र सरकार का पूरा सपोर्ट मिलेगा, CSR फंड और इंडस्ट्री आकर्षित करने की कोशिशें पहले से चल रही हैं, लेकिन 1 करोड़ जॉब्स का वादा पूरा करना बहुत मुश्किल है. अगर 50% तक सुधार हुआ तो युवा प्रवास कम होगा, परिवार मजबूत होंगे और अर्थव्यवस्था बढ़ेगी. नहीं तो विरोध बढ़ेगा और 'जंगल राज' वाली पुरानी छवि लौट सकती है.

मुद्दा 2: कानून-व्यवस्था का बिगड़ना

नीतीश ने 2005 में 'सुशासन' के नाम पर अपराध कम किया था, लेकिन आखिरी 5-6 साल में क्राइम ग्राफ फिर बढ़ गया. चिराग पासवान ने भी कहा था कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है. हत्या, लूट, महिला अपराध की घटनाएं बढ़ीं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 2025 में 2,556 हत्याएं हुईं, जो 2024 की तुलना में 8.3% कम थीं. जबकि महिला अपराध 2025 में 2,025 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए.

नीतीश क्यों नहीं कर पाए?

राजनीतिक गठबंधन और बार-बार एलायंस बदलने से फोकस भटका, पुलिस में भर्ती और ट्रेनिंग अधूरी रही.

सम्राट चौधरी क्या कर पाएंगे?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वे अभी होम मिनिस्टर हैं, पुलिस और आंतरिक सुरक्षा संभाल रहे हैं. BJP शासन में 'जीरो टॉलरेंस' नीति लाने की संभावना ज्यादा है. अगर सुधरा तो महिलाओं और आम आदमी को राहत मिलेगी और निवेश आएगा. नहीं सुधरा तो NDA की 'विकास' वाली छवि खराब होगी और विपक्ष (RJD) हमला करेगा.

मुद्दा 3: राज्य प्रशासन में भ्रष्टाचार पर लगाम

बिहार में ब्रिज गिरने, लैंड सर्वे में घोटाले और रेवेन्यू विभाग में भ्रष्टाचार की खबरें लगातार आईं. 2025 चुनाव में विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा भी बनाया. इसे बावजूद नीतीश ने 'सुशासन' का दावा किया, लेकिन आखिरी दौर में भ्रष्टाचार बढ़ा.

नीतीश कंट्रोल क्यों नहीं कर पाए?

लंबे शासन में ब्यूरोक्रेसी में सांठगांठ हो गई, बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी और प्रशासनिक लीकेज की खबरें उठीं.

सम्राट चौधरी क्या कर पाएंगे?

वे ट्रांसपेरेंसी और CSR फंड के सही इस्तेमाल पर जोर देते हैं. BJP की 'क्लीन इमेज' और केंद्र की निगरानी से सुधार संभव है. अगर भ्रष्टाचार कम हुआ तो टैक्स और राजस्व बढ़ेगा और विकास तेज होगा. नहीं हुआ तो जनता का विश्वास टूटेगा और 'महादलित-महिला' वोटर नाराज होंगे.

मुद्दा 4: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की खराब गुणवत्ता

बिहार में स्कूल-कॉलेज और अस्पताल भवन तो बने, लेकिन टीचर-डॉक्टर की कमी और यूनिवर्सिटीज खस्ताहाल रहीं. पटना मेडिकल कॉलेज जैसी पुरानी संस्थाएं टॉप पर नहीं रहीं. लड़कियों की साइकिल योजना सफल रही, लेकिन उच्च शिक्षा और अच्छे डॉक्टर नहीं मिले.

नीतीश क्यों नहीं कर पाए?

इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहा, लेकिन स्टाफिंग और क्वालिटी पर ध्यान कम दिया गया.

सम्राट चौधरी क्या कर पाएंगे?

NDA में केंद्र से फंड और नीति सपोर्ट मिलेगा. वे बड़े प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग करते रहे हैं. गुणवत्ता सुधरी तो बिहार का ह्यूमन कैपिटल मजबूत होगा और युवा बाहर नहीं जाएंगे. नहीं सुधरा तो अगले चुनाव में 'झूठे वादे' का आरोप लगेगा.

मुद्दा 5: आर्थिक विकास और विशेष श्रेणी का दर्जा

बिहार अभी भी देश का सबसे गरीब राज्य है. सबसे कम प्रति व्यक्ति आय, सबसे कम निवेश और सबसे कम इंडस्ट्री. बिहार इकोनॉमी सर्वे 2025-26 के मुताबिक, राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का सिर्फ 31.7% है. पटना जैसे जिले में आय 2,41,220 रुपए है, जो ज्यादा है, लेकिन अररिया और सीतामणि जैसे जिलों में बहुत कम यानी 3,000 महीना से भी नीचे है. नीतीश ने बार-बार स्पेशल स्टेटस की मांग की, लेकिन बात नहीं बन पाई.

नीतीश क्यों नहीं कर पाए?

गठबंधन की राजनीति और केंद्र के साथ रिश्तों में उतार-चढ़ाव बना रहा. कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस का दामन थामा.

सम्राट चौधरी क्या कर पाएंगे?

BJP CM बनने से केंद्र (मोदी सरकार) का पूरा सहयोग मिलेगा. वे निवेश आकर्षित करने और प्रशासनिक सुधार पर फोकस रखते हैं. अगर निवेश बढ़ा और स्पेशल स्टेटस मिला तो बिहार 'नया बिहार' बन सकता है. रोड, बिजली और इंडस्ट्री में विकास संभव है, नहीं तो गरीबी और प्रवास जारी रहेगा.

ये 5 मुद्दे नीतीश के 'सुशासन' की सबसे बड़ी कमजोरियां रहे. सम्राट चौधरी के पास BJP की मजबूत केंद्र सरकार और होम मिनिस्टर का अनुभव है, इसलिए कुछ मुद् पर तेजी संभव है, लेकिन जातीय समीकरण, महादलित वोट और महिलाओं के वादे उन्हें चुनौती देंगे. अगर वे 2-3 मुद्दे भी सुलझा पाए तो बिहार का चेहरा बदल सकता है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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