बिहार: जीविका दीदियों ने पाई यह बड़ी सफलता, शहद उत्पादन से बन रहीं आत्मनिर्भर
Bihar News: बिहार में जीविका दीदियां मधुमक्खी पालन से आत्मनिर्भर बन रही हैं. हजारों महिलाएं शहद उत्पादन कर हर साल करोड़ों का कारोबार और अच्छी आमदनी हासिल कर रही हैं.

बिहार में 'जीविका' योजना से जुड़ी हजारों महिलाएं आज (2 जनवरी) मधुमक्खी पालन के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं. ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि शहद उत्पादन ने ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे रोजगार दिया है और उनकी आमदनी में बड़ा इजाफा किया है.
मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जीविका दीदियों द्वारा तैयार किया गया शहद न केवल राज्य में लोकप्रिय हो रहा है. बल्कि देश-विदेश तक अपनी पहचान बना चुका है. उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत वर्ष 2009 में मुजफ्फरपुर जिले से प्रायोगिक रूप में की गई थी. आज यह योजना बिहार के 20 जिलों तक फैल चुकी है.
मधुमक्खी पालन से जुड़ी करीब 11,855 महिलाएं
वर्तमान समय में राज्य के 90 प्रखंडों में करीब 11,855 महिलाएं मधुमक्खी पालन से जुड़ी हुई हैं. ये महिलाएं हर साल 10 से 12 करोड़ रुपये मूल्य का शहद उत्पादन कर रही हैं. इससे प्रति महिला को औसतन करीब 10 हजार रुपये प्रति माह की आमदनी घर बैठे हो रही है.
जीविका दीदियों के हाथों तेजी से बढ़ रहा शहद उत्पादन- श्रवण
श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका दीदियों के हाथों शहद उत्पादन का काम तेजी से बढ़ रहा है. महिलाओं द्वारा तैयार शहद को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के लिए हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी में भेजा जाता है. इसके बाद यह शहद देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी निर्यात किया जाता है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही महिलाएं
मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक आसान और स्थायी माध्यम बनकर उभरा है. सरकार की यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है. बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है.
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Source: IOCL





















