'वोट के समय तो जातियों में बंट जाते हैं...', बिहार के शिक्षकों पर बरसे प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों पर तंज कसते हुए कहा कि जब वोट देने की बात आती है तो सभी को अपनी जाति के आधार पर मतदान करना होता है. फिर सवाल करते हैं कि सरकार मांगें क्यों नहीं सुनती?

बिहार के गया में जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर के नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने दावा किया कि बीते 20 साल में एजुकेशन सिस्टम ध्वस्त हो गया और इसके जिम्मेदार कुछ हद तक राज्य के शिक्षक भी हैं.
दरअसल, गया के हरिदास सेमिनरी ऑडोटोरियम में शिक्षक संवाद एवं नागरिक अभिनंदन समारोह में पीके ने हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने टीचर्स पर तंज कसते हुए कहा कि शिक्षकों को पहले 'गुरुजी' कहा जाता था. फिर वह मास्टरजी बन गए और अब 'मस्टरवा' कहलाए जाते हैं. प्रशांत किशोर ने शिक्षकों से कहा कि जब वोट देने की बात आती है तब तो आप जातियों में बंट जाते हैं. इसलिए सरकार आपकी मांगें नहीं सुनती और शिक्षा व्यवस्था खराब होती जा रही है.
यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला, '…कौन जिंदा रहेगा?'
'सबसे पढ़े-लिखे CM के कार्यकाल में ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था'
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए बांकीपुर विधायक ने कहा, "किसी जमाने में नीतीश कुमार के बहुत बड़े प्रसंशक रहे हैं और विरोध भी किया है. नीतीश युग का 20 साल खत्म हुआ. उन वर्षों का अगर कोई आकलन करेगा तो एक काला अध्याय यह होगा पढ़े-लिखे सीएम के रहते बिहार में शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई. यह सबसे बाड़ा काला अध्याय है."
पीके ने आगे कहा, "अब यहां अधिकारियों का बोलबाला है. आज अगर अच्छी सरकार भी बन जाए तो उसका जीवन सुधरने वाला नहीं है. जीवन भर उन्हें शिक्षित समाज के पीछे की चलना होगा. यह रिवर्सल डैमेज हो गया."
'सबने ठगा तो अब प्रशांत किशोर के पास आ गए'
शिक्षकों पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "शिक्षक सुशील मोदी का झंडा उठाकर घूमने लगे. शिक्षकों ने वोट दिया और वह चुनाव हार गए. तेजस्वी यादव के झांसे में आकर वोट दिया और वह हार गए. 2020 के चुनाव में समान काम का समान वेतन के लिए वोट दिया और वह हार गए. जब अब कोई नहीं मिला तो प्रशांत किशोर के पास आ गए हैं. खुद कह रहे हैं कि सुशील कुमार मोदी ने ठगा, तेजस्वी यादव ने ठगा और नीतीश कुमार ने भी ठगा."
'शिक्षक बनकर कभी वोट नहीं किया'
सोचने की जरूरत है. 6 लाख शिक्षक हैं, 30 से अधिक संघ हैं. खंड खंड में बंटे हैं लेकिन कभी शिक्षक बनकर आप लोगों ने वोट ही नहीं किया. वोट के समय आप राजपूत, पंडित, कुशवाहा, यादव, दलित, पासवान बन गए. पहले ये गुरुजी कहलाते थे, फिर मास्टरजी बने और अब मस्टरवा बन गए हैं
शिक्षकों से पीके ने कहा कि हम आपकी मांगें मनवाकर दिखा देंगे, आप एक साथ खड़े होकर तो दिखाइए. लेकिन यह नहीं होगा. शिक्षक के प्रतिनिधि का जब चुनाव होता है तो शिक्षक ही वोट देते हैं. इसके बाद भी सभी एनडीए के लोग जीतते हैं. मांग 20 साल से है, लेकिन वोट उसी एनडीए को दिए जा रहे हैं.
'सरकार 3 हजार ज्यादा देगी, फिर उसी को वोट करेंगे'
नाराजगी जताते हुए पीके बोले, "सरकार ने एक करोड़ लोगों की पेंशन बढ़ा दी. सरकार को लगा कि लोग जन सुराज को वोट न दे दें इसलिए पेंशन बढ़ाई. वह 3 से 4 हजार रुपये बढ़ा देगी तो आप लोग फिर वोट दे दीजिएगा. अनपढ़ महिलाओं को 10 हजार देकर वोट लेना और आप में कोई अंतर नहीं है."
'मेरे साथ फोटो खिंचवाते हैं और जाति के नाम पर वोट कर आते हैं
प्रशांत किशोर ने कहा कि जनसुराज को जो पसंद करते हैं, वो सेल्फी और साथ में फोटो खिंचवाते हैं लेकिन जब वोट देने की बारी आती है तो जाति, धर्म में बंट जाते हैं. जन सुराज की सोच है कि बिहार को सुधारना है तो शिक्षकों की महत्ता को समाज समझे. बिहार में अगर शिक्षा की स्थिति नहीं सुधरेगी तो उससे जुड़े हर वर्ग को परेशानी होगी. इसलिए शिक्षकों की स्थिति खराब है.
यह भी पढ़ें: बिहार में हालात बिगड़े? गंगा की स्थिति देखने खुद निकले नीतीश कुमार






















