Mahagathbandhan Meeting: कांग्रेस मजबूर… तेजस्वी यादव मजबूत! महागठबंधन की पहली बैठक के मायने समझें
Mahagathbandhan Meeting: वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण कुमार पांडेय कहते हैं कि कांग्रेस मानने लगी है कि बिहार की सत्ता में रहना है तो आरजेडी के बगैर कोई वजूद नहीं है. पढ़िए और क्या कहा है.

Bihar Politics: 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पूरी ताकत दिखाने में लगी है. चार महीने में तीन बार राहुल गांधी बिहार का दौरा भी कर चुके हैं. कांग्रेस के बिहार प्रभारी के साथ प्रदेश अध्यक्ष को भी बदल दिया गया. इन सब के बावजूद क्या बिहार में कांग्रेस कुछ बेहतर कर पाएगी या आरजेडी के सामने अभी भी मजबूर है? चुनाव से पहले गुरुवार (18 अप्रैल) को महागठबंधन की हुई पहली बैठक से क्या कुछ समझ आ रहा है?
बैठक में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अलावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार के साथ वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और वाम दल के सभी नेता शामिल हुए. सर्वसम्मति से निर्णय लेकर को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई गई. इसका अध्यक्ष तेजस्वी यादव को बनाया गया. सीटों का बंटवारा, कैंपेन की रणनीति, कॉमन मिनिमम प्रोग्राम, घोषणा पत्र कंबाइंड बनाना, जिलास्तर और प्रखंड स्तर पर को-आर्डिनेशन, यह सब तेजस्वी यादव तय करेंगे. हालांकि मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा इस पर अभी सस्पेंस है. आखिर इस पर पत्ता क्यों नहीं खुला? बैठक से क्या लग रहा है? इसे वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण कुमार पांडेय से समझिए.
'कांग्रेस आरजेडी के सामने मजबूर'
अरुण पांडेय कहते हैं कि निश्चित तौर पर कांग्रेस यह मानने लगी है कि अगर बिहार की सत्ता में रहना है तो आरजेडी के बगैर कोई वजूद नहीं है. शुरू में कांग्रेस ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की लेकिन जिस तरीके से तेजस्वी यादव को चुनाव की सारी जिम्मेदारी मिली है उससे यह साफ हो गया है कि खुले तौर पर मुख्यमंत्री का चेहरा महागठबंधन का तेजस्वी यादव ही हैं. महागठबंधन की सभी पार्टियों ने (कांग्रेस भी) भी स्वीकार कर लिया है. कल (गुरुवार) के कार्यक्रम से यह दिखने लगा है कि कांग्रेस आरजेडी के सामने मजबूर है.
'कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है नुकसान'
अरुण पांडेय ने कहा कि अभी चुनाव में वक्त है और जिस तरीके से कांग्रेस बिहार में आरजेडी के सामने मजबूर हुई है और अपना सब कुछ तेजस्वी यादव के हवाले किया है उससे उसे काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है. कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में इसको लेकर रोष भी देखने को मिलेगा. आगे कहा कि जिस तरह से संवाददाता सम्मेलन हुआ और उसमें तेजस्वी के बगल में एक तरफ कांग्रेस प्रभारी थे तो दूसरी तरफ मुकेश सहनी थे जिनकी कुर्सी भी तेजस्वी यादव की तरह ही थी यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि वीआईपी प्रमुख का महागठबंधन में बड़ा कद है. सब कुछ कांग्रेस को दिखाया जा रहा है. निश्चित तौर पर मुकेश सहनी को अच्छी सीट भी देनी पड़ेगी तो इसकी कटौती कांग्रेस से होगी.
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