पटना के कोचिंग संस्थानों में एकलव्य वाली नजारा गायब, कोचिंग एसोसिएशन सचिव ने सरकार को कहा दोषी
Patna Coaching Files: कोचिंग एसोसिएशन के सचिव सुधीर कुमार सिंह ने कोचिंग संस्थानों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पहले छात्र-शिक्षक के बीच द्रोण-एकलव्य वाला संबंध गायब हो गया है.

पटना के कोचिंग संस्थानों में एक समय द्रोण-एकलव्य वाला संबंध हुआ करता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है. कोचिंग एसोसिएशन भारत के सचिव और पुराने प्रतियोगी परीक्षा शिक्षक सुधीर कुमार सिंह ने एबीपी न्यूज़ को विशेष बातचीत में यह जानकारी दी.
सुधीर सिंह ने कहा कि वर्ष 2000 में उन्होंने पटना में अपना कोचिंग संस्थान शुरू किया था. उस समय छात्र शिक्षकों का पैर छूकर सम्मान देते थे, लेकिन अब वह नजारा गायब हो गया है. उन्होंने बताया कि पटना में 1250 रजिस्टर्ड कोचिंग संस्थान हैं, जबकि रजिस्टर्ड व अनरजिस्टर्ड को जोड़ दें तो संख्या 3000 के करीब पहुंच जाती है.
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सरकार पर साधा निशाना
सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि पटना एक समय कोटा को टक्कर दे रहा था, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण हम पीछे रह गए. 2016 में महागठबंधन सरकार के दौरान तेजस्वी यादव और उद्योग मंत्री समीर महासेथ से मुलाकात हुई थी. कोचिंग को इंडस्ट्री का दर्जा देकर एक जगह क्लस्टर बनाने का आश्वासन मिला था, लेकिन सरकार बदलने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया. उन्होंने कहा कि सरकार 18% GST तो लेती है, लेकिन कोचिंग संस्थानों को कोई सुविधा नहीं देती. अगर सरकार चाहती तो पटना कोचिंग हब बन सकता था और बिहार के छात्रों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
खुद को सबसे ऊपर मानते हैं खान सर
सुधीर सिंह ने स्पष्ट किया कि मशहूर शिक्षक खान सर कोचिंग एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं. उन्होंने संगठन में शामिल होने से इनकार कर दिया था. सुधीर सिंह ने कहा कि खान सर कभी सगीर अहमद जैसे वरिष्ठ शिक्षकों के शिष्य थे, लेकिन आज खुद को सबसे ऊपर मानते हैं. उन्होंने खान सर और रोशन आनंद के विवाद पर चिंता जताते हुए कहा कि 99% कोचिंग संस्थान और शिक्षक अच्छे हैं, लेकिन 1% की वजह से पूरी छवि खराब हो रही है. इस 1% को सुधारने की जिम्मेदारी भी सरकार की है.
कोचिंग क्लस्टर की मांग
सुधीर कुमार सिंह ने मांग की कि सरकार कोचिंग संस्थानों के लिए अलग जगह उपलब्ध कराए, जहां सभी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों. इससे अनावश्यक विवाद और भीड़भाड़ कम होगी. वर्तमान में सरकार सिर्फ लगाम लगाने की बात करती है, लेकिन विकास के लिए कुछ नहीं कर रही है.
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