पटना में Ph.D होल्डर्स का अनशनल खत्म, राज्यपाल से चर्चा के बाद बनी बात
पटना के गर्दनीबाग में 21 दिनों के बाद पीएचडी होल्डर्स का अनशन समाप्त हो गया है. इस दौरान राज्यपाल अता हसनैन के समक्ष छात्रों ने अपनी मांगे रखी हैं. इस बीच छात्रों की मांगों पर आश्वासन दिया गया है.

- पटना में पीएचडी छात्रों का 21 दिन का अनशन खत्म
- राज्यपाल से मिलकर छात्रों की मांगों पर बनी सहमति
- प्राध्यापक की उम्र, API गणना थीं मुख्य मांगें
बिहार के पटना के गर्दनीबाग में चल रहा 21 दिनों से पीएचडी होल्डर्स का अनशन अब खत्म हो गया है. छात्रों द्वारा राज्यपाल अता हसनैन से मुलाकात और बातचीत के बाद सहमति बनी है. इसके बाद छात्रों ने अनशन वापस लेने का ऐलान किया है. छात्रों की मांग थी कि सहायक प्राध्यापक के लिए अधिकतम उम्र 55 वर्ष रखी जाए. साथ ही सहायक प्राध्यापक बहाली के लिए लिखित परीक्षा ली जाये और वो ऑब्जेक्टिव टाइप हो.
इसके अलावा लिखित परीक्षा में जो उत्तीर्ण होते हैं, उनके API की गणना की जाएगी एवं लिखित परीक्षा के प्राप्तांक तथा API को जोड़कर समेकित मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी, जिसके आधार पर अंतर्वीक्षा के लिए आवश्यक निर्धारित संख्या में अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे. अंतर्वीक्षा में टीचिंग डेमो भी रखा जायेगा. राज्यपाल से बातचीत के बाद API की गणना के संबंध में निम्नलिखित मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया.
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प्रदर्शनकारी छात्रों ने उठाई मांग
छात्रों द्वारा मांग की गई थी कि API की गणना में मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट के प्राप्तांकों की गणना नहीं की जाएगी. नेट एवं JRF के अधिमानता को 11 तक रखा जा सकता है, लेकिन पीएच.डी. के अधिमानता 30 से कम नहीं किया जाए.
वहीं शोध प्रकाशन एवं अनुभव की गणना भी API के स्कोर में की जाएगी परन्तु शोध प्रकाशन एवं अनुभव को भलीभांति परिभाषित किया जायेगा ताकि इसमें किसी भी प्रकार का संशय न रहें एवं इसका कोई गलत फायदा नहीं उठा सके.
इन मांगों पर समिति करेगी चर्चा
अतिथि सहायक प्राध्यापकों को भी वर्तमान में बहाल हुए संविदा सहायक प्राध्यापकों की ही भांति न्यूनतम वेतनमान एवं उस पर महंगाई भत्ता दिया जाए. उनके नवीकरण की प्रक्रिया सभी विश्वविद्यालयों में एक समान रखी जाए. अतिथि सहायक प्राध्यापकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र तथा शोध पत्र एवं अनुभव की भली भांति जांच कर ली जाए.
तदोपरांत उन्हें 65 वर्षों तक कार्य करने का मौका दिया जाए. इसमें अनशनकारी छात्रों के इस सुझाव पर विचार किया गया कि अधिकतम उम्र सीमा को एक बार में नहीं घटाकर उसे धीरे-धीरे कम किया जाए एवं इस बीच सहायक प्राध्यापकों की बहाली नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष रिक्तियों के विरूद्ध किया जाए.
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