छात्र आंदोलन पर संग्राम जारी, मनोज झा बोले- ‘पहले स्वीकारोक्ति हो, फिर चर्चा’, BJP ने कहा- भाग गए...
Parliament Monsoon Session छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज मामले पर संसद में सियासत तेज है. RJD सांसद मनोज झा ने सवाल उठाए, वहीं BJP ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, विपक्ष भाग रहा है.

छात्रों के आंदोलन और लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर संसद में सियासी घमासान जारी है. विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है. इसी बीच आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा और बीजेपी सांसद जनार्दन सिग्रीवाल का बयान सामने आया है.
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद भवन में मौजूद होना और सदन की कार्यवाही में शामिल होना अलग-अलग बातें हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि चर्चा से पहले कुछ मुद्दों पर स्वीकारोक्ति होनी चाहिए.
मनोज झा ने पूछा कि पैलेट गन चलाने का निर्देश किसने दिया और लाठियों में कीलें किसके आदेश पर लगाई गईं. उन्होंने कहा कि अगर इन सवालों पर चर्चा नहीं होगी तो सिर्फ भाषण सुनने के लिए लोग सदन में नहीं बैठे हैं. उन्होंने छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही की मांग की.
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बीजेपी बोली- सरकार चर्चा के लिए पहले दिन से तैयार
वहीं बीजेपी सांसद जनार्दन सिग्रीवाल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार और गृह मंत्री पहले दिन से ही चर्चा के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि सदन व्यवस्थित तरीके से चले तो सरकार चर्चा के लिए तैयार है और चर्चा के बाद जवाब भी देगी.
‘विपक्ष चर्चा से भाग रहा है’
जनार्दन सिग्रीवाल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन में चर्चा नहीं होने देना चाहता. उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ हंगामा कर रहा है और छात्रों व युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है. बीजेपी सांसद ने दावा किया कि छात्र और युवा अब विपक्ष की राजनीति को समझ चुके हैं.
संसद में गतिरोध जारी
छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है. विपक्ष सरकार से कार्रवाई और जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है और सदन में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो पाती है या नहीं.
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