'चुनाव आयोग अलादीन का चिराग है क्या?', आर-पार पर उतरे पप्पू यादव, पवन खेड़ा बोले- 'नाम काटना ही है तो…'
Bihar Voter List Revision: पवन खेड़ा ने कहा कि 2003 में बिहार में जब पुनरीक्षण हुआ था तब एक साल की समय लगा था. इस देश में किसी एक संस्था की दादागिरी नहीं चल सकती.

Bihar Voter List Revision: बिहार में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' को लेकर विवाद जारी है. शुक्रवार (04 जुलाई, 2025) को पटना में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भड़क गए. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि चुनाव आयोग भगवान है क्या? अलादीन का चिराग है क्या? उन्होंने कहा कि आर-पार की लड़ाई होगी. बिहार और बिहारियों की अस्मिता के लिए, गरीबों के अधिकार के लिए जान भी देना पड़ेगा तो देंगे.
उधर दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची के "विशेष गहन पुनरीक्षण" पर कहा, "जब आपको (मतदाताओं के) नाम काटने ही हैं तो आसानी से काट लेंगे, उसमें क्या है? काम मुश्किल तब होगा जब आपकी नीयत साफ होगी."
'किसी एक संस्था की दादागिरी नहीं चल सकती'
उन्होंने कहा, "2003 में बिहार में जब यही पुनरीक्षण हुआ था तब एक साल की समय लगा था... अब आप केवल 25 दिनों में इस प्रक्रिया को पूर्ण कर लेंगे? तो आपकी नीयत तो यही है कि केवल नाम काटने हैं, कागजों की जांच नहीं करनी और आपको तो मालूम ही है कि किस वर्ग के नाम काटने हैं... हमारे पास तमाम विकल्प सड़क से लेकर संसद तक खुले हैं और इस देश में किसी एक संस्था की दादागिरी नहीं चल सकती."
Patna, Bihar: Purnia MP Pappu Yadav says, "Is the Election Commission God or Aladdin’s magic lamp? This will be a decisive battle. And if we have to sacrifice our lives for Bihar and the dignity of its people, we will do so for the rights of the poor" pic.twitter.com/7rmP68yDf7
— IANS (@ians_india) July 4, 2025
क्या कह रही नीतीश कुमार की पार्टी?
इस पूरे मसले पर जारी विवाद को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी भी प्रतिक्रिया दे रही है. जेडीयू नेता नीरज कुमार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एक बयान पर कहा, "मतदाता पुनरीक्षण का कार्य चुनाव आयोग का है और हमारी उम्मीद चुनाव आयोग से केवल और केवल इतनी है कि कोई भी व्यक्ति जिसे भारत के संविधान के तहत मतदान करने का अधिकार प्राप्त है, वह छूटे नहीं... जिसमें भी पात्रता है, वह वोट देने का अधिकारी है तो उन्हें यह अधिकार मिलना चाहिए. इसके लिए जो भी आवश्यक शर्ते हैं उनका भी अवलोकन किया जाना चाहिए."
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Source: IOCL





















