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Analysis: CM सम्राट ने अपनी जाति के दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाई, भूमिहार नेता की बलि ली?

Deepak Prakash News: दीपक प्रकाश के दोनों कार्यकाल को जोड़ दें तो बिना किसी सदन का सदस्य बने वो करीब 7 महीने से मंत्री हैं. तकनीकी पहलुओं को अलग रखें तो कुल मिलाकर डेड लाइन वो क्रॉस कर चुके हैं. 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रतिष्ठा बचाने के लिए भूमिहार जाति के लोग 'संकट मोचक' बनकर सामने आ रहे हैं. अभी कल (30 जुलाई) ही जब बांकीपुर के उपचुनाव में वोटिंग के बाद लोग विश्लेषण करने बैठे तो ये बात सामने आई कि सीपी ठाकुर, विवेक ठाकुर और बाकी भूमिहार नेताओं के प्रभाव की वजह से भूमिहार वोटर प्रशांत किशोर की तरफ नहीं झुका. 

गुरुवार (30 जुलाई) को ही सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश के केस में सरकार को फटकार लगाई थी. माना जा रहा था कि बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का देर सवेर इस्तीफा होगा. लेकिन आज (31 जुलाई) अचानक से भूमिहार समाज के नेता और बीजेपी के MLC देवेश कुमार के इस्तीफे की खबर आ गई.

SC के आदेश से पहले सरकार बचाव का रास्ता खोज लेगी!

कहा जा रहा है कि देवेश कुमार की सीट पर अब राज्यपाल दीपक प्रकाश को नॉमिनेट करेंगे और इस तरह से सुप्रीम कोर्ट के किसी आदेश से पहले सरकार बचाव का रास्ता खोज लेगी. सवाल तो ये है कि अगर कोर्ट नहीं कहता तो क्या बिना किसी सदन के सदस्य रहते हुए दीपक प्रकाश मंत्री पद पर बने रहते? 

पिछले साल नवंबर में पहली बार मंत्री बने थे दीपक प्रकाश

बीते साल नवंबर महीने में नीतीश कुमार ने जब सीएम पद की शपथ ली थी तब दीपक प्रकाश पहली बार बिना किसी सदन के सदस्य रहते हुए मंत्री बने थे. शपथ ग्रहण के दिन ही उनका नाम सामने आया था. माना जा रहा था कि बीजेपी उन्हें किसी खाली सीट से MLC बनाएगी. इस बीच नीतीश का इस्तीफा हुआ और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अप्रैल में नई सरकार बन गई. 

दोनों कार्यकाल जोड़कर 7 महीने से मंत्री हैं दीपक प्रकाश

करीब 4 महीने बिना सदस्य रहे पहले कार्यकाल में दीपक प्रकाश मंत्री रहे. कायदे से अगली शपथ से उन्हें निर्वाचित या मनोनीत हो जाना चाहिए था. लेकिन बीजेपी और उनकी खुद की पार्टी ने रिस्क लिया और मई में जब सम्राट सरकार का विस्तार हुआ तो उनको दोबारा शपथ दिलाई गई. दोनों कार्यकाल को जोड़ दें तो बिना किसी सदन का सदस्य बने वो करीब 7 महीने से मंत्री हैं. अलग अलग करेंगे तो दिन कम होगा. तकनीकी पहलुओं को अलग रखें तो कुल मिलाकर डेड लाइन वो क्रॉस कर चुके हैं. 

भूमिहार को ही बलि का बकरा क्यों बनाया गया?

सियासी इतिहास कहता है कि ये गलत परंपरा है. कोर्ट इस पर सख्त रुख दिखा सकता था. अगले महीने सुनवाई से पहले इसको दुरुस्त करने की प्रक्रिया है. अब सवाल ये है कि इसके लिए भूमिहार को ही बलि का बकरा क्यों बनाया गया? स्वजातीय नेता को सदन पहुंचाने के लिए सम्राट चौधरी ने भूमिहार की कुर्सी को कुर्बान क्यों किया? अभी दो महीने पहले ही 9 MLC भेजे गए थे, जिनमें एक भी भूमिहार नहीं था. 

दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाने के लिए देवेश का इस्तीफा?

क्या CM सम्राट चौधरी और बीजेपी ने इसलिए देवेश कुमार की कुर्सी ले ली क्योंकि इससे कुछ दिन पहले एक दूसरे भूमिहार अरविंद शर्मा को MLC बनाया गया था? कहानी जो भी हो, सच्चाई ये है कि सम्राट चौधरी ने अपनी जाति के दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाने के लिए बीजेपी के पुराने वफादार मिजोरम के प्रभारी देवेश कुमार की कुर्सी छीन ली.

कब तक था देवेश कुमार का कार्यकाल?

देवेश कुमार का कार्यकाल मार्च 2027 तक था. तब कौन जाएगा कौन नहीं ये बाद की बात है. अभी बीजेपी ने जो किया वो भले ही कानूनी तौर पर उसकी मदद कर दे, जमीनी तौर पर इसका मैसेज गलत जाएगा. ये काम बीजेपी ने ऐसे माहौल में किया है जब सदन में 'भूमिहार ब्राह्मण' लिखने को लेकर भूमिहार जाति के बीजेपी विधायकों ने सवाल उठाए थे और अपनी सरकार को घेरा था.

बांकीपुर: RJD का वोट भी प्रशांत किशोर को गया? BJP का खुलासा!

मनोज कुमार (मुकुल) इस वक्त abp न्यूज में बतौर एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. मनोज abp न्यूज के संपादकीय विभाग में बीते 17 सालों से जुड़े हैं. abp न्यूज पर 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' से लेकर 'कौन बनेगा प्रधानमंत्री' जैसे हिट शो मनोज के नेतृत्व में सफल रहे हैं. चुनाव मतलब abp न्यूज के लिए पर्दे के पीछे से काम करने वाले प्रमुख चेहरों में से इनका नाम लिया जाता है. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले इन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के हिंदी विभाग से मास मीडिया में PG डिप्लोमा का कोर्स किया है. मनोज बिहार की राजनीति पर लगातार लिखते रहे हैं. उत्तर भारत खासकर हिंदी क्षेत्र की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखते हैं. साल 2015, 2020 के बिहार चुनाव, 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मनोज के लिखे लेख काफी चर्चित रहे हैं. 2020 के बिहार चुनाव नतीजों का इनका अनुमान सटीक रहा था. मनोज राजनीति, चुनाव विश्लेषण, समाज, ग्रामीण समस्या जैसे संजीदा मसलों के हल में रूचि रखते हैं और इन मुद्दों पर लगातार लिखते रहते हैं.
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