बिहार में व्हेल मछली वाले पोस्टर से सियासी तूफान, जानें क्या है मामला?
पटना में RJD कार्यालय के बाहर नेता पिंटू राम ने ‘कोटे में कोटा’ लागू करने की मांग वाला पोस्टर लगाया. उन्होंने SC उप-वर्गीकरण पर बिहार सरकार और तेजस्वी यादव की भूमिका पर सवाल उठाए.

बिहार में अनुसूचित जाति के भीतर उप-वर्गीकरण यानी ‘कोटे में कोटा’ को लेकर सियासत तेज हो गई है. आरजेडी प्रदेश कार्यालय के बाहर पार्टी नेता पिंटू राम ने पोस्टर लगाकर बिहार सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग की है. पोस्टर के जरिए उन्होंने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी. इस फैसले के तहत राज्यों को अनुसूचित जाति के आरक्षण में जरूरतमंद और अपेक्षाकृत पिछड़े समूहों के लिए अलग प्राथमिकता देने का रास्ता खुला है. इसी फैसले को आधार बनाकर पिंटू राम ने बिहार सरकार से इसे जल्द लागू करने की मांग की है.
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पोस्टर में ‘व्हेल मछली’ का इस्तेमाल
आरजेडी कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर में चार बड़ी व्हेल मछलियों का चित्र बनाया गया है. पोस्टर में दावा किया गया है कि कुछ अपेक्षाकृत संपन्न दलित समूह अन्य 18 पिछड़ी दलित जातियों के आरक्षण का हिस्सा ले रहे हैं. हालांकि, पोस्टर में लगाए गए आरोप नेता पिंटू राम के राजनीतिक दावे हैं.
पासवान, पासी, धोबी और रविदास का जिक्र
पोस्टर में पहली व्हेल को पासवान समुदाय से जोड़ते हुए मेहतर, भंगी, डोम, लालबेगी और हलालखोर जैसी जातियों के अधिकार पर सवाल उठाया गया है. दूसरी व्हेल के जरिए पासी, तीसरी के जरिए धोबी और चौथी के जरिए रविदास समुदाय का उल्लेख किया गया है. पोस्टर का उद्देश्य अनुसूचित जाति के भीतर आरक्षण के लाभ के असमान वितरण का मुद्दा उठाना है.
बिहार में जल्द लागू करने की मांग
राजद नेता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के उप-वर्गीकरण संबंधी फैसले को बिहार में जल्द लागू किया जाए, ताकि जिन 18 दलित जातियों को वह पिछड़ा बता रहे हैं, उन्हें आरक्षण का अधिक लाभ मिल सके. आरजेडी कार्यालय के बाहर लगाए गए इस पोस्टर ने पार्टी के भीतर और बिहार की राजनीति में आरक्षण के मुद्दे को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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