तलाकशुदा महिलाओं को 25 हजार रुपये दे रही नीतीश कुमार की सरकार, कैसे उठाएं योजना का लाभ?
Nitish Kumar News: बिहार में नीतीश कुमार की सरकार की ओर से अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहायता योजना चलाई जा रही है.

Bihar News: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA की सरकार विकास के काम करने का दावा करती है. राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विकास के लिए अलग-अलग स्तरों पर कार्य किये जाने की बात कही जाती रही है. सरकार महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है.
इसी कड़ी में नीतीश कुमार की सरकार की ओर से अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से सहायता योजना चलाई जा रही है, ताकि ऐसी महिलाएं सरकार की आर्थिक मदद से अपना जीवनयापन कर सकें.
लाभुकों के खाते में सीधे ट्रांसफर होते हैं पैसे
परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के माध्यम से पहले 10 हजार रुपये दिए जाते थे लेकिन वित्तीय वर्ष 2017-18 ये राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है, जिसे राज्य अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी द्वारा लाभुकों के खाते में सीधे ट्रांसफर कर दी जाती है.
योजना का लाभ के लिए तलाकशुदा महिलाएं कैसे करें आवेदन?
इस वित्तीय मदद से तलाकशुदा महिलाएं जीवनयापन के लिए कोई रोजगार कर सकती हैं. यह राशि लाभार्थी को एक बार में मदद के तौर पर दी जाती है. इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को प्रमाणपत्र के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होता है. कोई धोखाधड़ी कर योजना का लाभ न ले ले इसके लिए निर्धारित मानदंड बनाए गए हैं. इसमें कोई कमी या अनियमितता पायी जाएगी तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.
योजना का लाभ लेने के लिए क्या हैं मापदंड?
जिन महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जाता है, उनके लिए सरकार की ओर से कुछ पैमाने बनाए गए हैं. परित्यक्ता मुस्लिम महिलाएं जो शादीशुदा हैं लेकिन दो साल या उससे अधिक समय से उनके पति ने उन्हें छोड़ दिया है उनके लिए सहायता प्रदान की जाती है. पति पूर्ण रूप से मानसिक रूप से असंतुलित हो, परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो, ऐसी स्थिति में पत्नी को इस योजना के तहत परित्यक्ता मानकर सरकार द्वारा उन्हें जीवनयापन के लिए लाभ पहुंचाया जाता है ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें.
सभी जरूरत के कागजात के साथ सारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आवेदन को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के दफ्तर में जमा करना होता है. आम तौर पर देखा जाता है कि तलाकशुदा महिलाएं बेसहारा हो जाती हैं. उनके लिए अपने मायके में भी अपना भरण-पोषण मुश्किल हो जाता है. इसी तरह जिन महिलाओं के पति उन्हें भरण-पोषण का खर्च नहीं देते या जिनके पति मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होते हैं और अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में असमर्थ होते हैं. ऐसे में यह योजना ऐसी असहाय महिलाओं के लिए वरदान की तरह है.
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