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Bihar News: बिसराए जा रहे आजाद हिन्द फौज के सेनानी आनंद मोहन सहाय की स्मृतियां, जीर्णोद्धार के लिए शिक्षा तक लगाई गुहार

पुरानीसराय ग्राम में 10 सितंबर 1898 में लालमोहन सहाय के घर में आनंद मोहन का जन्म हुआ. जिन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही अपनी मातृभूमि को गुलामी की जंजीर से मुक्त कराने का बेड़ा उठा लिया.

भागलपुर: एक ओर जहां देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. वहीं, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के जनरल सेक्रेटरी और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के सचिव रहे आनंद मोहन सहाय की स्मृतियों को भूलाया जा रहा है. भागलपुर के लोगों की मांग है कि आनंद मोहन सहाय की एकमात्र निशानी के रूप में उनके द्वारा स्थापित बालिका उच्च विद्यालय को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल कर इसका जीर्णोद्धार किया जाए.

भागलपुर जिले के नाथनगर थाना के पुरानीसराय ग्राम में 10 सितंबर 1898 में लालमोहन सहाय के घर में आनंद मोहन सहाय का जन्म हुआ. बचपन से ही सहाय के दिल में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नफरत थी. सन 1916 में जब वे टीएनजे कॉलेजिएट हाई स्कूल के छात्र थे तो अपने कक्षा में ईसाई शिक्षक के समक्ष वन्दे मातरम की आवाज लगायी. इस वजह से उन्हें कक्षा में कड़ा दंड दिया गया. स्कूली शिक्षा के दौरान ही वे ढाका के क्रांतिकारी संगठन 'अनुशीलन समिति' के संपर्क में आये एवं क्रांतिकारी गतिविधि में भाग लेना आरंभ किया.

आनंद मोहन सहाय एक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही अपनी मातृभूमि को गुलामी की जंजीर से मुक्त कराने के लिये विदेश चल पड़े एवं जापान सहित अन्य दक्षिण-पूर्व एशियायी एवं निकटवर्ती यूरोपीय देशों में रह रहे भारतीयों को वतन की आजादी के लिये संगठित किया जो आगे चलकर आजाद हिन्द फौज के निर्माण का आधार बना. महात्मा गांधी के आह्वान पर 1920 में अपनी डॉक्टरी पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े. महात्मा गाधी एवं डॉ राजेन्द्र प्रसाद के संरक्षण में असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की. 1921 से 1923 तक डॉ राजेन्द्र प्रसाद के निजी सचिव रहे और उनके तथा महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन के पक्ष में जनमत तैयार करने के लिये देशव्यापी दौरा किया.

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विदेश सेवा छोड़कर लड़कियों को शिक्षित करने में जुट गए

1947 में देश आजाद हुआ और स्वदेशी सरकार बनी तो सहाय को विदेश सेवा में शामिल कर लिया गया. इस दौरान वे वेस्टइंडीज, मारीशस आदि देशों में रहे. 1960 की पहली जनवरी को उन्होंने स्वेच्छा से विदेश सेवा से त्यागपत्र दे दिया. इसके बाद लड़कियों को शिक्षित करने में जुट गए. नाथनगर बालिका उच्चविद्यालय और सुंदरवती महिला कॉलेज उनकी सेवा के उदाहरण हैं. क्षेत्र के सामाजिक काय्रकर्ता देवाशीष बनर्जी कहते हैं कि नाथनगर बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना 1959 में कर बालिका शिक्षा की परिकल्पना को साकार किया. उस दौर में 10 किलोमीटर के दायरे में एक भी हाई स्कूल लड़कियों के लिए नहीं था. आज इस विद्यालय के स्थापना के 61 साल बाद भी स्थिति वही है.

स्कूल में आज भी उतने ही कमरे हैं, जितना सहाय बना कर गए थे

उन्होंने बताया कि नाथनगर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों के लिए कोई स्कूल नहीं होने की वजह से इस स्कूल पर दबाव बढ़ रहा है. आलम यह है कि आज भी उतने ही कमरे हैं, जितना सहाय बना कर गए थे. मौजूदा समय में छात्राओं की संख्या काफी बढ़ी है. देवाशीष बनर्जी बताते हैं कि 3500 छात्राओं की संख्यावाले इस स्कूल में 12 कमरे हैं. इनमें दो कमरे का इस्तेमाल कार्यालय और शिक्षक कक्ष के रूप में हो रहा है. उर्दू पढ़नेवाली छात्राओं की संख्या 1000 से अधिक है, पर उर्दू की शिक्षिकाएं नहीं है. विद्यालय को बारहवीं का दर्जा तो हासिल है, लेकिन गणित, हिन्दी, भूगोल, समाजशास्त्र सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की शिक्षिकाएं नहीं हैं. एक हॉस्टल तो बना है, लेकिन घेराबंदी नहीं हुई है. नाईट गार्ड नहीं है. इसके कारण हास्टल चालू नहीं हुआ है. विद्यालय में पुस्तकालय, रंगमंच तक नहीं है.

काफी प्रयासों के बाद स्थापित हुई प्रतिमा

नेताजी यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र सोपाल बताते हैं कि काफी प्रयासों के परिणामस्वरूप विद्यालय में आनंद मोहन सहाय की प्रतिमा स्थापित की गयी है. भागलपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि इस स्कूल को इस योजना में शामिल किया जाएगा, पर ऐसा नहीं हुआ. जबकि यह स्कूल नगर निगम क्षेत्र में है. इस क्षेत्र में पले बढ़े पत्रकार प्रसून लतांत का कहना है कि आजादी के अमृत महोत्सव पर सरकार को सर्वप्रथम इस स्कूल के नाम के साथ आनंद मोहन सहाय का नाम जोड़कर नामाकरण कर उन्हें सम्मान देना चाहिए.

इसी स्लूक की पढ़ी हैं उपमुख्यमंत्री की पत्नी

फेडरेशन के अध्यक्ष सोपाल शैलेन्द्र कहते हैं कि इस विद्यालय की उपलब्धियों पर इस क्षेत्र के लोगों को गर्व है. बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद की पत्नी भी यहां छात्रा रहीं है. उपमुख्यमंत्री के पास नगर विकास विभाग भी है। इस नाते हमलोग दो बार उपमुख्यमंत्री से मिल चुके हैं. उनकी ओर से महज आश्वासन मिला है. भाजपा से विधान पार्षद डॉ एन के यादव, पूर्व सासंद सुबोध राय अपनी अनुशंसा उपमुख्यमंत्री को कर चुके हैं. उन्होनें भागलपुर के आयुक्त दयानिधान पांडेय और नगर निगम मेयर का दरबाजा खटखटाया है. शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य मुद्दों को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी से पटना जाकर मिल चुके हैं. सब तरफ से सिर्फ आश्वासन मिला है, लेकिन आश्वासन सरजमी पर नहीं उतरा है.

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