'दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे', फिल्म का ये डायलॉग हकीकत बन गया, बाढ़ भी नहीं रोक पाई बारात
मनिहारी में गंगा नदी उफान पर है. रोजाना लोग जान हथेली पर लेकर नाव पर सफर करते दिखाई देते हैं. गंगा मैया के आशीर्वाद से ये नई जोड़ी भी तट तक पहुंच गई.

'दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे…', फिल्म के इस डायलॉग को भागलपुर के एक परिवार ने हकीकत बना दिया, जहां गंगा की उफनती लहरों को चीरते हुए दूल्हे राजा देवमुनी अपनी दुल्हन वंदना कुमारी को ब्याह कर ले आए. बाढ़ के बीच नाव से ही बारात मनिहारी गई और फिर वो नाव सेही अपनी दुल्हन को लेकर भागलपुर लौटे.
सज-धजकर नाव से उतरी बारात
दरअसल भागलपुर और कटिहार जिले में बाढ़ से हालात बेकाबू हैं. रास्ते जलमग्न और सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन देवमुनी ने हार नहीं मानी. पैदल चले, ई-रिक्शा लिया और फिर नाव से जान हथेली पर रखकर गंगा पार किया. गांव वालों की आंखें तब भर आईं, जब तेज लहरों के बीच सज-धजकर बारात नाव से उतरी.
मनिहारी के चौधरी टोला में जब ढोल-नगाड़ों और तालियों के बीच देवमुनी ने सात फेरे लिए, तो हर किसी ने कहा, "ये कोई आम शादी नहीं, ये हिम्मत और मोहब्बत की मिसाल है. बाढ़ में भी रुकी नहीं ये बारात, क्योंकि असली दिलवाले कभी हार नहीं मानते."
देवमुनी की ये शादी साबित करती है कि जब इरादा सच्चा हो, तो नाव भी डोली बन जाती है. शादी के बाद बारात नाव से भागलपुर पहुंची और दहेज का सारा सामान भी नाव से ही लाया गया. दूल्हे ने दुल्हन का हाथ पकड़ कर नाव से नीचे उतारा और स्वागत में खड़े लोग इस शादी की वाहवाही करते नजर आए.
मनिहारी में उफान पर है गंगा नदी
बता दें कि मनिहारी के गंगा में जहां नदी उफान पर है, वहां रोजाना लोग जान हथेली पर लेकर नाव पर सफर करते दिखाई देते हैं. बहरहाल यह नई जोड़ी गंगा मैया के आशीर्वाद से तट तक पहुंच गई, लेकिन बाकी लोग रोज ऐसे खतरनाक रूप से गंगा पार करने पर मजबूर हैं. ऐसे में जिला प्रशासन को सुरक्षा मुहैय्या कराने और नाव इस खतरनाक उफान में नाव पर भी रोक लगाने की जरूरत है.
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Source: IOCL





















