Bihar Elections: पटना की दीघा विधानसभा सीट पर NDA के कई दावेदार, BJP या JDU किसका पलड़ा होगा भारी, समझें समीकरण
Digha Assembly Seat: यह सीट पटना जिले का सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है. यहां 2025 में 4 लाख 85 हजार के करीब मतदाता है. यहां मुख्य रूप से अति पिछड़ा वोटर का दबदबा होता है.

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Elections) में अब 4 से 5 महीने शेष रह गए हैं. ऐसे में सभी पार्टियों की ओर से तमाम सीटों पर तैयारी जोर-शोर से की जा रही है. वर्तमान विधायक जहां अपनी सीट बचाने की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं विपक्ष उस सीट पर कब्जा जमाने की पूरी तैयारी में लगा है.
वर्तमान में बीजेपी के विधायक संजीव चौरसिया
पटना जिले में कुल 14 विधानसभा क्षेत्र है, उनमें से एक महत्वपूर्ण दीघा विधानसभा क्षेत्र है. यहां वर्तमान में बीजेपी के विधायक संजीव चौरसिया हैं. इस क्षेत्र में विपक्ष एनडीए का कीला उखाड़ने की तैयारी में है तो एनडीए में शामिल अन्य नेता भी वर्तमान विधायक की टिकट कटवाने की फिराक में जुटे हुए हैं और कहीं ना कहीं अंदर खाने में शह मात का खेल चल रहा है.
पटना जिले की दीघा विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. पहले यह सीट पटना पश्चिम के नाम से थी, जहां पर वर्तमान के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नितिन नवीन के पिता नवीन सिन्हा विधायक हुआ करते थे. काफी लंबे समय तक वह भी यहां के विधायक रहे हैं.
नए परिसीमन के बाद 2010 में इस सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव हुए और यह सीट जेडीयू के खाते में गई थी, लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस सीट को जेडीयू से छीन लिया था. 2015 के चुनाव में यहां से बीजेपी के संजीव चौरसिया ने जेडीयू के राजीव रंजन प्रसाद को 24,779 वोटों से हराया था. उस वक्त महागठबंधन के साथ थे.
इसके बाद 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी के साथ थे और एनडीए में यह सीट बीजेपी के पास रह गई और दूसरी बार संजीव चौरसिया यहां से विधायक बने. 2020 में महागठबंधन से सीपीआईएमएल प्रत्याशी शशि कुमार को करीब 49000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था.
अब 2025 में क्या होगा? क्या संजीव चौरसिया का तीसरी बार टिकट बरकरार रहेगा. क्योंकि इस बार जेडीयू के कई नेता इस सीट पर दावा कर रहे हैं और उनका कहना है कि यह जेडीयू की परंपरागत सीट रही है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम के दम पर हम लोग यहां से चुनाव लड़ेंगे.
एनडीए में यह सीट जेडीयू के खाते में जाती है या बीजेपी के खाते में. इसकी चर्चा करने से पहले जान लें कि यह सीट पटना जिले का सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है. यहां 2025 में 4 लाख 85 हजार के करीब मतदाता है. जातीय समीकरण की बात करें तो इस विधानसभा सीट पर यादव, राजपूत, कोइरी, भूमिहार, ब्राह्मण, कायस्थ, कुर्मी और वैश्य निर्णायक भूमिका में हैं. सबसे अधिक 50 के करीब यहां यादव हैं तो मुस्लिम वोटर भी 25000 के करीब है.
अन्य निर्णायक रहने वाली जातियों का वोट 30 से 40 हजार के करीब है. यहां मुख्य रूप से अति पिछड़ा वोटर का दबदबा होता है, लेकिन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत है कि महिला वोटर एग्रेसिव होकर वोट करती हैं. पुरुष और महिला के मतदान में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता है और यही वजह है कि लगातार एनडीए इस पर कब्जा जमाता रहा है.
इस सीट पर जेडीयू नेता बिट्टू सिंह लगातार तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने दावा किया है कि यह सीट जेडीयू के खाते में जाएगी. क्योंकि यह जेडीयू की परंपरागत सीट रही है. सबसे पहले नया परिसीमन हुआ था तो जेडीयू के खाते में यह सीट गई थी और हम लोग मुख्यमंत्री की कुमार के काम पर चुनाव लड़ेंगे. वह क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क अभियान कर रहे हैं और अपना दबदबा बन रहे हैं. हालांकि जेडीयू की ओर से इस पर किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
तो वहीं वर्तमान विधायक संजीव चौरसिया 2025 में जीत के साथ-साथ टिकट के लिए भी आश्वस्त हैं. उन्होंने एबीपी न्यूज से बात करते हुए कहा कि यह सीट शुरू दौर से बीजेपी की रही है. नए परिसीमन में जेडीयू को यह सीट दी गई थी क्योंकि पूनम देवी का पहचान इस क्षेत्र में अच्छा था, लेकिन 2015 में जब जेडीयू अलग हुई तो बीजेपी ने हमें मौका दिया. हम इस क्षेत्र के स्थानीय हैं और 2015 से लेकर अब तक अभूतपूर्व काम हमने क्षेत्र में किया है. पहले इस क्षेत्र में चलना मुश्किल होता था. कई नालों पर सड़क का निर्माण किया गया है जो कल्पना से ऊपर है. हमने राजीव नगर, नेपाली नगर और दीघा की 1024 एकड़ भूमि के लिए स्थाई समाधान निकाला.
दीघा सीट मिलने की संजीव चौरसिया को उम्मीद
राजीव नगर से अटल पथ होते हुए कुर्जी पुल तक नाला पाटकर फोरलेन सड़क का निर्माण करवा रहे हैं, जो 181 करोड़ की लागत से बनने वाली है. बाबा चौक से आनंदपुरी होते हुए राजा पुल तक नाला पाट कर फोरलेन सड़क बनवाने का काम शुरू हो चुका है, जो 105 करोड़ की लागत से बनेगा. तो बड़े-बड़े काम हमने किए हैं, जो जनता देख रही है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग टिकट के फिराक में है, लेकिन यह तय हमारा केंद्रीय नेतृत्व करता है. एनडीए में कोई फुट नहीं है. जेडीयू और बीजेपी मिलकर सब कुछ तय कर लेगी. लेकिन यह सीट बीजेपी की है और हमें ऐसी उम्मीद नहीं है कि यह सीट जेडीयू के खाते में जाएगी.
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Source: IOCL





















