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बिहार चुनाव : बड़हरिया में कृषि, पलायन और रोजगार के मुद्दे प्रमुख, समझें समीकरण

Bihar Election : बड़हरिया में कृषि, पलायन और रोजगार प्रमुख मुद्दे हैं. विधानसभा क्षेत्र में खेती संकट, बेरोजगारी और विकास की धीमी रफ्तार पर मतदाता नाराज है. इस बार का चुनाव जन मुद्दों पर केंद्रित है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच सिवान जिले का बड़हरिया विधानसभा क्षेत्र इस बार भी सुर्खियों में है. गंडक नदी की सहायक नदियों से सिंचित यह इलाका पूरी तरह कृषि प्रधान है, जहां खेती और पलायन दोनों ही राजनीति के केंद्र में हैं. बड़हरिया और पचरुखी प्रखंडों के 23 ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना यह क्षेत्र बिहार की राजनीति में हमेशा से खास अहमियत रखता रहा है.

गंगा के उपजाऊ मैदानों में फैले बड़हरिया में धान, गेहूं और दलहन की खेती मुख्य स्रोत है, लेकिन सिंचाई और बाजार की सीमित सुविधाओं ने किसानों को मुश्किल में डाल रखा है. रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में युवा दिल्ली, पंजाब, गुजरात और मुंबई जैसे राज्यों में पलायन कर चुके हैं. यहां के ग्रामीणों का कहना है कि सरकारें आईं और गईं, लेकिन खेती की लागत बढ़ी और आमदनी में कोई सुधार नहीं हुआ.

बड़हरिया में शिक्षा-स्वास्थ्य अब भी चुनौती

बड़हरिया विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी आधारभूत सुविधाओं में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा संस्थानों की भारी कमी महसूस की जाती है. बड़हरिया का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन सिवान में है, जो लगभग 15 किलोमीटर दूर है. वहीं पटना की दूरी करीब 145 किलोमीटर है, जिससे परिवहन और व्यापार पर भी असर पड़ता है.

बड़हरिया में किस दल का रहा सबसे ज्यादा वर्चस्व

जानकारी के अनुसार, 1951 में स्थापित बड़हरिया विधानसभा सीट पर शुरुआती दौर में कांग्रेस का वर्चस्व रहा. 1951 से 1957 तक पार्टी ने लगातार तीन जीत दर्ज की. इसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और जनसंघ ने भी यहां परचम लहराया. हालांकि 1972 के बाद यह सीट परिसीमन के कारण खत्म कर दी गई थी. 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद सीट को फिर से बहाल किया गया.

2010 और 2015 के चुनावों में जदयू ने जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने बाजी मार ली और जदयू को हार का सामना करना पड़ा.

क्या है जातीय और जनसांख्यिकीय समीकरण

चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, बड़हरिया की कुल जनसंख्या 5.29 लाख है जिनमें 3.15 लाख मतदाता शामिल हैं. यादव, पासवान, कुर्मी, राजभर, सवर्ण और मुस्लिम समुदाय यहां की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

इस बार भी बड़हरिया में मुकाबला कृषि संकट, पलायन और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ही टिका नजर आ रहा है. मतदाता उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाली सरकार सिर्फ वादे नहीं, समाधान लेकर आएगी.

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