Bihar Bhumi: बेतिया राज की संपत्ति को लेकर नीतीश सरकार की नई नीति, जानिए किसे मिलेगी बड़ी राहत
Bihar Land News: सरकार ने पहल करते हुए "बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली, 2026" का प्रारूप तैयार किया है. अधिसूचना जारी होने के बाद संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.

बिहार सरकार ने बेतिया राज की संपत्तियों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, संरक्षण और निपटान के लिए नई नीति बनाई है. नई नियमावली से बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, विधिक व्यवस्था और जनहित का संतुलन स्थापित होगा. राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों का बेहतर उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा.
सरकार ने पहल करते हुए "बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली, 2026" का प्रारूप तैयार किया है. इस संबंध में गुरुवार (09 अप्रैल, 2026) को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बेतिया राज की सभी चल एवं अचल संपत्तियां, जो बिहार राज्य के भीतर और राज्य के बाहर स्थित हैं, उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बिहार सरकार के नियंत्रण में लाया जाएगा.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नियमावली अधिनियम की धारा-17 के तहत तैयार की गई है. उन्होंने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी. इच्छुक पक्षकारों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया जाएगा. आपत्तियों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी होंगे, जिन्हें सिविल न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होंगी. वे अधिकतम 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे.
समाहर्ता लेंगे संपत्तियों का प्रभावी कब्जा
विजय सिन्हा ने कहा, "यदि निर्धारित समय में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है या आपत्तियां खारिज हो जाती हैं, तो समाहर्ता संबंधित संपत्तियों का प्रभावी कब्जा लेने की कार्रवाई करेंगे. नियमावली में लंबे समय से रह रहे वैध अधिभोगियों को राहत देते हुए पूर्ण स्वामित्व में रूपांतरण का प्रावधान किया गया है. इसके लिए 40 वर्ष से प्रभावी कब्जे को मानक माना गया है. 01 जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित की गई है."
आगे कहा कि जो अधिभोगी इस तिथि से पूर्व से कब्जे में हैं और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, उन्हें निर्धारित राशि का भुगतान कर संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में परिवर्तित करने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा कि 01 जनवरी 1986 के बाद कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के भवन को कमांडियर किया जा सकेगा तथा उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
बताया कि जिन मामलों में कोई वैध दस्तावेज या दीर्घकालिक कब्जे का प्रमाण नहीं मिलेगा, उन्हें अनधिकृत अधिभोगी मानते हुए बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत बेदखली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
बिहार में बेतिया राज की भूमि के बारे में जानें (एकड़ में…)
- पश्चिम चंपारण: 16671.91
- पूर्वी चंपारण: 7640.91
- सारण: 109.96
- सीवान: 7.29
- गोपलगंज: 35.58
- पटना: 11.49
- कुलः 24477.14
Source: IOCL



























