बिहार: बंद कमरे में जली अंगीठी बनी जानलेवा, 12 साल के बच्चे की मौत, माता-पिता की हालत गंभीर
Bihar News: आरा के छोटकी सिंगही गांव में अंगीठी जलाकर सोने से 12 वर्षीय बच्चे की दम घुटने से मौत हो गई. इस हादसे में मां-पिता और बहन की हालत गंभीर बनी हुई है. सभी का अस्पताल में इलाज जारी है.

बिहार के आरा शहर के नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटकी सिंगही गांव में शनिवार रात (10 जनवरी) को कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे एक बच्चे की मौत हो गई. जबकि परिवार में मां, पिता और छोटी बहन की हालत नाजुक है. इसके बाद पुलिस की मदद से कमरे का दरवाजा तोड़कर सभी लोगों को इलाज के लिए आनन-फानन में सदर अस्पताल लाया गया. जहां डॉक्टरों की देखरेख में सभी का इलाज चल रहा है.
मृतक कृष्णगढ़ थाना क्षेत्र के घांघर गांव निवासी चंद्रभूषण सिंह उर्फ बंटी सिंह का 12 वर्षीय पुत्र बजरंगी सिंह है. जबकि बीमार लोगों में उसके पिता, मां पूजा सिंह और 9 वर्षीय बहन परिधि सिंह शामिल है. इसमें मां पूजा सिंह की हालत काफी गंभीर है जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया है. इधर, मृत बच्चे के पिता बंटी सिंह ने बताया कि वो अपने पूरे परिवार के साथ 27 दिसंबर को बागेश्वर धाम गए हुए थे. परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर काफी अच्छे से पूजा-पाठ भी की. बेटा बजरंगी धाम पर हर रोज 21 बार परिक्रमा भी करता था.
क्या है पूरा मामला?
पिता बंटी सिंह ने बताया कि पूजा-पाठ खत्म होने के बाद शनिवार (10 जनवरी) की दोपहर सभी लोग अपने घर आरा शहर के छोटकी सिंगही आ गए थे. इसके बाद ज्यादा ठंड होने के कारण शनिवार की शाम 7 किलो इमली का कोयला लेकर घर आए थे. घर में खाना खाने के बाद अंगीठी जलाकर सो गए. इसी बीच रात एक बजे के करीब मेरी बेटी परिधि ने कहा कि सीने में दर्द है. तभी पहले से चल रहे दवा को देने के बाद उसे सुला दिया. फिर पत्नी कहने लगी कि मेरे दोनों हाथों में काफी दर्द है. मैंने उसके हाथों को दबाया, लेकिन बेटी की तबीयत खराब हो रही थी. फिर रात में ही अपने एक मित्र को फोन कर गाड़ी मंगवाने की बात भी कही. इसके बाद मुझे होश नहीं आया.
पुलिस ने सभी को अस्पताल में कराया भर्ती
वहीं परिजनों ने बताया कि काफी देरी से हम लोग दरवाजे को खटखटाया, लेकिन अंदर से किसी की आवाज नहीं आने से हम लोगों ने नगर थाना पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजे को तोड़कर बाहर निकाला. कमरे में घुसते ही देखा कि सभी लोग सोए हुए है. काफी मशक्कत के बाद बंटी और उसकी बेटी परिधि की आंख खुली. इसके बाद बेटा बजरंगी और पत्नी पूजा समेत सभी लोगों को पुलिस की मदद से इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया.
बता दें कि इमली की आग के धुआं सामान्य धुएं की तरह नुकसानदेह होता है. जिससे आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. क्योंकि इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस होती हैं, जो दम घुटने और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे COPD और अस्थमा का कारण बन सकती हैं.
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Source: IOCL























