बांकीपुर के इन इलाकों ने बढ़ाई RJD, BJP और प्रशांत किशोर की मुश्किल? सबके सामने है ये चुनौती
बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के लिए अब सिर्फ पांच दिन बचे है. इस बीच सभी राजनीतिक दलों की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है.

बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के लिए अब सिर्फ पांच दिन बचे हैं. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है इस सीट की राजनीतिक लड़ाई 50 बूथों पर केंद्रित हो गई है. इन बूथों पर प्रत्येक में करीब 1,000 से 1,250 मतदाता हैं. यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के प्रत्याशी नीरज सिन्हा, महागठबंधन से राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता, और जनसुराज के प्रशांत कुमार ने इन बूथों पर अपनी पूरी ताकत लगा रही है. सभी की कोशिश है कि मतदान वाले दिन यहां बड़ी संख्या में वोटर्स पहुंचे.
बांकीपुर पूरी तरह शहरी सीट है और यहां मतदान प्रतिशत परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत कम रहता है. कई बड़े बूथों पर एक हजार से अधिक मतदाता होने के बावजूद मतदान 50 प्रतिशत से भी नीचे रहता है. अब जबकि यह उपचुनाव है ऐसे में मतदान और कम होने के आसार हैं.
बांकीपुर विधानसभा की चुनावी लड़ाई अब चार सबसे बड़े चुनावी क्षेत्रों पर सिमट गई है. इनमें कदमकुआं सबसे बड़ा क्षेत्र है, जहां 58 बूथों पर 50,780 मतदाता हैं. इसके बाद बोरिंग रोड-श्रीकृष्णपुरी-राजापुर में 56 बूथों पर करीब 50 हजार मतदाता, भंवर पोखर-दरियापुर-अशोक राजपथ में 44 बूथों पर 38,995 मतदाता और जक्कनपुर-पुरंदरपुर में 39 बूथों पर 34,005 मतदाता हैं. इन चार क्षेत्रों में ही करीब 1.75 लाख मतदाता रहते हैं, जो विधानसभा के कुल मतदाताओं का लगभग आधा हिस्सा हैं.
कम मतदान बना सबसे बड़ी चुनौती
बांकीपुर में कुल 422 बूथ हैं. 2 जुलाई को उपचुनाव की घोषणा हुई थी और 6 जुलाई को अधिसूचना जारी हुई. कई उम्मीदवारों ने 13 जुलाई को नामांकन के अंतिम दिन पर्चा दाखिल किया, जिससे प्रभावी चुनाव प्रचार के लिए केवल 15 दिन का समय मिला.
कम समय और शहरी मतदाताओं की उदासीनता को देखते हुए सभी प्रमुख दलों ने अपने संगठन, बूथ प्रबंधन और जनसंपर्क अभियान का सबसे बड़ा हिस्सा इन चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित कर दिया है. रणनीति साफ है-हर बूथ पर मतदान प्रतिशत बढ़ाना, समर्थकों को मतदान केंद्र तक लाना और अधिकतम अतिरिक्त वोट जुटाकर बढ़त हासिल करना.























