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Explained: FIFA 2026 में 3 मिनट रुककर पानी पीना गुनाह! क्यों वर्ल्ड कप में हाइड्रेशन ब्रेक पर बवाल, क्या पैसों का लालच?

Hydration Break FIFA: फीफा चीफ इन्फेंटिनो कहते हैं कि यह पैसे का मामला नहीं, लेकिन जब फॉक्स को हाइड्रेशन ब्रेक से उतना पैसा मिल रहा है, जितना उसने लगाया था, तो इन्फेंटिनो पर यकीन करना मुश्किल है.

फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने आप में एक नए जमाने की शुरुआत है. पहली बार 48 टीमें, 104 मैच और तीन देशों (अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको) में फैला यह टूर्नामेंट इतिहास रच रहा है. लेकिन इस बार एक और चीज ने सबका ध्यान खींचा है- हाइड्रेशन ब्रेक. पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के हर मैच में दो हाइड्रेशन ब्रेक अनिवार्य कर दिए गए हैं, चाहे मौसम कैसा भी हो और स्टेडियम अंदर का हो या बाहर का. हर ब्रेक 3 मिनट का है. पहला फर्स्ट हाफ के 22वें मिनट पर और दूसरा सेकेंड हाफ के 67वें मिनट पर. यानी हर मैच में 6 मिनट का एक्स्ट्रा समय जोड़ दिया गया है. यही 6 मिनट इस वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी बहस बन गए हैं...

हाइड्रेशन ब्रेक का नियम क्यों लाया गया?

फीफा का पहला मकसद खिलाड़ियों की सेहत है. नॉर्थ अमेरिका के कई शहरों में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है और 39 दिनों में 8 मैच तक खेलने वाली टीमों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डिहाइड्रेशन से होने वाली ऐंठन से बड़ा खतरा हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक है, जो जानलेवा हो सकता है.

फीफा चीफ जियानी इन्फेंटिनो ने कहा कि यह फैसला 'पूरी तरह से खेल से जुड़ा मामला' है. उनका तर्क है, 'हम चाहते हैं कि सभी टीमों के लिए एक जैसा माहौल हो. यह मानना मुश्किल है कि एक कोच को इसलिए मैच में बदलाव करने का मौका मिले क्योंकि गर्मी ज्यादा है, जबकि दूसरे मैच में वही मौका न मिले.'

पहले हाइड्रेशन ब्रेक सिर्फ बहुत गर्म हालात में इस्तेमाल होते थे, लेकिन इस बार हर मैच में लागू कर दिए गए.

हाइड्रेशन ब्रेक से कोच क्यों नाराज हैं?

अमेरिका के कोच मौरिसियो पोचेटिनो ने तो खुलकर नाराजगी जताई है, 'सही बताऊं तो मुझे यह ब्रेक पसंद नहीं आया. आप इससे खेल की रिदम खराब कर सकते हैं.' उन्होंने कहा कि अटलांटा जैसे स्टेडियम में जब तापमान 21-23 डिग्री सेल्सियस हो, तो ब्रेक की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, 'मुझे थोड़ा गुस्सा आता है, लेकिन यह नया नियम है जिसे हमें अपनाना होगा.'

इंग्लैंड के कोच थॉमस टुचेल ने भी कहा, 'ब्रेक खेल की पहचान को बदल देते हैं. मुझे लगता है कि यह फुटबॉल मैच की पहचान को मेरी सोच से कहीं ज्यादा बाधित करता है.' उन्होंने यह भी माना कि पहले जब ब्रेक होते थे, तो वे छोटे होते थे और सिर्फ जरूरत के समय. बिना ब्रेक के खेल खिलाड़ियों और टीमों के बीच एक लंबी लड़ाई की तरह होता है. यही इस खूबसूरत खेल की पहचान है.

हालांकि, टुचेल ने एक फायदा भी गिनाया कि ब्रेक के दौरान कोच खिलाड़ियों से सीधे बात कर सकते हैं, जो मैच के दौरान आमतौर पर मुश्किल होता है.

ऑडियंस इस नियम से खुश क्यों नहीं है?

कई स्टेडियमों में जब रेफरी ने ब्रेक का इशारा किया, तो दर्शकों ने बू-बू (नाराजगी) की आवाजें लगाईं. गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आपने इस वर्ल्ड कप के मैचों को लगभग एंटीसिपेटेड मोमेंट्स पर रुकते देखा है. अक्सर जब खेल में रफ्तार बन रही होती है, तो आप टूर्नामेंट की नई विशेषताओं में से एक को देख रहे हैं- अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक.

सबसे बड़ी शिकायत है कि यह ब्रेक खेल की लय को तोड़ देता है. जब कोई टीम दबाव बना रही होती है या कोई खिलाड़ी फॉर्म में होता है, तो अचानक 3 मिनट की रुकावट मोमेंटम को मार देती है.

क्या फुटबॉल बन रहा है बास्केटबॉल?

एक और बड़ी चिंता यह ब्रेक खेल के स्वरूप को बदल रहा है. इन ब्रेक्स के साथ फुटबॉल का खेल बास्केटबॉल और अमेरिकी फुटबॉल के जैसे दिखने लगेगा. यानी एक ऐसा खेल जो 90 मिनट लगातार बहता था, अब बार-बार रुकने वाला खेल बनता जा रहा है.

क्या यह सिर्फ पैसे के लिए है?

यहीं से शुरू होती है असली बहस. फीफा का कहना है कि 'इससे फीफा को कोई एक्स्ट्रा कमाई नहीं होती' क्योंकि सारी बिजनेस डील पहले ही साइन हो चुकी थीं. इन्फेंटिनो ने साफ कहा, 'यह हमारे लिए फाइनेंस से जुड़ा मामला नहीं है.' लेकिन यहां एक बड़ा आयरनी है:

अमेरिका में वर्ल्ड कप का प्रसारण करने वाले फॉक्स स्पोर्ट्स के लिए ये हाइड्रेशन ब्रेक सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गए हैं. क्योंकि हर ब्रेक के दौरान फॉक्स एडवर्टाइजमेंट दिखाता है.

हॉलीवुड रिपोर्टर के मुताबिक:

  • एक 30-सेकंड के एड स्लॉट की कीमत 200,000 डॉलर से 750,000 डॉलर तक है.
  • हर मैच में 6 मिनट के ब्रेक का मतलब है 2.5 मिलियन डॉलर से 9 मिलियन डॉलर प्रति मैच.
  • 104 मैचों में यह 500 मिलियन डॉलर से 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.
  • दिलचस्प बात यह है कि फॉक्स ने पूरे टूर्नामेंट के टेलिकास्टिंग राइट्स के लिए 400-500 मिलियन डॉलर चुकाए थे. यानी अकेले हाइड्रेशन ब्रेक से फॉक्स को लगभग उतना ही पैसा वसूलने की उम्मीद है, जितना उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के अधिकारों के लिए दिया था.

BBC के मुताबिक, फाक्स पर सिर्फ 30-सेकंड के स्लॉट की कीमत 200,000-300,000 डॉलर है, जो अमेरिका के मैचों और नॉकआउट फेज में 750,000 डॉलर तक पहुंच जाती है. अकेले अमेरिका में ही इन ब्रेक्स से 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा का एडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू आने की उम्मीद है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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