क्या अब 'अनहोनी को होनी' नहीं कर सकते कप्तान धोनी?
वेस्टइंडीज़ के खिलाफ बेहद करीबी और रनों के पहाड़ जैसे मुकाबले में भारतीय टीम को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा.


नई दिल्ली/फ्लोरिडा: वेस्टइंडीज़ के खिलाफ बेहद करीबी और रनों के पहाड़ जैसे मुकाबले में भारतीय टीम को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा. ये हार बारतीय फैंस को इसलिए भी ज़्यादा चुभ रही है क्योंकि एक समय जीत के दरवाज़ें पर खड़ी भारतीय टीम कप्तान धोनी जैसे सुरक्षित हाथों में होने के बावजूद मुकाबला हार गई.
टीम इंडिया के बेस्ट फिनिशर माने जाने वाले कप्तान धोनी का जलवा और किस्मत इन दिनों उनसे नाराज़ है जिसकी वजह से वो भारतीय टीम को जीत के दरवाज़ें से भी जीत दिलाने में नाकाम रहते हैं. ऐसी ही कल रात भी हुआ. केएल राहुल के साथ धोनी ने भारतीय पारी को 137 रनों से संवारकर 244 रन यानि जीत तक ले गए. जिसमें 19वें ओवर में आंद्रे रसेल की गेंद पर कप्तान धोनी ने 2 छक्के लगाकर लगभग जीत को टीम इंडिया की झोली में डाल दिया लेकिन आखिरी गेंद पर कप्तान धोनी ने हार मान ली और टीम इंडिया के हाथ से ये मैच छिटक गया.
धोनी ने अपनी चतुराई से परे एक ऐसा शॉट खेला जो बाहरी किनारा लेते हुए फील्डर के हाथ में चला गया और जिस पर टीम इंडिया को एक रन भी नसीब नहीं हुआ. धोनी की जगह ऐसा कारनामा अगर कोई और भारतीय बल्लेबाज़ करता तो शायद ये हार कम दर्द देने वाली होती लेकिन कप्तान धोनी जिन्हें टीम इंडिया के बेस्ट फिनिशर के रूप माना गया है उनसे ऐसी उम्मीद भारतीय क्रिकेट फैन्स नहीं करते.
इस हार के बाद खुद कप्तान धोनी ने भी कहा है कि, आखिरी गेंद पर गलत शॉट की वजह से उन्हें हार मिली.' धोनी ने ये भी कहा कि आखिरी गेंद पर उनकी सोच सही थी लेकिन वो उस पर अमल नहीं कर पाए.'
लेकिन कप्तान धोनी से ऐसी गलती की गुंजाइश भारतीय फैंस कम ही करते हैं और ये हार और बड़ी इसलिए हुई क्योंकि ऐसा इस साल कई बार देखा चुका है. इससे पहले जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मैच के आखिरी ओवर में भी धोनी 8 रन भी नहीं बना पाए थे. ज़िम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज के दूसरे मैच में भी धोनी ने 13 गेंद पर महज़ 9 रन जोड़े थे. इसी साल वर्ल्ड कप में भी धोनी बेरंग नज़र आए और वर्ल्ड टी20 के 5 मैच में सिर्फ 89 रन ही जोड़े.
ये तमाम आंकड़े अब धोनी की साख पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि टीम इंडिया के दर्शक और खुद भारतीय टीम भी उस धोनी को मिस कर रही है आखिरी गेंद पर भी छक्का लगाकर टीम को जीत दिलाने का दम रखता था.
धोनी ने साल 2006 में भारतीय टीम के लिए अपना पहला टी20 मुकाबला खेला. तब से लेकर अगर धोनी के टी20 अंतराष्ट्रीय आंकड़े पर नज़र डाली जाए तो वो इस बात की साफ साफ गवाही देते हैं कि पिछले एक दशक में धोनी से बेहतरीन फिनिशर और कोई नहीं रहा.
अपने 63 टी20 पारियों में धोनी 32 बार नाबाद लौटे हैं यानी 50 फीसदी से भी ज्यादा बार. इसके साथ ही टी20 में उनका औसत 36 का है जो कि टी20 क्रिकेट के हिसाब से बेहतरीन है. इसके साथ ही बेस्ट फिनिशर की उनके लिए लिखी गई परिभाषा को उनका दूसरी पारी का बल्लेबाज़ी औसत और सटीक बनाता है. धोनी ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 49.18 के औसत से बल्लेबाज़ी की है. भारतीय टीम ने जब भी लक्ष्यका पीछा करते हुए मैच जीता है तब तब धोनी का बल्ला और भी खूंखार होकर बरसा है. धोनी ने 63.25 के औसत से जीत हुए मुकाबलों में टीम इंडिया के लिए विरोधियों को पस्त है.
ऐसे में ये सवाल लाजमी है कि क्या अब कप्तान धोनी के बल्ले का वो मिडास टच पीछे छूट गया है? क्या अब धोनी टीम इंडिया के बेस्ट फिनिशर नहीं रहे?
















