'वो सिर्फ सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं...' CoE के बचाव में बोले वीवीएस लक्ष्मण
BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. इस पर वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि सीओई की भूमिका सिर्फ चोटिल खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन तक सीमित नहीं है.

बीसीसीआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पिछले काफी दिनों से चर्चा में बना हुआ है. दरअसल भारत के कई खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं, जो CoE में रिहैब कर रहे हैं. कुछ ऐसे भी हैं, जो वहां से ठीक होकर लौटे थे लेकिन फिर कुछ ही समय में फिर चोटिल हो गए. हर्षित राणा उनमें से एक हैं, जिनको लेकर एक रिपोर्ट में दावा भी किया गया कि जब उन्हें इंग्लैंड दौरे के लिए चुना गया तब उनका वजन 97 किलोग्राम था. बुमराह-सुदर्शन चोट के कारण श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो चुके हैं. अब संस्थान के बचाव में पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण आ गए हैं, जिन्होंने कहा कि सीओई की भूमिका केवल चोटिल खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन तक सीमित नहीं है.
हर्षित राणा को लेकर सवाल उठे कि जब उनका वजन बढ़ा हुआ था, तब उन्हें मैच के लिए पूरी तरह फिट क्यों करार दिया गया. नतीजा ये हुआ कि मैदान पर उतरने के बाद उनकी हैमस्ट्रिंग फिर खिंच गई, वह वापस CoE में लौट आए हैं. सेंटर पर ऐसे 13 से 14 खिलाड़ी हैं, जो रिहैब प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. इसमें बुमराह, हार्दिक पांड्या, वाशिंगटन सुंदर, साई सुदर्शन, वरुण चक्रवर्ती जैसे प्लेयर हैं.
बेंगलुरु में प्रेस कांफ्रेंस में लक्ष्मण ने कहा कि मैनेजमेंट अब खिलाडियों की फिटनेस पर अधिक जोर दे रहा है. उन्होंने कहा कि सीरीज के बीच में यो-यो टेस्ट असंभव होता है, इसलिए ब्रोंको टेस्ट लाया गया जिससे खिलाड़ियों की फिटनेस पर नजर रखी जा सके. लक्ष्मण ने कहा, "सीरीज के बीच में खिलाड़ी का यो-यो टेस्ट नहीं हो सकता, इसलिए ब्रोंको टेस्ट लाया गया जिसे एड्रियन ने तैयार किया है." इससे मैनेजमेंट को पता चलता है कि प्लेयर मैच खेलने के लिए कितना तैयार है.
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CoE is not merely a rehab centre. There are bigger roles to play for it in helping cricketers achieve excellence: CoE head VVS Laxman defines the role of BCCI CoE pic.twitter.com/Z7p64fNCRS
— Press Trust of India (@PTI_News) August 9, 2026
बुमराह और सुदर्शन की इंजरी पर क्या बोले लक्ष्मण
वीवीएस लक्ष्मण ने कहा, "साई सुदर्शन और बुमराह को फिटनेस के आधार पर अलग परखा गया. उन्हें एक पैरामीटर से दूसरे पैरामीटर तक ले जाने के बाद ही खेलने की मंजूरी दी जाती है. CoE और टीम मैनेजमेंट के बीच संवाद सहज है."
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CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं- लक्ष्मण
उन्होंने कहा, "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सिर्फ एक रिहैब सेंटर नहीं है. प्लेयर्स को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी और भी बड़ी भूमिकाएं हैं." खिलाड़ियों की चोट को लेकर उन्होंने किसी एक डिपार्टमेंट या व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने से मना किया. उन्होंने कहा, "चोट लगना खिलाड़ी के करियर का हिस्सा है. ये महत्वपूर्ण होता है कि इसकी निगरानी की व्यवस्था कैसी है. हम दोष शब्द नहीं लाते, क्योंकि इससे हम किसी को बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहे होंगे."



















