केविन पीटरसन और दिनेश कार्तिक ने मेलबर्न की पिच पर उठाए सवाल, 2 दिन के अंदर खत्म हुआ टेस्ट मैच; गिरे 36 विकेट
Kevin Pietersen and Dinesh Karthik on Melbourne pitch: ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का यह टेस्ट मैच दो दिन के अंदर खत्म हुआ. इस टेस्ट के पहले दिन 20 और दूसरे दिन 16 विकेट गिरे.

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच चौथा एशेज टेस्ट दो दिन के अंदर ही खत्म हो गया. इसके बाद मेलबर्न की पिच को लेकर इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन और भारत के पूर्व क्रिकेटर दिनेश कार्तिक ने सवाल उठाए. इस टेस्ट के पहले दिन 20 और दूसरे दिन 16 विकेट गिरे. इंग्लैंड ने 6 विकेट से मेलबर्न टेस्ट जीता और ऑस्ट्रेलिया में 14 साल का जीत का सूखा खत्म किया.
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "भारत में जब टेस्ट मैच के पहले दिन कई विकेट गिरते हैं तो भारत को हमेशा कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ता है. इसलिए मुझे उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया को भी उसी तरह की आलोचना का सामना करना पड़ेगा. न्याय सबके लिए समान होना चाहिए."
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की पिच पर 10 मिमी घास छोड़ने के फैसले से पिच से तेज गेंदबाजों को बहुत फायदा मिला, जिससे बल्लेबाजी करना मुश्किल हो गया था. इंग्लैंड ने यह मैच 4 विकेट से जीता. एशेज के पहले तीन मैच भी कुल मिलाकर 11 दिन तक चले. इस तरह से वर्तमान सीरीज में कुल 20 मैच दिनों में से केवल 13 दिन ही खेल हो पाया है. पर्थ में खेला गया पहला टेस्ट मैच भी दो दिन में समाप्त हो गया था.
पूर्व भारतीय बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने कहा, "एमसीजी की पिच साधारण नजर आ रही है. यकीन नहीं होता कि चार एशेज टेस्ट में से दो टेस्ट केवल दो दिन में खत्म हो गए. इतनी चर्चा के बावजूद चार एशेज टेस्ट सिर्फ 13 दिन में पूरे हो गए."
पीटरसन और कार्तिक की टिप्पणियां इस पर आधारित थीं कि उपमहाद्वीप में ऐसा होने पर भारतीय स्पिनरों और पिचों को अक्सर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ता है. उदाहरण के तौर पर 2020-21 की सीरीज के दौरान अहमदाबाद में टर्निंग पिच पर भारतीय स्पिनरों का सामना करने में इंग्लैंड की विफलता पर विशेषज्ञों ने जमकर आलोचना की थी.
इंग्लैंड की टीम ने तब चेन्नई में पहला टेस्ट जीता था, लेकिन अगले तीन टेस्ट मैचों में रविचंद्रन अश्विन और अक्षर पटेल के सामने उसकी बल्लेबाजी बुरी तरह फ्लॉप रही, लेकिन एशेज में तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल पिचों को लेकर बहुत अधिक आक्रोश देखने को नहीं मिला है.
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