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धोनी के वो 5 फैसले जिन्हें लेने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती!

क्रिकेट इतिहास में जब भी सफल कप्तानों का जिक्र होगा तो उसमें भारत के महेंद्र सिंह धोनी का नाम बेशक आएगा.


 


 


 


धोनी के वो 5 फैसले जिन्हें लेने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती!

नई दिल्ली: क्रिकेट इतिहास में जब भी सफल कप्तानों का जिक्र होगा तो उसमें भारत के महेंद्र सिंह धोनी का नाम बेशक आएगा. धोनी का नाम भारत के ही नहीं विश्व के सफलतम कप्तानों की सूची में आता है. धोनी ने बुधवार को भारत की एकदिवसीय और टी-20 क्रिकेट टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे दिया है. लेकिन उनके 9 सालों के कप्तानी वाले करियर में उन्होंने कई मौके पर ऐसे फैसले लिए जिन्हें लेने की हिम्मत हर कोई नहीं कर सकता. 


 


आइये जानें धोनी के लिए ऐसे 5 फैसले:


धोनी के वो 5 फैसले जिन्हें लेने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती!

जोगिंदर शर्मा को आखिरी ओवर:


साल 2007 में मिली कप्तानी को एमएस धोनी ने पहले वर्ल्ड टी20 टाइटल को भारत की झोली में डालकर सही साबित कर दिया. कप्तान धोनी ने वर्ल्ड टी20 के दौरान जोगिंदर शर्मा को टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में आखिरी ओवर सौंप दिया. इस मुकाबले में धोनी के पास आरपी सिंह, एस श्रीसंत और हरभजन सिंह जैसे अनुभवी गेंदबाज़ मौजूद थे लेकिन धोनी ने अपने मन की सुनी और युवा जोगिंदर के हाथों में गेंद थमा दी. 


 


जोगिंदर ने भी कप्तान की उम्मीदों को पूरा करते हुए बेहतरीन गेंदबाज़ी कर आखिरी ओवर में मिसबाह का अहम विकेट झटक 3 गेंदे बाकी रहते भारतीय टीम को जीत दिला दी. कप्तान धोनी के इस हिम्मत वाले फैसले की वर्ल्ड क्रिकेट में जमकर तारीफ भी हुई. 


 


2011 विश्वकप में युवराज से पहले मैदान पर आना:


साल 2011 में भारतीय टीम ने 28 साल बाद क्रिकेट विश्वकप जीता लेकिन फाइनल मुकाबले में एक वक्त लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय पारी लड़खड़ाने लगी और टीम इंडिया ने सहवाग, सचिन और विराट कोहली समेत 114 के स्कोर पर अपने 3 सबसे अहम विकेट गंवा दिए. इसके बाद पूरे टूर्नामेंट में युवराज सिंह बल्लेबाज़ी करने आए लेकिन धोनी ने फाइनल में युवराज से पहले बल्लेबाज़ी के लिए आकर श्रीलंकाई टीम की रणनीति पर पानी फेर दिया. 


धोनी के वो 5 फैसले जिन्हें लेने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती!

तीसरे विकेट के बाद कप्तान धोनी और गौतम गंभीर के बीच हुई 109 रनों की मैच जिताऊ साझेदारी की मदद से भारतीय टीम विश्व विजेता बनी. 


 


इशांत शर्मा को दिया अहम ओवर: 


साल 2013 में इंग्लैंड में भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी में एक बार फिर अपना दम दिखाया. कप्तान धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया. फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने इंग्लैंड के सामने 20 ओवर में 130 रनों का मामूली सा लक्ष्य रखा जिसके बाद सभी भारतीय फैंस की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई. घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम पारी के 17वें ओवर तक महज़ 4 विकेट गंवाकर 102 रन बनाकर जीत की तरफ आसानी से बढ़ रही थी लेकिन पारी का 18वां ओवर कप्तान धोनी ने उस गेंदबाज़ के हाथ में सौंप दिया जिसकी मैच में बहुत पिटाई हुई थी. 


 


जी हां यानि इशांत शर्मा, 18वें ओवर से पहले इशांत ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में 3 ओवर में 27 रन लुटा दिए थे जबकि वो एक भी विकेट नहीं चटका पाए. कप्तान धोनी ने जब इशांत को गेंद सौंपी तो सभी फैंस निराश हो गए, क्रिकेट के बड़े-बड़े जानकारों ने धोनी के इस फैसले पर सवाल खड़ा कर दिए. लेकिन ये फैसला धोनी का था और जो बाद में भी सही साबित हुआ. इशांत ने उस ओवर में शानदार बल्लेबाज़ी कर रहे रवि बोपारा और इओन मोर्गन के विकेट चटकाकर भारतीय टीम की मैच में वापसी करवा दी और एक वक्त पर 18 गेंदों पर 28 रनों की ज़रूरत के साथ जीत की तरफ बढ़ रही इंग्लैंड की टीम मैच को 5 रनों के अंतर से गंवा बैठी. 


 


टेस्ट क्रिकेट से संन्यास: 


30 दिसंबर, साल 2014. ये वही दिन है जिस दिन धोनी ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट मैचों की सीरीज़ के लिए धोनी को कप्तान नियुक्त किया गया. सीरीज़ में भारतीय टीम ने पहले 2 मुकाबले गंवाए लेकिन तीसरे टेस्ट को धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ड्रॉ करने में सफल रही लेकिन कप्तान धोनी ने हार के बाद नहीं बल्कि एमसीजी में ड्रॉ मैच के बाद अचानक सीरीज़ के बीच संन्यास का एलान कर दिया. 


 


धोनी के इस एलान की जानकारी किसी को नहीं थी. जबकि भारतीय टीम को इस सीरीज़ में एक मैच खेलना अभी बाकी थी. जिसकी कप्तानी बाद में विराट कोहली ने की. 


 


लेकिन धोनी के इस फैसले की जमकर प्रशंसा हुई क्योंकि उससे पहले भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ 3-1 से सीरीज़ गंवा चुकी थी जबकि भारतीय टीम का टेस्ट क्रिकेट में सितारा डूबता नज़र आ रहा था. धोनी के इस फैसले को इसलिए भी बहुत अधिक सम्मान मिला क्योंकि उन्होंने अपने रिकॉर्ड की परवाह किए बगैर ही संन्यास का एलान कर दिया. धोनी अगर चाहते तो 10 टेस्ट और खेल सकते थे जिससे वो भारत के लिए 100 टेस्ट मैच खेल जाते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. 


 


वनडे-टी20 की कप्तानी का त्याग: 


टी20 में विश्वकप, 50 ओवर के क्रिकेट में विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया चैंपियन. जी हां ये सब भारतीय टीम को मिला कप्तान एमएस धोनी की कप्तानी में. धोनी विश्व क्रिकेट के इकलौते ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने ये तीनों ट्रॉफी अपने नाम की हो लेकिन कल रात यानि 4 जनवरी को कप्तान धोनी ने अचानक वनडे और टी20 में कप्तानी छोड़ने का एलान कर दिया. ये फैसला इतना अचानक हुआ जिसकी किसी को भनक भी नहीं लगी. 


धोनी के वो 5 फैसले जिन्हें लेने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती!

धोनी अकसर अपने ऐसे फैसलों के लिए ही जाने जाते रहे हैं और इस बार भी इंग्लैंड के खिलाफ 15 जनवरी से शुरू होने वाली वनडे सीरीज़ से ठीक पहले उन्होंने कप्तानी छोड़ने का फैसला कर लिया. धोनी का ये फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि अब क्रिकेट विश्वकप 2019 की तैयारियों के लिए विराट कोहली के पास पूरे 30 महीने का समय बाकी है. धोनी ने भारत के लिए अपने कार्यकाल में कुल 199 वनडे मकाबलों में कप्तानी की और 110 मैचों में टीम इंडिया को जीत दिलाई जबकि 74 मुकाबलों में उनकी टीम को हार मिली. 


 


लेकिन धोनी के ये वो फैसले रहे जिनकी भनक किसी को नहीं लगी और जाते-जाते भी वो अपने फैसलों से सबसे दिलों पर छा गए.





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