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'बुजुर्गो की तुलना में युवा पीढ़ी भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी'

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउन्डेशन ने सोमवार को गोलकीपर्स ग्लोबल यूथ सर्वे के परिणामों में इसका खुलासा किया है कि युवा पीढ़ी, बुजुर्गो की तुलना में भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी है.

सिएटल: युवा पीढ़ी, बुजुर्गो की तुलना में भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी है. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउन्डेशन ने सोमवार को गोलकीपर्स ग्लोबल यूथ सर्वे के परिणामों में इसका खुलासा किया है. इस जनमत सर्वेक्षण को इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में आयोजित फाउन्डेशन के दूसरे सालाना गोलकीपर्स कार्यक्रम से पहले इप्सोस पब्लिक अफेयर्स के द्वारा लांच किया गया. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउन्डेशन के बयान के अनुसार, सर्वेक्षण में 15 देशाों के वयस्कों और युवाओं को शामिल किया गया और उनके व्यक्तिगत जीवन, उनके समुदाय से जुड़ी चुनौतियों तथा उनके देशों की प्रगति की दशा के बारे में सवाल पूछे गए.

विश्व बैंक रैंकिंग के आधार पर उच्च आय वर्ग वाले देशों (ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, स्वीडन, संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब) और निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों (ब्राजील, चीन, भारत, इंडोनेशिया, केन्या, मैक्सिको, नाइजीरिया और रूस) में 12 साल और इससे अधिक आयु वर्ग के 40,000 से अधिक लोगों से आंकड़े इकट्ठा किए गए.

सर्वेक्षण में पाया गया है कि युवा अपने भविष्य, अपने देश के भविष्य और दुनिया के भविष्य को लेकर बुजुर्गो की तुलना में ज्यादा आशावादी हैं. आशावाद का स्तर निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों के 12 से 24 आयु वर्ग के युवाओं में सबसे अधिक है. सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि इन देशों के युवाओं का मानना है कि वे अपने देशों में शासन के तरीकों को प्रभावित कर सकते हैं अैर उनकी माता-पिता की पीढ़ियों की तुलना में आने वाली पीढ़ियां दुनिया पर अधिक सकारात्मक प्रभाव पैदा करेंगी.

पिछले सप्ताह जारी इस साल की गोलकीपर्स डेटा रिपोर्ट, जिसका सह-लेखन एवं सम्पादन बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स के द्वारा किया गया है, के मद्देनजर सर्वेक्षण के परिणाम दर्शाते हैं कि निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों ने गरीबी और बीमारियों से संघर्ष करते हुए पिछले कुछ दशकों के दौरान आश्चर्यजनक प्रगति की है.

पिछले 18 सालों में अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या 100 करोड़ से भी अधिक कम हुई है, हालांकि सबसे गरीब देशों, विशेष रूप से सब-सहारा अफ्रीका में तेजी से बढ़ती आबादी, दुनिया की भावी प्रगति में बाधक हो सकती है. इस साल की रिपोर्ट बताती है कि युवाओं, विशेष रूप से उनके स्वास्थ्य एवं शिक्षा में निवेश, उत्पादकता और रचनात्मकता को बढ़ाने के अलावा प्रगति को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा.

उच्च आय वर्ग वाले देशों के आधे लोगों की तुलना में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में 12 से 24 आयु वर्ग के कुल 79 फीसदी लोगों का मानना है कि वे दुनिया के भविष्य को लेकर आशावादी हैं. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एस.डी.जी.) में से गरीबी उन्मूलन (33 फीसदी), शिक्षा में सुधार (31 फीसदी), नौकरियों की सुलभता (27 फीसदी) शीर्ष पायदान की प्राथमिकताएं हैं. सभी आयुवर्ग के लोगों को मानना है कि उनके नेताओं को इन लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए.

उच्च आय वर्ग वाले देशों में गरीबी उन्मूलन (29 फीसदी), जलवायु परिवर्तन का समाधान (24 फीसदी), शिक्षा में सुधार (21 फीसदी) और विश्व में सामंजस्य (21 फीसदी) मुख्य प्राथमिकताएं हैं. निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में शिक्षा में सुधार (41 फीसदी), गरीबी उन्मूलन (37 फीसदी) और नौकरियों की सुलभता (32 फीसदी) मुख्य प्राथमिकताएं हैं.

25 सितम्बर की शाम बिल और मेलिंडा गेट्स की सह मेजबानी में गोलकीपर्स ग्लोबल गोल अवॉर्डस आयोजित किए जाएंगे. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउन्डेशन एवं यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित ये पुरस्कार उन युवाओं को सम्मानित करेंगे जिन्होंने यूएन के 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो. ये पुरस्कार चार श्रेणियों में दिए जाएंगे- प्रोग्रेस अवॉर्ड, चेंजमेकर अवॉर्ड, कैम्पेन अवॉर्ड और ग्लोबल गोलकीपर्स अवॉर्ड.

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मास्टर स्ट्रोक : फुल एपिसोड । 24 सितम्बर 2018

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