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ट्रंप की चेतावनी बेअसर: लेबनान के बहाने फिर भिड़े ईरान-इजरायल, आधी रात को मिसाइलों से दहल उठा मिडिल-ईस्ट!

Donald Trump US Iran: नेतन्याहू ने ट्रंप की एक ना सुनी और रविवार को इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बड़ा हवाई हमला किया.

ईरान और इजरायल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बावजूद फिर भिड़ गए. अहम बात यह है कि जब ट्रंप और ईरान के बीच डील होने वाली थी, तब मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर से भयंकर युद्ध शुरु हो चुका है. आखिर ईरान और इजरायल 100 दिन बाद लेबनान को लेकर क्यों भिड़ गए. 8 जून को जब पूरी दुनिया नींद के आगोश में थी, तब ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से इजरायल पर बड़ा हमला बोल दिया. ईरान ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव, हाइफा पोर्ट, वेस्ट बैंक सहित तीन बड़े मिलिट्री बेस पर खबैर-शिकन जैसी कुल 11 बैलिस्टिक मिसाइल से जोरदार हमला किया.

इजरायल के जिन तीन मिलिट्री बेस पर अटैक किया गया,उनमें हाइफा के करीब रमत डेविट बेस, तेल नोफ और नवातिम शामिल थे. ईरान के हमलों का इजरायल ने तुरंत जवाब दिया और एक साथ एक दर्जन से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इजरायल डिफेंस फोर्स यानी IDF के एक दर्जन से ज्यादा फाइटर जेट ने ईरान के अलग-अलग हिस्सों में हवाई हमले किए. इनमें ईरान की राजधानी तेहरान के बाहरी इलाके करज में IRGC के टॉप कमांडर के ठिकाने शामिल थे. इसके अलावा, इस्फ़हान और तबरीज में मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी सहित खुजेस्तान प्रांत में 02 बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट शामिल थे.

ये युद्ध महज ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा. ईरान ने इराक में कुर्द लड़ाकों के ठिकानों पर हमला किया, जिन्हें अमेरिका का पिछलग्गू माना जाता है. वहीं यमन में ईरान के प्रॉक्सी मिलिशिया हूती विद्रोहियों ने इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर मिसाइल से अटैक किया तो इजरायल के समुद्री मार्ग को लाल सागर में पूरी तरह बंद करने की धमकी दे डाली. इसके अलावा सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी सुल्तान मिलिट्री बेस पर हमले की खबर सामने आई.

40 दिन के बाद हुआ था सीजफायर

दरअसल, 40 दिन की जंग के बाद 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम की घोषणा कर दी थी. इजरायल को भी इस सीजफायर में शामिल किया गया था. लेकिन बाद में शांति वार्ता के दौरान, ईरान ने अमेरिका के सामने शर्त रखी की लेबनान पर कोई हमला नहीं होना चाहिए. क्योंकि लेबनान में ईरान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह पर इजरायल के हमले जारी थे. लेबनान और हिजबुल्लाह को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पेंच फंसा हुआ था. पिछले हफ्ते, ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेबनान पर हमले ना करने के लिए फोन कॉल किया था. लेकिन इस फोन कॉल में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच नोंकझोंक हो गई. जबकि, ट्रंप और नेतन्याहू की करीबियों दुनिया से छिपी नहीं रही हैं. अमेरिका और इजरायल के ऐतिहासिक संबंध भी जगजाहिर हैं.

नेतन्याहू ने ट्रंप की एक ना सुनी और रविवार को इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बड़ा हवाई हमला किया. इजरायल ने बेरूत के दाहिये इलाके पर एयर स्ट्राइक की, जिसे ईरान समर्थित हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है. इजरायल ने बेरूत में हवाई हमला ऐसे समय में किया जब एक दिन पहले लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आओन अमेरिका के साथ डील में लेबनान को शामिल करने के लिए ईरान को खरी खोटी सुनाई थी.

जोसेफ ने साफ तौर से कहा कि अमेरिका के साथ शांति वार्ता में ईरान ने लेबनान को एक बार्गेनिंग-चिप के तौर पर इस्तेमाल किया है, किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. जोसेफ ने ईरान के प्रोक्सी आतंकी समर्थन हिजबुल्लाह पर भी अपनी भड़ास निकाली और साफ लहजे में कहा कि वार्ता के लिए तैयार रहना होगा.

इजरायल ने हिजबुल्लाह के आतंकियों पर बरपाया कहर

40 दिन की ईरान जंग (28 फरवरी-8 अप्रैल) के बाद से इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के आतंकियों पर कहर बरपा रखा था. राजधानी बेरूत समेत दक्षिणी लेबनान में इजरायली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने हवाई हमलों में हिजबुल्लाह की रीढ़ की हड्डी तोड़कर रख दी है. इजरायल ने ऐलान कर दिया है कि अपने देश की सीमा से लेकर दक्षिणी लेबनान में करीब 35 किलोमीटर तक का एक बफर जोन बनाया जाएगा. ऐसे में यहां पर आईडीएफ की सेना ने एक बड़े हिस्सा पर कब्जा कर आगे बढ़ाना शुरु कर दिया था.

इजरायल के ताबड़तोड़ हवाई हमलों में जबरदस्त कोलेट्रल-डैमेज हुआ है और बड़ी संख्या में हिजबुल्ला के आतंकी (लड़कों) समेत मासूम नागरिकों की जान जा रही है. इजरायली हमलों में घर, दफ्तर, अस्पताल, सभी जमींदोज हो चुके हैं और दक्षिणी लेबनान, दूसरा गाजा बनने के लिए तैयार है.

हिजबुल्लाह भी हालांकि, हार मानने के लिए तैयार नहीं है और ईरान द्वारा सप्लाई किए गए आत्मघाती ड्रोन से आईडीएफ पर हमले जारी रखे है. इन हमलों में इजरायली सैनिकों की जान गई है. ऐसे में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह को पूरी तरह सफाया करने तक हमले जारी रखने की घोषणा की है. इजरायल बार-बार कह रहा है कि आईडीएफ के हमले, लेबनान पर नहीं बल्कि हिजबुल्लाह को निशाना लगाकर किए जा रहे हैं. दरअसल, लेबनान में जोसेफ सरकार और लेबनानी सेना से ज्यादा हिजबुल्लाह का प्रभाव है. शहर की गलियों में लेबनानी पुलिस के बजाए हिजबुल्ला के लड़ाकों का जोर चलता है. लेबनानी सेना भी हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकिचाती है.

ऐसे में जब रविवार को इजरायल ने बेरूत पर अटैक किया तो ईरान भन्ना गया और इजरायल पर मिसाइल अटैक कर दिया. जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने भी एयर स्ट्राइक कर दी. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को एक बार फिर ईरान और इजरायल के बीच कूदना पड़ा. ट्रंप ने ईरान और इजरायल से सीजफायर की अपील की और महज कुछ घंटे बाद ही ईरान ने इजरायल पर हमले रोकने की घोषणा कर दी. लेकिन इजरायल ने साफ कह रखा है कि हमले हिजबुल्लाह पर किए जा रहे हैं, लेबनान पर नहीं. ऐसे में जब तक  अमेरिका, इजरायल और ईरान में स्थायी समझौता नहीं होता, मिडिल-ईस्ट में जंग की तलवार लटकी रहेगी.

यह भी पढ़ें : 'जहाज में भर रहा पानी, लाइफ बोट पर आग', US नेवी का अटैक, रेस्क्यू कर 24 भारतीयों को बचाया

नीरज राजपूत वॉर, डिफेंस और सिक्योरिटी से जुड़े मामले देखते हैं. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का अनुभव है. एबीपी न्यूज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अनकट के 'फाइनल-असॉल्ट' कार्यक्रम के प्रेजेंटर भी हैं.
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